गरुड़ छटिया में महिलाओं को मिला पंचायत विकास का नया बल
लेखक: विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र
एक दिन पहले जब पूरा देश अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा था, गरुड़ ब्लॉक के छटिया में कुछ अलग ही माहौल था। वहाँ द हंगर प्रोजेक्ट और वीरांगना महिला जन संगठन ने मिलकर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की, जिसमें ग्राम पंचायतों की महिला जन प्रतिनिधियों को पंचायत विकास के असली गुर सिखाए गए।
देश के ज्यादातर हिस्सों में आज भी महिला सरपंच या वार्ड सदस्य सिर्फ़ रबर स्टैंप बनकर रह जाती हैं। असल फैसले उनके पति या घर के पुरुष ही लेते हैं—प्रधान पति वाला ताना तो आम बात हो चुकी है। लेकिन यहाँ यह सोच टूट रही है। महिलाओं को समझाया जा रहा है—अपने अधिकारों के लिए जागरूक होना अब कोई विकल्प नहीं, जरूरत है। घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ गांव और देश के विकास में भी अपनी आवाज़ बुलंद करनी होगी। तभी कोई पुरुष सत्ता मानसिकता से ग्रस्त व्यक्ति यह नहीं कह पाएगा कि “बहुत नेता बनी फिरती है।”
2011 में शुरू हुआ वीरांगना महिला जन संगठन आज उत्तराखंड में करीब तेरह सौ महिलाओं का मजबूत परिवार बन चुका है। गरुड़ ब्लॉक की 73 ग्राम पंचायतों में से 51 में यह संगठन सक्रिय है। यहाँ हर दूसरे महीने बैठकें और संवाद होते हैं। प्रशिक्षण में महिलाओं को सिखाया जाता है—
– प्रशासन के सामने अपनी बात कैसे रखें
– विकास प्रस्ताव कैसे लिखें
– खुली बैठकों में मुद्दे कैसे उठाएँ
– मांगें मनवाने के लिए रणनीति क्या हो
– संगठन और समूह कैसे बनाएँ
इन सबके लिए रोल-प्ले और समूह चर्चा का सहारा लिया जाता है। हर कार्यशाला में 35 से 55 महिलाएँ शामिल होती हैं।
द हंगर प्रोजेक्ट की जिला समन्वयक बसंती कपकोटी ने बताया, “सिर्फ महिला दिवस मनाकर भूल जाना हमारा मकसद नहीं। हम लगातार सतत संवाद की प्रक्रिया में जुड़े रहते हैं। आज ब्लॉक में 350 और पूरे उत्तराखंड में करीब 1300 महिलाएँ इस संगठन से जुड़कर अपने गांव-देश के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
इस कार्यशाला में प्रशिक्षक के रूप में बसंती कपकोटी के साथ तारा दानू, मंजू बोरा, मनीषा, कांति गाड़िया, रेनू और अन्य साथी मौजूद रहे।
यह सिर्फ़ प्रशिक्षण नहीं— एक नई शुरुआत है। जहाँ महिलाएँ अब असल में निर्णय लेने वाली बन रही हैं।





