एक अनसुनी दास्ताँ : अतीत के साक्ष्य

आज भी ऐसे कई गुमनाम सेनानी होंगे जो अतीत में दस्तावेजीकरण से रह गए थे . अब यह जिम्मेदारी लेनी होगी कि खोजें अपने आसपास ऐसे महान व्यक्तितत्व को जो देश की आज़ादी के लिए नींव की ईट बन गए.

विपिन जोशी,स्वर स्वतंत्र.
गरुड़ ढोल गांव निवासी महेश नगरकोटी ने अपने दादा आनसिंह नगरकोटी को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने का दावा किया है।
महेश नगरकोटी के अनुसार ऐतिसाहिक साक्ष्यों के आधार पर उनके दादा आनसिंह नगरकोटी ने
समाजवादी और स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। इस आधार पर द्वितीय पीढ़ी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने हेतु जिलाधिकारी बागेश्वर को एक पत्र लिखा है।
महेश नगरकोटी ने हिंदुस्तान समाचार को बताया कि इतिहास में गुमनाम उनके दादा आनसिंह नगरकोटी ने सन् 1942 में आज़ादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पचास के दशक में प्रकाशित पुस्तक कुमाऊँ में समाजवादी इतिहास की एक झलक में वर्णित है , बैजनाथ गरुड़ क्षेत्र ढोलगांव निवासी आनसिंह नगर कोटी कर्मठ समाज सेवकों में रहे हैं। सन 1942 में स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिगत रहकर अपने सक्रीय भूमिका निभाई। सोशलिस्ट पार्टी अल्मोड़ा में ताजीवन सक्रीय रहे। आपने गरुड़ गढ़शेर में हरिजनों की भूमि बेदखली पर सोशलिस्ट पार्टी द्वारा संचालित आंदोलन में सक्रीय भूमिका निभाई। 1 मार्च 1956 को लखनऊ में समाजवादी चिंतक डॉ राम मनोहर लोहिया के नेतृत्व में जनता मांग दिवस पर भाग लेने जत्थे के साथ अल्मोड़ा से लखनऊ पहुंचे, वे जीवनपर्यंत आंदोलन से जुड़े रहे।
सोशलिस्ट पार्टी के उत्तराखंड कार्यकर्ताओं ने कुमाऊं में जमींदारी विनाश तथा भूमि सुधार अधिनियम 1960 के तहत निर्धन काश्तकारों भूमिहीन किसानों के लिए आंदोलन किए। इस पुस्तक में गरुड़ के हरीश चंद्र पांडे और आन सिंह नगरकोटी, दुर्गाराम आर्या, जखेड़ा के हरि राम का नाम प्रमुख तौर पर वर्णित है।
आनसिंह नगर कोटी के नाती महेश नगरकोटी ने मांग की कि ऐतिहासिक प्रिंट साक्ष्यों के आधार पर उनकी मांग पर विचार कर, उनके दादा आनसिंह नगर कोटी को उचित सम्मान मिलना चाहिए।
ऐसे और कितने गुमनाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होंगे जो उस दौर में दस्तावेजीकरण से छूट गए, उनके परिजन जिन्दगी की चुनौतियों में उलझ गए और संघर्ष पात्रता गुमनामी के कुहासे में कहीं हो गए।
आन सिंह नगरकोटी के मामले पर वैभव कांडपाल, एस डी एम, गरुड़ ने बताया कि प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की जाएगी, यदि उक्त दावे की पुष्टि होती है तो नियमानुसार उनके परिजन को उचित लाभ दिलवाने के प्रयास करेंगे।

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