मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया ‘चरैवेति चरैवेति’ पुस्तक का विमोचन
उत्तराखंड पर्यटन में श्री बी.डी. जोशी के योगदान को संजोने की पहल; कौसानी के पर्यटन व साहित्यिक इतिहास को मिलेगी नई पहचान
स्वर स्वतंत्र डेस्क, चम्पावत/गरुड़:
उत्तराखंड के पर्यटन विकास में अग्रणी भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ पर्यटन व्यवसायी श्री बी.डी. जोशी के जीवन-संघर्ष और ऐतिहासिक योगदान पर आधारित पुस्तक ‘चरैवेति चरैवेति’ का भव्य विमोचन राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा चम्पावत में किया गया।
यह गरिमामय विमोचन कार्यक्रम चम्पावत स्थित नवनिर्मित सर्किट हाउस के उद्घाटन समारोह तथा जिला बार एसोसिएशन की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह के अवसर पर आयोजित हुआ।
तमाम दिग्गज हस्तियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम के दौरान मंच पर कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इस ऐतिहासिक अवसर पर:
* अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री,
* उत्तराखंड हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री डी.सी.एस. रावत,
* चम्पावत के जिलाध्यक्ष श्री सामंत,
* जिला पंचायत अध्यक्ष श्री आनंद अधिकारी,
* बार एसोसिएशन अध्यक्ष श्री भास्कर मुरारी सहित कई प्रमुख अधिवक्ता व अधिकारी मौजूद रहे।
विशेष रूप से पुस्तक के प्रेरणास्रोत श्री बी.डी. जोशी के साथ कौसानी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री गजेंद्र मेहरा, उपाध्यक्ष श्री विनय तिवारी तथा संरक्षक श्री हरीश खर्कवाल भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
पर्यटन और संघर्ष की गाथा है ‘चरैवेति चरैवेति’
श्री बी.डी. जोशी के जीवन और अनुभवों पर आधारित यह पुस्तक उत्तराखंड में पर्यटन के शुरुआती दौर, उससे जुड़ी चुनौतियों, जमीनी संघर्षों और ऐतिहासिक उपलब्धियों का जीवंत दस्तावेजीकरण है। ‘चरैवेति-चरैवेति’ (निरंतर चलते रहो) का संदेश देती यह कृति कौसानी और आसपास के क्षेत्रों के पर्यटन व साहित्यिक इतिहास को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्रोत का कार्य करेगी।
“व्यक्तित्वों के योगदान से बनती है पर्यटन स्थल की पहचान” — गजेंद्र मेहरा
कौसानी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री गजेंद्र मेहरा ने इस पहल को कौसानी और उत्तराखंड के पर्यटन दस्तावेजीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर करार दिया।
> श्री मेहरा ने कहा:
> “किसी भी पर्यटन स्थल की वास्तविक पहचान केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ों या वादियों से नहीं बनती, बल्कि उस माटी से जुड़े कर्मठ व्यक्तित्वों, उनके संघर्षों और दूरदर्शी सोच से बनती है। श्री बी.डी. जोशी जी के जीवन पर आधारित यह पुस्तक कौसानी की पहचान, पर्यटन के स्वर्णिम इतिहास और हमारी साहित्यिक धरोहर को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने का एक सराहनीय व दूरगामी प्रयास है।”
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उन्होंने आगे कहा कि उत्तराखंड के पर्यटन जगत में अमूल्य योगदान देने वाले वरिष्ठ दिग्गजों के अनुभवों को संजोना बेहद आवश्यक है, ताकि आने वाली युवा पीढ़ी इनसे प्रेरणा लेकर प्रदेश के पर्यटन को नई ऊँचाइयों तक ले जा सके।
स्वर स्वतंत्र विशेष दृष्टिकोण
‘चरैवेति चरैवेति’ मात्र एक पुस्तक नहीं, बल्कि उत्तराखंड के ग्रामीण व क्षेत्रीय पर्यटन के विकास की वह नींव है जिसे स्थानीय लोगों के अथक परिश्रम से सींचा गया है। कौसानी जैसे ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थल को वैश्विक पटल पर पहचान दिलाने में ऐसे व्यक्तित्वों का योगदान अतुलनीय है। यह पहल पर्यटन और साहित्य के बीच एक सुदृढ़ संबंध स्थापित करेगी।
रिपोर्ट: स्वर स्वतंत्र न्यूज़ नेटवर्क
वेबसाइट: www.swarswatantra.in


















