विपिन जोशी
साहसिक पर्यटन का नया आगाज़: खुल गए पिण्डारी ग्लेशियर के द्वार, सुरम्य वादियों में गूँजेगी अब पदचापों की थाप
कपकोट: पिण्डारी ग्लेशियर कुमाऊं हिमालय का एक प्रमुख ग्लेशियर है, जो नंदा देवी और नंदा कोट चोटियों के बीच स्थित है। यह पिण्डर नदी का उद्गम स्थल भी है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता व ट्रैकिंग के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। पिण्डारी ग्लेशियर लगभग 3 किलोमीटर लंबा और 350 मीटर चौड़ा है।
हिमालय की गोद में बसी शांत और सुरम्य वादियों के शौकीनों के लिए एक सुखद खबर है। तहसील कपकोट के अंतर्गत विश्व प्रसिद्ध पिण्डारी ग्लेशियर ट्रेक आज, 15 अप्रैल 2026 से पर्यटकों और साहसिक ट्रैकर्स के लिए आधिकारिक तौर पर खोल दिया गया है। आगामी 15 जून 2026 तक चलने वाले इस ट्रेकिंग सीजन के लिए प्रशासन और वन विभाग ने अपनी कमर कस ली है।
ट्रेक रूट पर पर्यटकों की सुगमता और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वन विभाग द्वारा विशेष ड्यूटियां लगाई गई हैं। दुर्गम रास्तों पर पर्यटकों के मार्गदर्शन के लिए अनुभवी वन कर्मी तैनात रहेंगे, ताकि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की चुनौती से निपटा जा सके।
पर्यटन मौज-मस्ती नहीं, संस्कृति और इतिहास का संगम
पिण्डारी ग्लेशियर सिर्फ बर्फ का एक पहाड़ नहीं, बल्कि साहसिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र है। हालांकि, पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि इसे देखने का नजरिया बदलने की जरूरत है। पर्यावरणविदों के अनुसार, पारिस्थितिक तंत्र को बचाने के लिए पिण्डारी को ‘प्योर ट्रेकिंग ज़ोन’ के रूप में ही विकसित किया जाना चाहिए।
पर्यटन के क्षेत्र में लाइफ टाइम अचीवमेंट’ से सम्मानित कौसानी के वरिष्ठ होटल व्यवसायी बी.डी. जोशी ने इस अवसर पर तीखी लेकिन रचनात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा:

“उत्तराखंड में ट्रेकिंग, धार्मिक पर्यटन, जंगल सफारी और साहसिक खेलों की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकारों ने पिण्डारी जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के रूट पर भी अब तक बुनियादी सुविधाएं विकसित नहीं की हैं। हमें पर्यटन को केवल मनोरंजन से जोड़कर नहीं, बल्कि समाज की संस्कृति और इतिहास की साझी झलक के रूप में देखना होगा।”

उत्तराखंड में पर्यटन को पर्यावरण संरक्षणके साथ जोड़ना अनिवार्य हो गया है। जानकारों का मानना है कि यदि पर्यटन ‘संतुलित’ हो, तो यह न केवल हिमालय की मर्यादा बचाए रखेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खोलेगा। साथ में बुनियादी सुविधाओं का विकास और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन नीति की माँग भी स्थानीय लोगों द्वारा की जा रही है ।
जब पर्यटक स्थानीय संस्कृति और इतिहास से रूबरू होंगे, तभी पर्यटन का असली उद्देश्य सफल होगा। फिलहाल, आज से शुरू हो रहे इस सफर ने ट्रैकर्स के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी है।
मुख्य बिंदु एक नज़र में
ट्रेक की अवधि: 15 अप्रैल 2026 से 15 जून 2026।
विशेषता: उच्च हिमालयी शिखर और विश्व प्रसिद्ध साहसिक रूट।
प्रशासनिक तैयारी: वन कर्मियों की तैनाती और रूट की मॉनिटरिंग।


















