चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू
चाहे बल्द बैचे जो, स्याल्दे जरूर जांण छू (स्याल्दे—बिखौती कौतिक पर विशेष) आज द्वाराहाट में हूं, स्याल्दे-बिखौती के मेले में। अक्सर आता ही हूं, हर साल। हमारे यहां कहावत है कि चाहे ‘बल्द बिचै जो लेकिन स्याल्दे-बिखौति जांण छू।’ स्याल्दे-बिखौती कई यादें लेकर आती है। सत्तर का दशक। 1974-75 का समय। हम बहुत छोटे थे।…