आज के दौर में आँकड़ो और सूचनाओं का बाजार सबसे ज़्यादा क़ीमती है. इन्हीं सूचनाओं से सरकारें बनती गिरती हैं, अपने पक्ष में नैरेटिव बनाते जाते हैं और विपक्ष के ख़िलाफ़ गढ़े जाते हैं इन दिनों एपस्टीन फाइल्स चर्चा में है, इसका बड़े स्तर पर असर दिखना शुरू हो चुका है. अब तक ग्लोबली 30 हाई प्रोफ़ाइल नेताओं, बिजनेस आइकन के इस्तीफे हो चुके हैं. भारतीय राजनीति में भी एपस्टीन फाइल्स की आँच पहुँच चुकी है. इस एपस्टीन रूपी आँच की जाँच होगी तो आग की तपिस कितनों को जलाएगी यह देखना भी मजेदार होगा. क्या है जेफ़री एपस्टीन का भारतीय कनेक्शन ?
एपस्टीन फाइल्स, जेफ़री एपस्टीन से जुड़ी एक बड़ी और विवादास्पद दस्तावेज़ों की श्रृंखला है। एपस्टीन एक अमेरिकी अरबपति और दोषी बाल यौन अपराधी था जो 2019 में जेल में मृत पाया गया। आधिकारिक रूप से आत्म हत्या, लेकिन इसके पीछे कई साजिश थ्योरीज़ भी हैं)।
क्या हैं ये एपस्टीन फाइल्स? ये लाखों पेज के दस्तावेज़, ईमेल, फोटो, वीडियो, फ्लाइट लॉग्स (उनके प्राइवेट जेट लोलिता एक्सप्रेस के संपर्क सूची और जांच सामग्री हैं। ये FBI, DOJ यानी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस और कोर्ट केस से जुड़े हैं, जिसमें एपस्टीन और उनकी साथी Ghislaine Maxwell के यौन शोषण, ट्रैफिकिंग, और नाबालिग लड़कियों के साथ अपराध शामिल हैं।
कुल मिलाकर 3.5 मिलियन+ पेज, 2,000+ वीडियो, और 180,000+ इमेज अब तक रिलीज़ हो चुकी हैं। ये करीब 300+ GB डेटा हैं।
क्या है एपस्टीन फाइल्स के रिलीज़ का इतिहास 2025 में अमेरिकी कांग्रेस ने एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट पास किया, जिसे राष्ट्रपति ट्रम्प ने 19 नवंबर 2025 को साइन किया। दिसंबर 2025 से रिलीज़ शुरू हुई, लेकिन मुख्य बड़ा बैच 30 जनवरी 2026 को आया — डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने 3+ मिलियन पेज, वीडियो और इमेज पब्लिश किए।
ये फाइल्स justice.gov/epstein पर उपलब्ध हैं (searchable और downloadable)।
एपस्टीन फाइल्स का भारतीय कनेक्शन मुख्य रूप से 2025-2026 में अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस द्वारा रिलीज़ किए गए लाखों पेज के दस्तावेज़ों आदि से भारतीय नाम सामने आए हैं। ये फाइल्स एपस्टीन के ग्लोबल नेटवर्क को दिखाती हैं, जिसमें भारत से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल नाम हैं।
कोई भी भारतीय नाम पर एपस्टीन के सेक्स ट्रैफिकिंग, बाल यौन शोषण या क्राइम्स में सीधा आरोप या सबूत अब तक नहीं मिला है। । ज्यादातर संदर्भ मीटिंग्स, ईमेल्स, नेटवर्किंग, बिजनेस/डिप्लोमैटिक कनेक्शन या एपस्टीन के खुद के क्लेम्स से हैं। एपस्टीन एक बाल यौन शोषक अपराधी था और उसके बाद भी कई लोग उसके साथ संपर्क में क्यों रहे, यह बड़ा सवाल है ?
मुख्य भारतीय नाम और कनेक्शन (2026 रिलीज़ से):
1. अनिल अंबानी — सबसे ज्यादा चर्चित नाम।
– 2017-2019 के बीच एपस्टीन से नियमित ईमेल और मैसेज आदि।
– अनिल अंबानी ने एपस्टीन से ट्रंप सर्कल से कनेक्ट करने की मदद मांगी, खासकर मोदी के यू एस, इजराइल भ्रमण (2017) के लिए।
– एक मैसेज में “Leadership” (दिल्ली से, मतलब मोदी सरकार) का जिक्र है जो ट्रंप सर्कल से मदद चाहती थी। फाइल में अंबानी को “मोदी का खास आदमी भी कहा गया है। लेकिन कोई क्राइम लिंक नहीं पाया गया है सिर्फ पावर नेटवर्किंग का राजनैतिक लाभ लेने के संकेत दिखते हैं।
हरदीप सिंह पुरी, पेट्रोलियम मंत्री, पूर्व डिप्लोमैट।
– एपस्टीन से 3-4 बार मीटिंग्स का जिक्र भी फाइल में है। ( 2009-2017 के बीच, न्यूयॉर्क पोस्टिंग के समय)।
हरदीप पुरी ने मीटिंग्स मानीं लेकिन कहा कि ये इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट के थिंक टैंक से जुड़ी मीटिंग थी से जुड़ी थीं, कोई क्राइम नहीं। किसी बाल यौन अपराधी के नेटवर्क से किस तरह की पीस मीटिंग थी यह अबूझ सवाल है। जिसके जवाब हेतु अब विपक्ष ने सत्ता पक्ष की जागर लगा रखी है। राहुल गांधी ने संसद में सवाल उठाए, बीजेपी ने इसे स्मीयर कैंपेन या बदनामी अभियान करार दिया है। अब दोनों पार्टी में घमासान तेज हो चुका है। ग्लोबल लेवल पर जिन हाई प्रोफाइल नेताओं और आइकन का नाम एपस्टीन फाइल्स में आया है उनमें से अधिकांश अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। अब तक करीब 30 इस्तीफे हो चुके हैं।
इस्तीफे देने वालों की सूची में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुछ प्रमुख हाई-प्रोफाइल इस्तीफे/फॉल आउट (नेताओं/पॉलिटिशियंस/डिप्लोमैट्स शामिल हैं।)
Andrew Mountbatten-Windsor (पूर्व Prince Andrew, UK): Arrested, royal title खोया, जांच में—सबसे हाई-प्रोफाइल।
Peter Mandelson (UK): Labour Party से रिजाइन, House of Lords से इस्तीफा, UK PM Keir Starmer के अडवाइजर/Ambassador रोल से हटाए गए।
Miroslav Lajčák (Slovakia): National security advisor से रिजाइन (PM Robert Fico ने स्वीकार किया)।
Mona Juul (Norway): पूर्व UN Ambassador, इस्तीफा (Økokrim जांच के बाद)।
Joanna Rubinstein (Sweden): UNHCR (UN) के Sweden चेयर से रिजाइन।
Jack Lang (France): L’Institut du Monde Arabe के प्रेसिडेंट से रिजाइन (टैक्स जांच)।
Thorbjorn Jagland (Norway): पूर्व PM/UN से जुड़े, क्रिमिनल जांच में।
अन्य: UK PM Keir Starmer के चीफ ऑफ स्टाफ Morgan McSweeney ने भी रिजाइन किया (Mandelson अपॉइंटमेंट से जुड़ा)।
बिजनेस/अन्य हाई-प्रोफाइल (कुछ नेता-जैसे):
Sultan Ahmed bin Sulayem (Dubai Ports World CEO/Chairman): रिजाइन/रिप्लेस।
Kathy Ruemmler (Goldman Sachs Chief Legal Officer): रिजाइन (जून 2026 तक)।
Brad Karp (Paul Weiss law firm Chairman): रिजाइन।
Tom Pritzker (Hyatt Hotels Executive Chairman): स्टेप डाउन।
Academia में Harvard/Yale जैसे पूर्व प्रेसिडेंट्स/प्रोफेसर्स पर फॉल आउट।
ये इस्तीफे क्राइम प्रूफ से नहीं, बल्कि पब्लिक स्कैंडल, मीडिया प्रेशर के कारण हुए।
यू एन एक्सपर्ट ने कहा कि इस्तीफे अकेले काफी नहीं क्रिमिनल अकाउंटेबिलिटी भी चाहिए।
भारत में (अंबानी, हरदीप पुरी आदि नाम आने के बावजूद) कोई इस्तीफा नहीं हुआ—BJP ने इसे राजनैतिक बदनामी का अभियान कहा है। भारत का रुख क्या होगा ? विपक्ष और जनता कैसे एपस्टीन की सुनामी को समझेगी ? इस बबंडर का भारत की राजनीति में, आर्थिक और सामाजिक समीकरण में क्या व्यापक प्रभाव पड़ेगा यह सोचनीय है।
आलेख – विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र
स्रोत – इंटरनेट, डेली डिजिटल न्यूज़ आदि





