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गरुड़ में गूंजा समता का स्वर

बाबा साहेब की जयंती पर दीपों से जगमगाया सांस्कृतिक मंच
गरुड़ (बागेश्वर):भारतीय संविधान के शिल्पी, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर
कोट भ्रामरी स्थित अंबेडकर सांस्कृतिक मंच आस्था, सद्भावना और वैचारिक क्रांति का केंद्र बन गया। विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने एकजुट होकर बाबा साहेब को न केवल याद किया, बल्कि दीपोत्सव के माध्यम से उनके द्वारा दिखाए गए समानता के मार्ग पर चलने का संकल्प भी लिया।
राजनीतिक सीमाओं से परे ‘समता संवाद’

इस आयोजन की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी वैचारिक समावेशिता रही। जहाँ एक ओर भाजपा और कांग्रेस जैसे राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि एक जाजम पर नजर आए, वहीं दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षकों ने इसे ‘आकस्मिक संवाद’ का एक सहज मंच बना दिया। उपस्थित वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि बाबा साहेब के संवैधानिक मूल्य किसी एक वर्ग या दल के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की धरोहर हैं।

पद्मश्री राधा भट्ट का नागरिक अभिनंदन: एक ऐतिहासिक क्षण
जयंती समारोह के मुख्य आयोजन में आज देश भर के ख्यातिलब्ध सामाजिक कार्यकर्ता और विचारक कोट में जुट रहे हैं।
इस वर्ष का आकर्षण
लक्ष्मी आश्रम की पूर्व संचालिका और पद्मश्री से सम्मानित राधा भट्ट जी का भव्य नागरिक अभिनंदन।होगा। गांधीवादी मूल्यों और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके योगदान को बाबा साहेब के समतावादी विजन के साथ जोड़कर देखना इस कार्यक्रम की सार्थकता को और बढ़ा देता है।
दीपोत्सव: सामाजिक समरसता की लौ
सांस्कृतिक मंच पर प्रज्वलित हर एक दीपक सामाजिक भेदभाव के अंधेरे को दूर करने और ‘समानता’ के प्रकाश को फैलाने का प्रतीक रहा। यह आयोजन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि गरुड़ के प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा समाज को दिया गया एक ऐसा मंच है जहाँ संवाद, संवेदना और संविधान का संगम होता है।
अंबेडकर जयंती समता संवाद केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि स्वयं को समाज के प्रति उत्तरदायी बनाने का अवसर है। आइए, इस वैचारिक कुंभ का हिस्सा बनें।”
आयोजन की मुख्य झलकियाँ:
स्थान:अंबेडकर सांस्कृतिक मंच, कोट भ्रामरी (गरुड़)।
मुख्य आकर्षण: देश भर के विचारकों का संगम और डॉ. अंबेडकर के जीवन दर्शन पर विमर्श।
विशेष सम्मान: पद्मश्री राधा भट्ट जी का नागरिक अभिनंदन।
संवैधानिक मूल्यों का प्रचार और सामाजिक समरसता का सुदृढ़ीकरण।
अपील:’स्वर स्वतंत्र’ परिवार क्षेत्र के समस्त प्रबुद्ध जनों, युवाओं और नागरिकों से अपील करता है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर इस ‘समता संवाद’ को सफल बनाएँ और बाबा साहेब के सपनों के भारत की रचना में अपना योगदान दें।
विपिन जोशी, संपादक (स्वर स्वतंत्र)

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