व्यापार

सड़क नहीं तो भविष्य नहीं

सड़क नहीं तो भविष्य नहीं: पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी के गृह क्षेत्र कपकोट में वार्ता विफल, बारिश में भी डटे ग्रामीण विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र बागेश्वर जिले के कपकोट स्थित पीडब्लूडी गेस्ट हाउस में फुलवाड़ी-खाईंधार सड़क निर्माण की मांग को लेकर संघर्ष समिति और पूर्व राज्यपाल व पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के बीच हुई वार्ता

तितरी में रेशमकीट पालन का प्रशिक्षण

तितरी गांव में वैज्ञानिकों ने दिए रेशमकीट पालन के गुर, ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान’ अभियान के तहत 16 किसानों ने लिया व्यावहारिक प्रशिक्षण ​तितरी (स्याल्देह/देघाट): केंद्रीय रेशम बोर्ड (वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार) के राष्ट्रीय वृहद् रेशम प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अभियान ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान (MRMA 2.0)’ के तहत मंगलवार को विकासखंड स्याल्देह के ग्राम तितरी में

भरसोली में गूंजी ‘रेशम क्रांति’ की हुंकार

मुसलाधार बारिश भी न डिगा सकी हौसले: भरसोली में गूंजी ‘रेशम क्रांति’ की हुंकार, 37 किसानों ने सीखे स्वरोजगार के वैज्ञानिक गुर ​विशेष रिपोर्ट: विपिन जोशी | स्वर स्वतंत्र न्यूज़ ​भरसोली, स्याल्देह (देघाट): पहाड़ों में जब बारिश जनजीवन की रफ्तार थामने की कोशिश कर रही थी, तब देघाट के भरसोली गांव में ग्रामीण आत्मनिर्भरता और

पय्या-दाबू, हड़ाप मार्ग अब जुड़ेंगे सड़क से

पय्या-दाबू, हड़ाप मार्ग के भूमि पूजन से गरुड़ के अंतिम गांव में खुशी की लहर, ढोल-नगाड़ों से हुआ अतिथियों का स्वागत. विपिन जोशी  ​गरुड़ (बागेश्वर) विकासखंड गरुड़ के दूरस्थ क्षेत्रवासियों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने जा रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत पय्या से बाबू हड़ाप तक बनने वाले मोटर मार्ग

पर्वतीय जीवन शैली का घी त्यार 

पर्वतीय जीवन शैली व संस्कृति का घी त्यार विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र  घी – घ्यु संक्रांति, घ्या संक्रांति जिसे ओलगिया भी कहते हैं , उत्तराखंड में भादो के पहले दिन मनाया जाता है। भारतीय चंद्र कैलेंडर के अनुसार घी त्यार या घी संक्रांति हिंदू महीने भाद्रपद (अगस्त) के पहले दिन मनाई जाती है। यह भी

कब जागेगा जिम्मेदार हुक्मरान?

  विपिन जोशी… फुलवाड़ी-खाईधार: ‘आजादी के दशकों बाद भी सड़क नहीं, तो कैसा विकास?’—छलावे और बहानों के खिलाफ फूटा जनता का आक्रोश! स्वतंत्रता दिवस का जश्न जहां पूरा देश मना रहा है, वहीं फुलवाड़ी, फुलाचौंरा, थलीधार, खाईंधार और ठांग धार की संघर्षरत जनता आज भी अपने बुनियादी हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर

साहसिक पर्यटन का आगाज : खुल गया पिंडारी ट्रेक

विपिन जोशी साहसिक पर्यटन का नया आगाज़: खुल गए पिण्डारी ग्लेशियर के द्वार, सुरम्य वादियों में गूँजेगी अब पदचापों की थाप कपकोट: पिण्डारी ग्लेशियर कुमाऊं हिमालय का एक प्रमुख ग्लेशियर है, जो नंदा देवी और नंदा कोट चोटियों के बीच स्थित है। यह पिण्डर नदी का उद्गम स्थल भी है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता व

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू (स्याल्दे—बिखौती कौतिक पर विशेष) आज द्वाराहाट में हूं, स्याल्दे-बिखौती के मेले में। अक्सर आता ही हूं, हर साल। हमारे यहां कहावत है कि चाहे ‘बल्द बिचै जो लेकिन स्याल्दे-बिखौति जांण छू।’ स्याल्दे-बिखौती कई यादें लेकर आती है। सत्तर का दशक। 1974-75 का समय। हम बहुत छोटे थे।

गरुड़ में गूंजा समता का स्वर

बाबा साहेब की जयंती पर दीपों से जगमगाया सांस्कृतिक मंच गरुड़ (बागेश्वर):भारतीय संविधान के शिल्पी, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर कोट भ्रामरी स्थित अंबेडकर सांस्कृतिक मंच आस्था, सद्भावना और वैचारिक क्रांति का केंद्र बन गया। विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने एकजुट होकर बाबा साहेब को

नदी में बहती संवेदना और दम तोड़ता विज्ञान

नर्मदा के तट पर मंत्रोच्चार हो रहे थे, शंख बज रहे थे और ग्यारह हजार लीटर सफेद, शुद्ध दूध पवित्र धारा में विसर्जित किया जा रहा था। किनारे खड़ी भीड़ इसे ‘महा-अनुष्ठान’ कह रही थी, सोशल मीडिया इसे ‘परंपरा’ बता रहा था, लेकिन क्या किसी ने उस दूध की धार में दम तोड़ते जलीय जीवन और इतिहास के पन्नों में सिसकते ‘अश्वत्थामा’ को देखा?
यह घटना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आधुनिक व्यवस्था, अंधी आस्था और वैज्ञानिक समझ के बीच के गहरे द्वंद्व का प्रतिबिंब है।
इतिहास का दोहराव: धृतराष्ट्र की सत्ता और अश्वत्थामा का कटोरा
हस्तिनापुर का वह काल याद कीजिए, जहाँ धृतराष्ट्र सत्ता के केंद्र में थे। आँखें नहीं थीं, इसलिए दृश्य गौण थे और मोह प्रधान। उस दौर में भी दूध संपन्नता का प्रतीक था। कौरवों के महलों में दूध की नदियाँ बहती थीं, लेकिन उसी राज्य में गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र अश्वत्थामा दूध के लिए तरसता था।

सड़क नहीं तो भविष्य नहीं

सड़क नहीं तो भविष्य नहीं: पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी के गृह क्षेत्र कपकोट में वार्ता विफल, बारिश में भी डटे ग्रामीण विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र बागेश्वर जिले के कपकोट स्थित पीडब्लूडी गेस्ट हाउस में फुलवाड़ी-खाईंधार सड़क निर्माण की मांग को लेकर संघर्ष समिति और पूर्व राज्यपाल व पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के बीच हुई वार्ता

तितरी में रेशमकीट पालन का प्रशिक्षण

तितरी गांव में वैज्ञानिकों ने दिए रेशमकीट पालन के गुर, ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान’ अभियान के तहत 16 किसानों ने लिया व्यावहारिक प्रशिक्षण ​तितरी (स्याल्देह/देघाट): केंद्रीय रेशम बोर्ड (वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार) के राष्ट्रीय वृहद् रेशम प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अभियान ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान (MRMA 2.0)’ के तहत मंगलवार को विकासखंड स्याल्देह के ग्राम तितरी में

भरसोली में गूंजी ‘रेशम क्रांति’ की हुंकार

मुसलाधार बारिश भी न डिगा सकी हौसले: भरसोली में गूंजी ‘रेशम क्रांति’ की हुंकार, 37 किसानों ने सीखे स्वरोजगार के वैज्ञानिक गुर ​विशेष रिपोर्ट: विपिन जोशी | स्वर स्वतंत्र न्यूज़ ​भरसोली, स्याल्देह (देघाट): पहाड़ों में जब बारिश जनजीवन की रफ्तार थामने की कोशिश कर रही थी, तब देघाट के भरसोली गांव में ग्रामीण आत्मनिर्भरता और

पय्या-दाबू, हड़ाप मार्ग अब जुड़ेंगे सड़क से

पय्या-दाबू, हड़ाप मार्ग के भूमि पूजन से गरुड़ के अंतिम गांव में खुशी की लहर, ढोल-नगाड़ों से हुआ अतिथियों का स्वागत. विपिन जोशी  ​गरुड़ (बागेश्वर) विकासखंड गरुड़ के दूरस्थ क्षेत्रवासियों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने जा रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत पय्या से बाबू हड़ाप तक बनने वाले मोटर मार्ग

पर्वतीय जीवन शैली का घी त्यार 

पर्वतीय जीवन शैली व संस्कृति का घी त्यार विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र  घी – घ्यु संक्रांति, घ्या संक्रांति जिसे ओलगिया भी कहते हैं , उत्तराखंड में भादो के पहले दिन मनाया जाता है। भारतीय चंद्र कैलेंडर के अनुसार घी त्यार या घी संक्रांति हिंदू महीने भाद्रपद (अगस्त) के पहले दिन मनाई जाती है। यह भी

कब जागेगा जिम्मेदार हुक्मरान?

  विपिन जोशी… फुलवाड़ी-खाईधार: ‘आजादी के दशकों बाद भी सड़क नहीं, तो कैसा विकास?’—छलावे और बहानों के खिलाफ फूटा जनता का आक्रोश! स्वतंत्रता दिवस का जश्न जहां पूरा देश मना रहा है, वहीं फुलवाड़ी, फुलाचौंरा, थलीधार, खाईंधार और ठांग धार की संघर्षरत जनता आज भी अपने बुनियादी हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर

साहसिक पर्यटन का आगाज : खुल गया पिंडारी ट्रेक

विपिन जोशी साहसिक पर्यटन का नया आगाज़: खुल गए पिण्डारी ग्लेशियर के द्वार, सुरम्य वादियों में गूँजेगी अब पदचापों की थाप कपकोट: पिण्डारी ग्लेशियर कुमाऊं हिमालय का एक प्रमुख ग्लेशियर है, जो नंदा देवी और नंदा कोट चोटियों के बीच स्थित है। यह पिण्डर नदी का उद्गम स्थल भी है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता व

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू (स्याल्दे—बिखौती कौतिक पर विशेष) आज द्वाराहाट में हूं, स्याल्दे-बिखौती के मेले में। अक्सर आता ही हूं, हर साल। हमारे यहां कहावत है कि चाहे ‘बल्द बिचै जो लेकिन स्याल्दे-बिखौति जांण छू।’ स्याल्दे-बिखौती कई यादें लेकर आती है। सत्तर का दशक। 1974-75 का समय। हम बहुत छोटे थे।

गरुड़ में गूंजा समता का स्वर

बाबा साहेब की जयंती पर दीपों से जगमगाया सांस्कृतिक मंच गरुड़ (बागेश्वर):भारतीय संविधान के शिल्पी, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर कोट भ्रामरी स्थित अंबेडकर सांस्कृतिक मंच आस्था, सद्भावना और वैचारिक क्रांति का केंद्र बन गया। विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने एकजुट होकर बाबा साहेब को

नदी में बहती संवेदना और दम तोड़ता विज्ञान

नर्मदा के तट पर मंत्रोच्चार हो रहे थे, शंख बज रहे थे और ग्यारह हजार लीटर सफेद, शुद्ध दूध पवित्र धारा में विसर्जित किया जा रहा था। किनारे खड़ी भीड़ इसे ‘महा-अनुष्ठान’ कह रही थी, सोशल मीडिया इसे ‘परंपरा’ बता रहा था, लेकिन क्या किसी ने उस दूध की धार में दम तोड़ते जलीय जीवन और इतिहास के पन्नों में सिसकते ‘अश्वत्थामा’ को देखा?
यह घटना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आधुनिक व्यवस्था, अंधी आस्था और वैज्ञानिक समझ के बीच के गहरे द्वंद्व का प्रतिबिंब है।
इतिहास का दोहराव: धृतराष्ट्र की सत्ता और अश्वत्थामा का कटोरा
हस्तिनापुर का वह काल याद कीजिए, जहाँ धृतराष्ट्र सत्ता के केंद्र में थे। आँखें नहीं थीं, इसलिए दृश्य गौण थे और मोह प्रधान। उस दौर में भी दूध संपन्नता का प्रतीक था। कौरवों के महलों में दूध की नदियाँ बहती थीं, लेकिन उसी राज्य में गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र अश्वत्थामा दूध के लिए तरसता था।