राजनीति

राज्य आंदोलनकारियों के अधिकारों की आवाज

अधिकारों की अनदेखी पर भड़के उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारी, कांडा पड़ाव में धरना-प्रदर्शन कर दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी (बागेश्वर) ‘स्वर स्वतंत्र’ (विपिन जोशी) उत्तराखंड: अलग राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले राज्य आंदोलनकारियों के अधिकारों की आवाज एक बार फिर बुलंद हो गई है। बागेश्वर जनपद के चिह्नित राज्य आंदोलनकारियों को

पहाड़ में ‘बीमार’ स्वास्थ्य व्यवस्था

पहाड़ में ‘बीमार’ स्वास्थ्य व्यवस्था: चार डॉक्टरों के भरोसे 101 ग्रामसभाओं वाली कत्यूर घाटी – विपिन जोशी, गरुड़ (कत्यूर घाटी) उत्तराखंड राज्य स्थापना के ढाई दशक बाद भी पर्वतीय अंचलों में स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। सरकारें भले ही सूबे में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे करें,

आर्थिक संकट, ‘रोल प्ले’ और पारदर्शिता का सवाल

आर्थिक संकट, ‘रोल प्ले’ और पारदर्शिता का सवाल: देशभक्ति के चश्मे से नहीं, ठोस रणनीति से संभलेगा बाज़ार – विपिन जोशी, ‘स्वर स्वतंत्र’ भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और लगातार गोते खाता बाज़ार किसी अचानक आई आपदा का परिणाम नहीं हैं। जब देश का बाज़ार मंदी, महंगाई और घटती क्रय शक्ति से जूझ रहा हो,

बागेश्वर जन -सरोकारों की गूँज

विपिन जोशी पूर्व मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावित कनलगढ़ घाटी का लिया जायजा, गरुड़ में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के आंदोलन को दिया समर्थन। कपकोट/गरुड़। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता हरीश रावत ने शनिवार को बागेश्वर जिले के कपकोट और गरुड़ क्षेत्रों का सघन दौरा कर स्थानीय जन-समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उनके इस दौरे

बंगाल चुनाव और सत्ता का जायका

‘रिकॉर्ड वोटिंग’ और ‘ज़ायके’ की सियासत

विशेष चुनावी विश्लेषण : विपिन जोशी बंगाल चुनाव 2026: ‘रिकॉर्ड वोटिंग’ और ‘ज़ायके’ की सियासत—सत्ता की चाबी किसके पास? कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान ने न केवल राज्य, बल्कि देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। 23 अप्रैल को हुए मतदान में 92.03% का ऐतिहासिक टर्नआउट दर्ज

साहसिक पर्यटन का आगाज : खुल गया पिंडारी ट्रेक

विपिन जोशी साहसिक पर्यटन का नया आगाज़: खुल गए पिण्डारी ग्लेशियर के द्वार, सुरम्य वादियों में गूँजेगी अब पदचापों की थाप कपकोट: पिण्डारी ग्लेशियर कुमाऊं हिमालय का एक प्रमुख ग्लेशियर है, जो नंदा देवी और नंदा कोट चोटियों के बीच स्थित है। यह पिण्डर नदी का उद्गम स्थल भी है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता व

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू (स्याल्दे—बिखौती कौतिक पर विशेष) आज द्वाराहाट में हूं, स्याल्दे-बिखौती के मेले में। अक्सर आता ही हूं, हर साल। हमारे यहां कहावत है कि चाहे ‘बल्द बिचै जो लेकिन स्याल्दे-बिखौति जांण छू।’ स्याल्दे-बिखौती कई यादें लेकर आती है। सत्तर का दशक। 1974-75 का समय। हम बहुत छोटे थे।

समता और संवैधानिक नैतिकता का आह्वान

विपिन जोशी .. समता और संवैधानिक नैतिकता का आह्वान दीपशिखा से प्रज्वलित हुआ समता का संकल्प कोट भ्रामरी के पावन प्रांगण में ‘समता सद्भावना मंच’ के तत्वावधान में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पूरी वैचारिक गरिमा के साथ मनाई गई। समारोह का आगाज पद्मश्री राधा भट्ट, उत्तरकाशी से आए सर्वोदयी सुरेश भाई, नगर

गरुड़ में गूंजा समता का स्वर

बाबा साहेब की जयंती पर दीपों से जगमगाया सांस्कृतिक मंच गरुड़ (बागेश्वर):भारतीय संविधान के शिल्पी, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर कोट भ्रामरी स्थित अंबेडकर सांस्कृतिक मंच आस्था, सद्भावना और वैचारिक क्रांति का केंद्र बन गया। विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने एकजुट होकर बाबा साहेब को

नदी में बहती संवेदना और दम तोड़ता विज्ञान

नर्मदा के तट पर मंत्रोच्चार हो रहे थे, शंख बज रहे थे और ग्यारह हजार लीटर सफेद, शुद्ध दूध पवित्र धारा में विसर्जित किया जा रहा था। किनारे खड़ी भीड़ इसे ‘महा-अनुष्ठान’ कह रही थी, सोशल मीडिया इसे ‘परंपरा’ बता रहा था, लेकिन क्या किसी ने उस दूध की धार में दम तोड़ते जलीय जीवन और इतिहास के पन्नों में सिसकते ‘अश्वत्थामा’ को देखा?
यह घटना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आधुनिक व्यवस्था, अंधी आस्था और वैज्ञानिक समझ के बीच के गहरे द्वंद्व का प्रतिबिंब है।
इतिहास का दोहराव: धृतराष्ट्र की सत्ता और अश्वत्थामा का कटोरा
हस्तिनापुर का वह काल याद कीजिए, जहाँ धृतराष्ट्र सत्ता के केंद्र में थे। आँखें नहीं थीं, इसलिए दृश्य गौण थे और मोह प्रधान। उस दौर में भी दूध संपन्नता का प्रतीक था। कौरवों के महलों में दूध की नदियाँ बहती थीं, लेकिन उसी राज्य में गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र अश्वत्थामा दूध के लिए तरसता था।

राज्य आंदोलनकारियों के अधिकारों की आवाज

अधिकारों की अनदेखी पर भड़के उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारी, कांडा पड़ाव में धरना-प्रदर्शन कर दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी (बागेश्वर) ‘स्वर स्वतंत्र’ (विपिन जोशी) उत्तराखंड: अलग राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले राज्य आंदोलनकारियों के अधिकारों की आवाज एक बार फिर बुलंद हो गई है। बागेश्वर जनपद के चिह्नित राज्य आंदोलनकारियों को

पहाड़ में ‘बीमार’ स्वास्थ्य व्यवस्था

पहाड़ में ‘बीमार’ स्वास्थ्य व्यवस्था: चार डॉक्टरों के भरोसे 101 ग्रामसभाओं वाली कत्यूर घाटी – विपिन जोशी, गरुड़ (कत्यूर घाटी) उत्तराखंड राज्य स्थापना के ढाई दशक बाद भी पर्वतीय अंचलों में स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। सरकारें भले ही सूबे में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे करें,

आर्थिक संकट, ‘रोल प्ले’ और पारदर्शिता का सवाल

आर्थिक संकट, ‘रोल प्ले’ और पारदर्शिता का सवाल: देशभक्ति के चश्मे से नहीं, ठोस रणनीति से संभलेगा बाज़ार – विपिन जोशी, ‘स्वर स्वतंत्र’ भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और लगातार गोते खाता बाज़ार किसी अचानक आई आपदा का परिणाम नहीं हैं। जब देश का बाज़ार मंदी, महंगाई और घटती क्रय शक्ति से जूझ रहा हो,

बागेश्वर जन -सरोकारों की गूँज

विपिन जोशी पूर्व मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावित कनलगढ़ घाटी का लिया जायजा, गरुड़ में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के आंदोलन को दिया समर्थन। कपकोट/गरुड़। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता हरीश रावत ने शनिवार को बागेश्वर जिले के कपकोट और गरुड़ क्षेत्रों का सघन दौरा कर स्थानीय जन-समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उनके इस दौरे

बंगाल चुनाव और सत्ता का जायका

‘रिकॉर्ड वोटिंग’ और ‘ज़ायके’ की सियासत

विशेष चुनावी विश्लेषण : विपिन जोशी बंगाल चुनाव 2026: ‘रिकॉर्ड वोटिंग’ और ‘ज़ायके’ की सियासत—सत्ता की चाबी किसके पास? कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान ने न केवल राज्य, बल्कि देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। 23 अप्रैल को हुए मतदान में 92.03% का ऐतिहासिक टर्नआउट दर्ज

साहसिक पर्यटन का आगाज : खुल गया पिंडारी ट्रेक

विपिन जोशी साहसिक पर्यटन का नया आगाज़: खुल गए पिण्डारी ग्लेशियर के द्वार, सुरम्य वादियों में गूँजेगी अब पदचापों की थाप कपकोट: पिण्डारी ग्लेशियर कुमाऊं हिमालय का एक प्रमुख ग्लेशियर है, जो नंदा देवी और नंदा कोट चोटियों के बीच स्थित है। यह पिण्डर नदी का उद्गम स्थल भी है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता व

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू (स्याल्दे—बिखौती कौतिक पर विशेष) आज द्वाराहाट में हूं, स्याल्दे-बिखौती के मेले में। अक्सर आता ही हूं, हर साल। हमारे यहां कहावत है कि चाहे ‘बल्द बिचै जो लेकिन स्याल्दे-बिखौति जांण छू।’ स्याल्दे-बिखौती कई यादें लेकर आती है। सत्तर का दशक। 1974-75 का समय। हम बहुत छोटे थे।

समता और संवैधानिक नैतिकता का आह्वान

विपिन जोशी .. समता और संवैधानिक नैतिकता का आह्वान दीपशिखा से प्रज्वलित हुआ समता का संकल्प कोट भ्रामरी के पावन प्रांगण में ‘समता सद्भावना मंच’ के तत्वावधान में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पूरी वैचारिक गरिमा के साथ मनाई गई। समारोह का आगाज पद्मश्री राधा भट्ट, उत्तरकाशी से आए सर्वोदयी सुरेश भाई, नगर

गरुड़ में गूंजा समता का स्वर

बाबा साहेब की जयंती पर दीपों से जगमगाया सांस्कृतिक मंच गरुड़ (बागेश्वर):भारतीय संविधान के शिल्पी, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर कोट भ्रामरी स्थित अंबेडकर सांस्कृतिक मंच आस्था, सद्भावना और वैचारिक क्रांति का केंद्र बन गया। विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने एकजुट होकर बाबा साहेब को

नदी में बहती संवेदना और दम तोड़ता विज्ञान

नर्मदा के तट पर मंत्रोच्चार हो रहे थे, शंख बज रहे थे और ग्यारह हजार लीटर सफेद, शुद्ध दूध पवित्र धारा में विसर्जित किया जा रहा था। किनारे खड़ी भीड़ इसे ‘महा-अनुष्ठान’ कह रही थी, सोशल मीडिया इसे ‘परंपरा’ बता रहा था, लेकिन क्या किसी ने उस दूध की धार में दम तोड़ते जलीय जीवन और इतिहास के पन्नों में सिसकते ‘अश्वत्थामा’ को देखा?
यह घटना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आधुनिक व्यवस्था, अंधी आस्था और वैज्ञानिक समझ के बीच के गहरे द्वंद्व का प्रतिबिंब है।
इतिहास का दोहराव: धृतराष्ट्र की सत्ता और अश्वत्थामा का कटोरा
हस्तिनापुर का वह काल याद कीजिए, जहाँ धृतराष्ट्र सत्ता के केंद्र में थे। आँखें नहीं थीं, इसलिए दृश्य गौण थे और मोह प्रधान। उस दौर में भी दूध संपन्नता का प्रतीक था। कौरवों के महलों में दूध की नदियाँ बहती थीं, लेकिन उसी राज्य में गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र अश्वत्थामा दूध के लिए तरसता था।