विपिन जोशी..
नौवें दिन भी जारी धरना-प्रदर्शन, प्रशासन से लिखित जवाब न मिलने पर आज से क्रमिक अनशन शुरू कुंदन लाल एवं केवलानंद अनशन पर बैठे
बागेश्वर। जिलाधिकारी कार्यालय, बागेश्वर के बाहर खनन पट्टाधारक नवीन कुमार, उनके परिवारजनों एवं प्रभावित ग्रामीणों द्वारा 17 अक्टूबर 2026 से शुरू किया गया धरना-प्रदर्शन आज 25 अक्टूबर को लगातार नौवें दिन भी जारी है। नौ दिनों तक शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन एवं शासन-प्रशासन से लगातार न्याय की गुहार लगाने के बावजूद मांगों पर संतोषजनक लिखित जवाब नहीं मिलने के कारण आंदोलनकारियों ने आज से क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। प्रथम दिन कुंदन लाल पुत्र श्री विषन लाल एवं केवलानंद पुत्र श्री विरा क्रमिक अनशन पर बैठे हैं। ग्रामीणों एवं पट्टाधारक के परिवार ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत विरोध के लिए नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेशों के अनुपालन, वैधानिक अधिकारों, रोजगार, आजीविका एवं प्रशासनिक जवाबदेही के लिए है।
प्रकरण की पृष्ठभूमि: यह विवाद ग्राम भेरू चौबट्टा, तहसील एवं जिला बागेश्वर में स्थित सोपस्टोन के दो खनन पट्टों, जिनका क्षेत्रफल क्रमशः 4.156 हेक्टेयर एवं 4.868 हेक्टेयर है, से संबंधित है। मूल पट्टाधारक स्वर्गीय गोपाल राम के निधन के पश्चात 27 अक्टूबर 2023 को निष्पादित अनुपूरक पट्टा विलेख के आधार पर नवीन कुमार को उत्तराधिकारी के रूप में पट्टाधिकार प्राप्त हुए। आंदोलनकारियों का कहना है कि वैध पट्टों एवं संबंधित अनुमतियों के बावजूद खनन संचालन को लगातार बाधित किया जा रहा है, जिससे अनेक ग्रामीण परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है।
जनवरी 2025 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा खनन गतिविधियों के संबंध में पारित आदेशों के बाद प्रकरण सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा। 12 फरवरी 2025 को गठित सात सदस्यीय समिति की रिपोर्ट में भी संबंधित पट्टों का उल्लेख होने का दावा किया गया है। इसके पश्चात 17 नवंबर 2025 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 29 खनन पट्टाधारकों के संबंध में संचालन की अनुमति दी, जिसके अनुपालन में उत्तराखंड शासन द्वारा 18 नवंबर 2025 को आदेश जारी किया गया। आंदोलनकारियों के अनुसार नवीन कुमार के दोनों पट्टे उक्त 29 पट्टों में सम्मिलित हैं।
इसके अतिरिक्त उत्तराखंड उच्च न्यायालय के 18 मार्च 2026 के आदेश, विशेषकर पैरा 11 एवं 17, तथा सर्वोच्च न्यायालय के 23 मार्च 2026 के आदेश का उल्लेख करते हुए आंदोलनकारी इनके प्रभावी अनुपालन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि न्यायालयीय प्रतिबंध के कारण किसी अनुमति के निलंबित होने मात्र को व्यक्तिगत पट्टाधारक के मामले की जांच में स्वतः बाधा नहीं माना जा सकता। संबंधित अनुमतियों एवं दस्तावेजों की विधिसम्मत जांच की जानी चाहिए।
CTO/CCA निलंबन के कथित आदेश पर गंभीर सवाल: आंदोलनकारियों के अनुसार उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 15 फरवरी 2025 को कथित रूप से CTO/CCA निलंबित किए जाने की बात प्रशासनिक पत्राचार एवं सार्वजनिक बयानों में कही गई है, लेकिन संबंधित मूल अनुमति की सही पहचान, निलंबन आदेश, नोटिस, आदेश की तामील, निरीक्षण रिपोर्ट, डिस्पैच रजिस्टर तथा विधिक आधार को लेकर गंभीर प्रश्न बने हुए हैं। पट्टाधारक पक्ष का कहना है कि उनके पास दोनों पट्टों से संबंधित CCA अभिलेख उपलब्ध हैं, जबकि कथित निलंबन से जुड़े पत्रों और वास्तविक अनुमति के विवरण में विरोधाभास हैं। वे मांग कर रहे हैं कि प्रशासन मूल अभिलेख प्रस्तुत करे और स्पष्ट करे कि किस अनुमति को, किस वैधानिक प्रावधान के अंतर्गत, किस सक्षम अधिकारी द्वारा और किस प्रक्रिया का पालन करके निलंबित किया गया।
आंदोलनकारियों ने यह भी प्रश्न उठाया है कि यदि 15 फरवरी 2025 को संबंधित अनुमति निलंबित की गई थी, तो इस तथ्य की जानकारी सर्वोच्च न्यायालय में संबंधित कार्यवाही के दौरान किस रूप में प्रस्तुत की गई थी। उच्च न्यायालय की 30 मई 2026 की कार्यवाही का उल्लेख करते हुए वे मूल रिकॉर्ड सामने लाने की मांग कर रहे हैं।
खनन अधिकारी के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल: आंदोलनकारियों का कहना है कि खनन अधिकारी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि स्वीकृत खनन पट्टा क्षेत्र के भीतर किसी गतिविधि को अवैध खनन घोषित करने, निरीक्षण करने अथवा संचालन पर निषेधात्मक आदेश जारी करने का अधिकार उन्हें किस अधिनियम, धारा, नियम अथवा विधिवत जारी प्राधिकरण अधिसूचना के अंतर्गत प्राप्त है। उन्होंने संबंधित खान सुरक्षा कानूनों के अंतर्गत निरीक्षक की नियुक्ति एवं अधिकारों से संबंधित मूल अधिसूचना प्रस्तुत करने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी अधिकारी का अधिकार क्षेत्र केवल प्रशासनिक पत्राचार या अनुमान से निर्धारित नहीं किया जा सकता।
खनन अधिकारी नाजिया हसन द्वारा दिए गए कथित बयानों एवं आदेशों को लेकर भी आंदोलनकारियों ने आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि मूल अभिलेखों का परीक्षण किए बिना अवैध खनन, CTO निलंबन एवं आसपास के मकानों को खतरे जैसे विषयों को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया गया। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक पाए जाने पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।
खनिज भंडार एवं आर्थिक दंड का विवाद: आंदोलनकारियों के अनुसार 4 जून 2026 को संयुक्त निरीक्षण के दौरान लगभग 1,923.78 मीट्रिक टन खनिज को अभिरक्षा में लिया गया था। इसके बाद जिलाधिकारी द्वारा 1 सितंबर 2026 को पारित आदेश में लगभग 2,000 मीट्रिक टन खनिज से संबंधित प्रकरण में ₹55,70,424 की देयता निर्धारित किए जाने पर पट्टाधारक पक्ष ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि स्वीकृत पट्टा क्षेत्र, खनिज की वास्तविक स्थिति, निरीक्षण अभिलेखों, लागू प्रावधानों एवं संबंधित न्यायिक आदेशों का समुचित परीक्षण आवश्यक है। इसके बावजूद 12 अक्टूबर 2026 के खनन अधिकारी के पत्र के माध्यम से संचालन पर रोक जारी रखने का प्रश्न भी उठाया गया है।
धरना-प्रदर्शन का नौ दिनों का घटनाक्रम: आंदोलनकारियों के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 को अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर समस्याओं के समाधान एवं न्यायालय के आदेशों के अनुपालन की मांग की गई थी। 17 अक्टूबर को जिलाधिकारी से मिलने का प्रयास किया गया, लेकिन संतोषजनक संवाद स्थापित नहीं हो सका। इसके बाद पट्टाधारक, परिवारजनों एवं ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना शुरू किया।
18 अक्टूबर को धरने के दूसरे दिन प्रशासन की ओर से मीडिया के माध्यम से सामने आए बयानों पर आंदोलनकारियों ने आपत्ति जताते हुए लिखित एवं दस्तावेजी जवाब मांगा। 19 अक्टूबर को तीसरे दिन अधिकारियों के विधिक अधिकार क्षेत्र, निरीक्षण प्रक्रिया, अभिलेखों की गोपनीयता तथा खनन को अवैध बताने के आधार पर सवाल उठाए गए। इस दौरान पूर्व विधायक श्री ललित भासवाण ने भी आंदोलन को समर्थन दिया।
20 अक्टूबर को चौथे दिन न्यायालयीय आदेशों के अनुपालन तथा प्रशासनिक जवाबदेही की मांग दोहराई गई। 21 अक्टूबर को पांचवें दिन ग्रामीणों ने रोजगार एवं परिवारों की आजीविका पर पड़ रहे प्रभाव को प्रमुखता से उठाया। 22 अक्टूबर को छठे दिन CTO/CCA निलंबन के मूल रिकॉर्ड, नोटिस, पत्राचार एवं संबंधित रजिस्टर प्रस्तुत करने की मांग की गई। सूचना के अधिकार के अंतर्गत मांगी गई जानकारियों के अधूरे जवाब पर भी सवाल उठाए गए।
23 अक्टूबर को सातवें दिन कथित CTO निलंबन से जुड़े दस्तावेजों में विरोधाभास को प्रमुख मुद्दा बनाया गया। इस दिन किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष श्री प्रकाश कोहली सहित अन्य समर्थकों ने आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया। परिवार के सदस्य एवं बच्चे भी धरना स्थल पर उपस्थित रहे।
24 अक्टूबर को आठवें दिन भी प्रशासन की ओर से मांगों का संतोषजनक समाधान नहीं होने पर आंदोलनकारियों ने क्रमिक अनशन शुरू करने की घोषणा की। इसी दिन धरना स्थल पर जिलाधिकारी महोदया के लिए संवाद हेतु एक विशेष कुर्सी लगाकर उन्हें खुले संवाद के लिए आमंत्रित किया गया। आंदोलनकारियों ने संदेश दिया कि वे टकराव नहीं, बल्कि दस्तावेजों के आधार पर सीधा संवाद एवं न्यायसंगत समाधान चाहते हैं।
आज 25 अक्टूबर 2026 को धरने के नौवें दिन आंदोलन ने क्रमिक अनशन का रूप ले लिया है। कुंदन लाल पुत्र श्री विषन लाल एवं केवलानंद पुत्र श्री विरा ने प्रथम दिन क्रमिक अनशन शुरू किया है। अन्य ग्रामीण, पट्टाधारक नवीन कुमार एवं उनके परिवारजन धरना स्थल पर उपस्थित रहकर आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें हैं कि सर्वोच्च न्यायालय के 17 नवंबर 2025 एवं 23 मार्च 2026 तथा उच्च न्यायालय के संबंधित आदेशों के साथ 18 नवंबर 2025 के शासनादेश का विधिसम्मत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए; खनन संचालन पर रोक का स्पष्ट वैधानिक आधार लिखित रूप में बताया जाए; कथित CTO/CCA निलंबन के मूल आदेश, नोटिस, निरीक्षण रिपोर्ट, प्राधिकरण एवं तामील के अभिलेख उपलब्ध कराए जाएं; खनन अधिकारी के अधिकार क्षेत्र एवं निषेधात्मक शक्ति का विधिक स्रोत बताया जाए; अभिरक्षा में रखे खनिज को नियमानुसार मुक्त करने और आर्थिक दंड संबंधी आपत्तियों का न्यायसंगत निस्तारण किया जाए; प्रभावित मजदूरों एवं ग्रामीणों की आजीविका, आर्थिक नुकसान एवं क्षतिपूर्ति के प्रश्नों पर निर्णय लिया जाए तथा खनन क्षेत्र के आसपास सुरक्षा एवं ढलान की स्थिरता से जुड़े विषयों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए।
आंदोलनकारियों ने कहा कि “हम प्रशासन से किसी प्रकार की विशेष छूट नहीं मांग रहे हैं। हम केवल यह जानना चाहते हैं कि न्यायालय के आदेशों एवं वैध अभिलेखों के बावजूद हमारा रोजगार किस विधिक आधार पर रोका जा रहा है। यदि प्रशासन के पास रोक लगाने का वैधानिक अधिकार एवं उसके समर्थन में मूल दस्तावेज हैं, तो उन्हें सार्वजनिक करते हुए हमें लिखित जवाब दिया जाए।”
पट्टाधारक के परिवारजनों एवं ग्रामीणों ने जिलाधिकारी महोदया से अपील की है कि वे धरना स्थल पर आकर संवाद करें तथा प्रत्येक प्रमुख प्रश्न का अभिलेखों के आधार पर लिखित उत्तर दें। उनका कहना है कि नौ दिनों से दिन-रात धरने पर बैठे लोगों की समस्याओं को केवल आश्वासन देकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका धरना एवं क्रमिक अनशन शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। जब तक प्रशासन द्वारा मांगों पर ठोस, न्यायसंगत एवं लिखित जवाब नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प है।


















