व्यापार

पर्वतीय जीवन शैली का घी त्यार 

पर्वतीय जीवन शैली व संस्कृति का घी त्यार विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र  घी – घ्यु संक्रांति, घ्या संक्रांति जिसे ओलगिया भी कहते हैं , उत्तराखंड में भादो के पहले दिन मनाया जाता है। भारतीय चंद्र कैलेंडर के अनुसार घी त्यार या घी संक्रांति हिंदू महीने भाद्रपद (अगस्त) के पहले दिन मनाई जाती है। यह भी

कब जागेगा जिम्मेदार हुक्मरान?

  विपिन जोशी… फुलवाड़ी-खाईधार: ‘आजादी के दशकों बाद भी सड़क नहीं, तो कैसा विकास?’—छलावे और बहानों के खिलाफ फूटा जनता का आक्रोश! स्वतंत्रता दिवस का जश्न जहां पूरा देश मना रहा है, वहीं फुलवाड़ी, फुलाचौंरा, थलीधार, खाईंधार और ठांग धार की संघर्षरत जनता आज भी अपने बुनियादी हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर

साहसिक पर्यटन का आगाज : खुल गया पिंडारी ट्रेक

विपिन जोशी साहसिक पर्यटन का नया आगाज़: खुल गए पिण्डारी ग्लेशियर के द्वार, सुरम्य वादियों में गूँजेगी अब पदचापों की थाप कपकोट: पिण्डारी ग्लेशियर कुमाऊं हिमालय का एक प्रमुख ग्लेशियर है, जो नंदा देवी और नंदा कोट चोटियों के बीच स्थित है। यह पिण्डर नदी का उद्गम स्थल भी है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता व

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू (स्याल्दे—बिखौती कौतिक पर विशेष) आज द्वाराहाट में हूं, स्याल्दे-बिखौती के मेले में। अक्सर आता ही हूं, हर साल। हमारे यहां कहावत है कि चाहे ‘बल्द बिचै जो लेकिन स्याल्दे-बिखौति जांण छू।’ स्याल्दे-बिखौती कई यादें लेकर आती है। सत्तर का दशक। 1974-75 का समय। हम बहुत छोटे थे।

गरुड़ में गूंजा समता का स्वर

बाबा साहेब की जयंती पर दीपों से जगमगाया सांस्कृतिक मंच गरुड़ (बागेश्वर):भारतीय संविधान के शिल्पी, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर कोट भ्रामरी स्थित अंबेडकर सांस्कृतिक मंच आस्था, सद्भावना और वैचारिक क्रांति का केंद्र बन गया। विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने एकजुट होकर बाबा साहेब को

नदी में बहती संवेदना और दम तोड़ता विज्ञान

नर्मदा के तट पर मंत्रोच्चार हो रहे थे, शंख बज रहे थे और ग्यारह हजार लीटर सफेद, शुद्ध दूध पवित्र धारा में विसर्जित किया जा रहा था। किनारे खड़ी भीड़ इसे ‘महा-अनुष्ठान’ कह रही थी, सोशल मीडिया इसे ‘परंपरा’ बता रहा था, लेकिन क्या किसी ने उस दूध की धार में दम तोड़ते जलीय जीवन और इतिहास के पन्नों में सिसकते ‘अश्वत्थामा’ को देखा?
यह घटना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आधुनिक व्यवस्था, अंधी आस्था और वैज्ञानिक समझ के बीच के गहरे द्वंद्व का प्रतिबिंब है।
इतिहास का दोहराव: धृतराष्ट्र की सत्ता और अश्वत्थामा का कटोरा
हस्तिनापुर का वह काल याद कीजिए, जहाँ धृतराष्ट्र सत्ता के केंद्र में थे। आँखें नहीं थीं, इसलिए दृश्य गौण थे और मोह प्रधान। उस दौर में भी दूध संपन्नता का प्रतीक था। कौरवों के महलों में दूध की नदियाँ बहती थीं, लेकिन उसी राज्य में गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र अश्वत्थामा दूध के लिए तरसता था।

कांडा ने फूंका विद्रोह का बिगुल : आंदोलन

विपिन जोशी … उत्तराखंड की पहाड़ी अस्मिता और जन-अधिकारों के प्रति सरकार की बेरुखी के खिलाफ अब कांडा की घाटी से विद्रोह का बिगुल फूंक दिया गया है। 21 दिनों से जारी यह आंदोलन अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्वाभिमान की ‘महातपस्या’ बन चुका है। हक की हुंकार: 1956 से ठगा गया कांडा,

विकास के नाम पर ‘भ्रष्टाचार का डामर’

कपकोट: लीती गांव में विकास के नाम पर ‘भ्रष्टाचार का डामर’ पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने सरकार को घेरा बागेश्वर/कपकोट: उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी को विकास की जीवन रेखा माना जाता है, लेकिन कपकोट विधानसभा के लीती गांव से आई तस्वीरों ने शासन-प्रशासन के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की धज्जियां उड़ा दी

सरकार से युवा अपील नशा नहीं खेल सुविधा दो

विपिन जोशी सुमित्रानंदन पंत राजकीय महाविद्यालय गरुड़ का वार्षिक क्रीड़ा समारोह वर्ष 2025-26 की शुरुआत पुरड़ा मिनी स्टेडियम में हुई। वार्षिक क्रीड़ा समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व प्रधानाचार्य श्री नंदन सिंह अल्मिया ने कहा कि क्रीड़ा से मनुष्य का तन एवं मन दोनों स्वस्थ होता है। श्री अल्मिया ने कहा कि कत्यूर क्षेत्र से ओलम्पिक,

कपकोट: शराब विरोध और समर्थन साथ में

विपिन जोशी शराब ठेके के विरोध के बीच समर्थन में भी नारेबाजी: कपकोट में स्थिति तनावपूर्ण उत्तराखंड के कपकोट क्षेत्र के शामा गाँव में शराब की दुकान को लेकर जनमत दो हिस्सों में बंट गया है। जहाँ एक ओर ग्रामीण और महिलाएँ दुकान बंद करने के लिए आंदोलनरत हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग दुकान

पर्वतीय जीवन शैली का घी त्यार 

पर्वतीय जीवन शैली व संस्कृति का घी त्यार विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र  घी – घ्यु संक्रांति, घ्या संक्रांति जिसे ओलगिया भी कहते हैं , उत्तराखंड में भादो के पहले दिन मनाया जाता है। भारतीय चंद्र कैलेंडर के अनुसार घी त्यार या घी संक्रांति हिंदू महीने भाद्रपद (अगस्त) के पहले दिन मनाई जाती है। यह भी

कब जागेगा जिम्मेदार हुक्मरान?

  विपिन जोशी… फुलवाड़ी-खाईधार: ‘आजादी के दशकों बाद भी सड़क नहीं, तो कैसा विकास?’—छलावे और बहानों के खिलाफ फूटा जनता का आक्रोश! स्वतंत्रता दिवस का जश्न जहां पूरा देश मना रहा है, वहीं फुलवाड़ी, फुलाचौंरा, थलीधार, खाईंधार और ठांग धार की संघर्षरत जनता आज भी अपने बुनियादी हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर

साहसिक पर्यटन का आगाज : खुल गया पिंडारी ट्रेक

विपिन जोशी साहसिक पर्यटन का नया आगाज़: खुल गए पिण्डारी ग्लेशियर के द्वार, सुरम्य वादियों में गूँजेगी अब पदचापों की थाप कपकोट: पिण्डारी ग्लेशियर कुमाऊं हिमालय का एक प्रमुख ग्लेशियर है, जो नंदा देवी और नंदा कोट चोटियों के बीच स्थित है। यह पिण्डर नदी का उद्गम स्थल भी है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता व

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू (स्याल्दे—बिखौती कौतिक पर विशेष) आज द्वाराहाट में हूं, स्याल्दे-बिखौती के मेले में। अक्सर आता ही हूं, हर साल। हमारे यहां कहावत है कि चाहे ‘बल्द बिचै जो लेकिन स्याल्दे-बिखौति जांण छू।’ स्याल्दे-बिखौती कई यादें लेकर आती है। सत्तर का दशक। 1974-75 का समय। हम बहुत छोटे थे।

गरुड़ में गूंजा समता का स्वर

बाबा साहेब की जयंती पर दीपों से जगमगाया सांस्कृतिक मंच गरुड़ (बागेश्वर):भारतीय संविधान के शिल्पी, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर कोट भ्रामरी स्थित अंबेडकर सांस्कृतिक मंच आस्था, सद्भावना और वैचारिक क्रांति का केंद्र बन गया। विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने एकजुट होकर बाबा साहेब को

नदी में बहती संवेदना और दम तोड़ता विज्ञान

नर्मदा के तट पर मंत्रोच्चार हो रहे थे, शंख बज रहे थे और ग्यारह हजार लीटर सफेद, शुद्ध दूध पवित्र धारा में विसर्जित किया जा रहा था। किनारे खड़ी भीड़ इसे ‘महा-अनुष्ठान’ कह रही थी, सोशल मीडिया इसे ‘परंपरा’ बता रहा था, लेकिन क्या किसी ने उस दूध की धार में दम तोड़ते जलीय जीवन और इतिहास के पन्नों में सिसकते ‘अश्वत्थामा’ को देखा?
यह घटना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आधुनिक व्यवस्था, अंधी आस्था और वैज्ञानिक समझ के बीच के गहरे द्वंद्व का प्रतिबिंब है।
इतिहास का दोहराव: धृतराष्ट्र की सत्ता और अश्वत्थामा का कटोरा
हस्तिनापुर का वह काल याद कीजिए, जहाँ धृतराष्ट्र सत्ता के केंद्र में थे। आँखें नहीं थीं, इसलिए दृश्य गौण थे और मोह प्रधान। उस दौर में भी दूध संपन्नता का प्रतीक था। कौरवों के महलों में दूध की नदियाँ बहती थीं, लेकिन उसी राज्य में गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र अश्वत्थामा दूध के लिए तरसता था।

कांडा ने फूंका विद्रोह का बिगुल : आंदोलन

विपिन जोशी … उत्तराखंड की पहाड़ी अस्मिता और जन-अधिकारों के प्रति सरकार की बेरुखी के खिलाफ अब कांडा की घाटी से विद्रोह का बिगुल फूंक दिया गया है। 21 दिनों से जारी यह आंदोलन अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्वाभिमान की ‘महातपस्या’ बन चुका है। हक की हुंकार: 1956 से ठगा गया कांडा,

विकास के नाम पर ‘भ्रष्टाचार का डामर’

कपकोट: लीती गांव में विकास के नाम पर ‘भ्रष्टाचार का डामर’ पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने सरकार को घेरा बागेश्वर/कपकोट: उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी को विकास की जीवन रेखा माना जाता है, लेकिन कपकोट विधानसभा के लीती गांव से आई तस्वीरों ने शासन-प्रशासन के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की धज्जियां उड़ा दी

सरकार से युवा अपील नशा नहीं खेल सुविधा दो

विपिन जोशी सुमित्रानंदन पंत राजकीय महाविद्यालय गरुड़ का वार्षिक क्रीड़ा समारोह वर्ष 2025-26 की शुरुआत पुरड़ा मिनी स्टेडियम में हुई। वार्षिक क्रीड़ा समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व प्रधानाचार्य श्री नंदन सिंह अल्मिया ने कहा कि क्रीड़ा से मनुष्य का तन एवं मन दोनों स्वस्थ होता है। श्री अल्मिया ने कहा कि कत्यूर क्षेत्र से ओलम्पिक,

कपकोट: शराब विरोध और समर्थन साथ में

विपिन जोशी शराब ठेके के विरोध के बीच समर्थन में भी नारेबाजी: कपकोट में स्थिति तनावपूर्ण उत्तराखंड के कपकोट क्षेत्र के शामा गाँव में शराब की दुकान को लेकर जनमत दो हिस्सों में बंट गया है। जहाँ एक ओर ग्रामीण और महिलाएँ दुकान बंद करने के लिए आंदोलनरत हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग दुकान