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संचेतना और संस्कारों की अमिट छाप

संचेतना और संस्कारों की अमिट छाप: ‘मंजू जोशी स्मृति हिन्दी मेधावी सम्मान’

“शिक्षक कभी सेवानिवृत्त या ओझल नहीं होते, वे अपने रोपे गए ज्ञान के बीजों और संस्कारों के रूप में सदा जीवित रहते हैं।”

हिन्दी दिवस का पावन अवसर केवल मातृभाषा के प्रति सम्मान व्यक्त करने का दिन ही नहीं है, बल्कि उन देवतुल्य गुरुओं को नमन करने का भी पर्व है जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भाषा के प्रचार-प्रसार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में समर्पित कर दिया। इसी पावन भावना को जीवंत रखते हुए, दिवंगत आदर्श हिन्दी शिक्षिका स्वर्गीय मंजू जोशी जी की पावन स्मृति में उनके परिजनों द्वारा ‘मंजू जोशी स्मृति हिन्दी मेधावी सम्मान’ की घोषणा की गई है।

मेधावियों का शानदार प्रदर्शन और चयन

सेंट एडम्स पब्लिक स्कूल, अयारतोली (गरुड़) में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने सीबीएसई (CBSE) बोर्ड परीक्षाओं में मातृभाषा हिन्दी में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपनी शिक्षिका को सच्ची श्रद्धांजलि दी है।

* इन्टरमीडिएट (12वीं): हर्षित बड़सीला और सुमित जोशी (सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन – 97% अंक)

* हाईस्कूल (10वीं): रिया पुरोहित और नियति नगरकोटी (सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन – 99% अंक)

अंकतालिका पर चमकते ये अंक केवल कागजी सफलता नहीं हैं, बल्कि यह उस अटूट साधना और समर्पण का प्रतिफल हैं जो स्वर्गीय मंजू जोशी जी ने अपने विद्यार्थियों के भीतर सींचा था। हाईस्कूल में 99 प्रतिशत और इंटर में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त कर इन मेधावी छात्र-छात्राओं ने क्षेत्र और अपने विद्यालय का नाम पूरे प्रदेश में रोशन किया है। परिजनों के अनुसार, शीघ्र ही आयोजित होने वाले एक सार्वजनिक समारोह में इन प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा।

एक भावुक संकल्प और निरंतरता

दो वर्ष पूर्व जब आदर्श शिक्षिका मंजू जोशी जी का आकस्मिक निधन हुआ, तो विद्यालय परिवार और क्षेत्र के लिए यह अपूरणीय क्षति थी। किंतु उनके परिजनों ने शोक को ‘संकल्प’ में बदलते हुए एक अनुकरणीय पहल की। उन्होंने निर्णय लिया कि उनके द्वारा पढ़ाए गए अंतिम बैच के छात्रों के इंटर उत्तीर्ण होने तक (चार वर्षों हेतु) प्रतिवर्ष उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा।

यह इस सम्मान श्रृंखला का द्वितीय संस्करण है। गत वर्ष हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर मूर्धन्य विद्वान डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी के ओजस्वी और सारगर्भित व्याख्यान के साथ इस गरिमामय आयोजन का शुभारंभ हुआ था।

प्रेरणा का स्रोत

मंजू जोशी जी का जीवन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि एक निष्ठावान शिक्षक का प्रभाव कभी समाप्त नहीं होता। उनके चले जाने के बाद भी उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार भावी पीढ़ी के मन में अपनी मातृभाषा हिन्दी के प्रति सम्मान, रुचि और उत्कृष्टता की नई अलख जगा रहा है।

सभी मेधावी विद्यार्थियों को उनकी इस शानदार उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं स्वर्गीय मंजू जोशी जी की पावन स्मृति को शत-शत नमन!

विपिन जोशी, संपादक -स्वर स्वतंत्र

 

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