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आगनवाड़ी आंदोलन हुआ मुखर

विपिन जोशी.. आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का अपनी मांगों को लेकर संघर्ष अब और अधिक मुखर होता जा रहा है। गरुड़ में 15वें दिन भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का धरना जारी। गरुड़ में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले 15 दिनों से जारी इस विरोध प्रदर्शन को अब विभिन्न राजनैतिक दलों

घायल मादा गुलदार का सफल रेस्क्यू

बागेश्वर: घायल मादा गुलदार का सफल रेस्क्यू, ग्रामीणों ने मकान के पीछे देखा बागेश्वर रेंज के अंतर्गत रवाईखाल बिझौरीझाल क्षेत्र में वन विभाग की टीम ने एक घायल मादा गुलदार का सफल रेस्क्यू किया है। वर्तमान में गुलदार को विभाग की निगरानी में रखा गया है, जहाँ उसका उपचार किया जा रहा है। क्या है

साहसिक पर्यटन का आगाज : खुल गया पिंडारी ट्रेक

विपिन जोशी साहसिक पर्यटन का नया आगाज़: खुल गए पिण्डारी ग्लेशियर के द्वार, सुरम्य वादियों में गूँजेगी अब पदचापों की थाप कपकोट: पिण्डारी ग्लेशियर कुमाऊं हिमालय का एक प्रमुख ग्लेशियर है, जो नंदा देवी और नंदा कोट चोटियों के बीच स्थित है। यह पिण्डर नदी का उद्गम स्थल भी है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता व

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू (स्याल्दे—बिखौती कौतिक पर विशेष) आज द्वाराहाट में हूं, स्याल्दे-बिखौती के मेले में। अक्सर आता ही हूं, हर साल। हमारे यहां कहावत है कि चाहे ‘बल्द बिचै जो लेकिन स्याल्दे-बिखौति जांण छू।’ स्याल्दे-बिखौती कई यादें लेकर आती है। सत्तर का दशक। 1974-75 का समय। हम बहुत छोटे थे।

समता और संवैधानिक नैतिकता का आह्वान

विपिन जोशी .. समता और संवैधानिक नैतिकता का आह्वान दीपशिखा से प्रज्वलित हुआ समता का संकल्प कोट भ्रामरी के पावन प्रांगण में ‘समता सद्भावना मंच’ के तत्वावधान में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पूरी वैचारिक गरिमा के साथ मनाई गई। समारोह का आगाज पद्मश्री राधा भट्ट, उत्तरकाशी से आए सर्वोदयी सुरेश भाई, नगर

गरुड़ में गूंजा समता का स्वर

बाबा साहेब की जयंती पर दीपों से जगमगाया सांस्कृतिक मंच गरुड़ (बागेश्वर):भारतीय संविधान के शिल्पी, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर कोट भ्रामरी स्थित अंबेडकर सांस्कृतिक मंच आस्था, सद्भावना और वैचारिक क्रांति का केंद्र बन गया। विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने एकजुट होकर बाबा साहेब को

नदी में बहती संवेदना और दम तोड़ता विज्ञान

नर्मदा के तट पर मंत्रोच्चार हो रहे थे, शंख बज रहे थे और ग्यारह हजार लीटर सफेद, शुद्ध दूध पवित्र धारा में विसर्जित किया जा रहा था। किनारे खड़ी भीड़ इसे ‘महा-अनुष्ठान’ कह रही थी, सोशल मीडिया इसे ‘परंपरा’ बता रहा था, लेकिन क्या किसी ने उस दूध की धार में दम तोड़ते जलीय जीवन और इतिहास के पन्नों में सिसकते ‘अश्वत्थामा’ को देखा?
यह घटना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आधुनिक व्यवस्था, अंधी आस्था और वैज्ञानिक समझ के बीच के गहरे द्वंद्व का प्रतिबिंब है।
इतिहास का दोहराव: धृतराष्ट्र की सत्ता और अश्वत्थामा का कटोरा
हस्तिनापुर का वह काल याद कीजिए, जहाँ धृतराष्ट्र सत्ता के केंद्र में थे। आँखें नहीं थीं, इसलिए दृश्य गौण थे और मोह प्रधान। उस दौर में भी दूध संपन्नता का प्रतीक था। कौरवों के महलों में दूध की नदियाँ बहती थीं, लेकिन उसी राज्य में गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र अश्वत्थामा दूध के लिए तरसता था।

संविधान और समाज पर केंद्रित होगा आयोजन

समता सद्भावना मंच की तैयारी बैठक संपन्न: 14 अप्रैल को मनेगा अंबेडकर जयंती डॉ. भीमराव अंबेडकर के जयंती को भव्य रूप से मनाने हेतु ‘समता सद्भावना मंच’ की एक महत्वपूर्ण तैयारी बैठक आयोजित की गई। इस साझा मंच की बैठक में आगामी 14 अप्रैल के कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई और विभिन्न जिम्मेदारियाँ सौंपी

अयारतोली वन पंचायत में भड़की आग

विपिन जोशी गरुड़: अयारतोली वन पंचायत में भड़की आग,आबादी क्षेत्र तक पहुँचने से पहले पाया गया काबू गरुड़ (बागेश्वर):फायर सीजन की शुरुआत के साथ ही जंगलों के धधकने का सिलसिला शुरू हो गया है। ताजा मामला गरुड़ के अयारतोली वन पंचायत का है, जहाँ रविवार दोपहर सड़क के समीप अचानक आग भड़क उठी। सूखी घास

कांडा ने फूंका विद्रोह का बिगुल : आंदोलन

विपिन जोशी … उत्तराखंड की पहाड़ी अस्मिता और जन-अधिकारों के प्रति सरकार की बेरुखी के खिलाफ अब कांडा की घाटी से विद्रोह का बिगुल फूंक दिया गया है। 21 दिनों से जारी यह आंदोलन अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्वाभिमान की ‘महातपस्या’ बन चुका है। हक की हुंकार: 1956 से ठगा गया कांडा,

आगनवाड़ी आंदोलन हुआ मुखर

विपिन जोशी.. आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का अपनी मांगों को लेकर संघर्ष अब और अधिक मुखर होता जा रहा है। गरुड़ में 15वें दिन भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का धरना जारी। गरुड़ में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले 15 दिनों से जारी इस विरोध प्रदर्शन को अब विभिन्न राजनैतिक दलों

घायल मादा गुलदार का सफल रेस्क्यू

बागेश्वर: घायल मादा गुलदार का सफल रेस्क्यू, ग्रामीणों ने मकान के पीछे देखा बागेश्वर रेंज के अंतर्गत रवाईखाल बिझौरीझाल क्षेत्र में वन विभाग की टीम ने एक घायल मादा गुलदार का सफल रेस्क्यू किया है। वर्तमान में गुलदार को विभाग की निगरानी में रखा गया है, जहाँ उसका उपचार किया जा रहा है। क्या है

साहसिक पर्यटन का आगाज : खुल गया पिंडारी ट्रेक

विपिन जोशी साहसिक पर्यटन का नया आगाज़: खुल गए पिण्डारी ग्लेशियर के द्वार, सुरम्य वादियों में गूँजेगी अब पदचापों की थाप कपकोट: पिण्डारी ग्लेशियर कुमाऊं हिमालय का एक प्रमुख ग्लेशियर है, जो नंदा देवी और नंदा कोट चोटियों के बीच स्थित है। यह पिण्डर नदी का उद्गम स्थल भी है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता व

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू

चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू (स्याल्दे—बिखौती कौतिक पर विशेष) आज द्वाराहाट में हूं, स्याल्दे-बिखौती के मेले में। अक्सर आता ही हूं, हर साल। हमारे यहां कहावत है कि चाहे ‘बल्द बिचै जो लेकिन स्याल्दे-बिखौति जांण छू।’ स्याल्दे-बिखौती कई यादें लेकर आती है। सत्तर का दशक। 1974-75 का समय। हम बहुत छोटे थे।

समता और संवैधानिक नैतिकता का आह्वान

विपिन जोशी .. समता और संवैधानिक नैतिकता का आह्वान दीपशिखा से प्रज्वलित हुआ समता का संकल्प कोट भ्रामरी के पावन प्रांगण में ‘समता सद्भावना मंच’ के तत्वावधान में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पूरी वैचारिक गरिमा के साथ मनाई गई। समारोह का आगाज पद्मश्री राधा भट्ट, उत्तरकाशी से आए सर्वोदयी सुरेश भाई, नगर

गरुड़ में गूंजा समता का स्वर

बाबा साहेब की जयंती पर दीपों से जगमगाया सांस्कृतिक मंच गरुड़ (बागेश्वर):भारतीय संविधान के शिल्पी, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर कोट भ्रामरी स्थित अंबेडकर सांस्कृतिक मंच आस्था, सद्भावना और वैचारिक क्रांति का केंद्र बन गया। विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने एकजुट होकर बाबा साहेब को

नदी में बहती संवेदना और दम तोड़ता विज्ञान

नर्मदा के तट पर मंत्रोच्चार हो रहे थे, शंख बज रहे थे और ग्यारह हजार लीटर सफेद, शुद्ध दूध पवित्र धारा में विसर्जित किया जा रहा था। किनारे खड़ी भीड़ इसे ‘महा-अनुष्ठान’ कह रही थी, सोशल मीडिया इसे ‘परंपरा’ बता रहा था, लेकिन क्या किसी ने उस दूध की धार में दम तोड़ते जलीय जीवन और इतिहास के पन्नों में सिसकते ‘अश्वत्थामा’ को देखा?
यह घटना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आधुनिक व्यवस्था, अंधी आस्था और वैज्ञानिक समझ के बीच के गहरे द्वंद्व का प्रतिबिंब है।
इतिहास का दोहराव: धृतराष्ट्र की सत्ता और अश्वत्थामा का कटोरा
हस्तिनापुर का वह काल याद कीजिए, जहाँ धृतराष्ट्र सत्ता के केंद्र में थे। आँखें नहीं थीं, इसलिए दृश्य गौण थे और मोह प्रधान। उस दौर में भी दूध संपन्नता का प्रतीक था। कौरवों के महलों में दूध की नदियाँ बहती थीं, लेकिन उसी राज्य में गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र अश्वत्थामा दूध के लिए तरसता था।

संविधान और समाज पर केंद्रित होगा आयोजन

समता सद्भावना मंच की तैयारी बैठक संपन्न: 14 अप्रैल को मनेगा अंबेडकर जयंती डॉ. भीमराव अंबेडकर के जयंती को भव्य रूप से मनाने हेतु ‘समता सद्भावना मंच’ की एक महत्वपूर्ण तैयारी बैठक आयोजित की गई। इस साझा मंच की बैठक में आगामी 14 अप्रैल के कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई और विभिन्न जिम्मेदारियाँ सौंपी

अयारतोली वन पंचायत में भड़की आग

विपिन जोशी गरुड़: अयारतोली वन पंचायत में भड़की आग,आबादी क्षेत्र तक पहुँचने से पहले पाया गया काबू गरुड़ (बागेश्वर):फायर सीजन की शुरुआत के साथ ही जंगलों के धधकने का सिलसिला शुरू हो गया है। ताजा मामला गरुड़ के अयारतोली वन पंचायत का है, जहाँ रविवार दोपहर सड़क के समीप अचानक आग भड़क उठी। सूखी घास

कांडा ने फूंका विद्रोह का बिगुल : आंदोलन

विपिन जोशी … उत्तराखंड की पहाड़ी अस्मिता और जन-अधिकारों के प्रति सरकार की बेरुखी के खिलाफ अब कांडा की घाटी से विद्रोह का बिगुल फूंक दिया गया है। 21 दिनों से जारी यह आंदोलन अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्वाभिमान की ‘महातपस्या’ बन चुका है। हक की हुंकार: 1956 से ठगा गया कांडा,