राष्ट्रीय

विरासत और विश्वास : नवरात्र

विपिन जोश कत्यूर घाटी में चैत्र नवरात्रि का भव्य आगाज़: कोट भ्रामरी में ‘शक्ति बेलन‘ ने दिखाया युवाओं का शौर्य, टीट बाज़ार में उमड़ी कलशयात्रा गरुड़ (बागेश्वर): 21मार्च, 2026 देवभूमि उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध कत्यूर घाटी आज चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन पूरी तरह शक्तिमयी गूंज से सराबोर रही। कोट भ्रामरी मंदिर को कत्यूर राजवंश की

60 वर्ष बाद लौटा है रौद्र संवत्सर

रौद्र संवत्सर 19 मार्च 2026 (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुरुवार) से शुरू होकर 7 अप्रैल 2027 तक चलेगा। लगभग 60 वर्ष बाद (पिछली बार 1966 में) यह नाम लौटा है। नाम से ही स्पष्ट है—रौद्र अर्थात् उग्र, तीव्र, क्रोधपूर्ण या शिव के रुद्र रूप जैसा। रौद्र संवत्सर की मुख्य विशेषताएँ राजा: देवगुरु बृहस्पति (गुरु) — ज्ञान,

डिजिटल इंडिया के दौर में ‘नो नेटवर्क जोन

विपिन जोशी.. पैराग्लाइडिंग के सफल टेक-ऑफ के बीच लाहुर घाटी में संचार व्यवस्था ‘क्रैश’ गरुड़ (बागेश्वर): गरुड़ तहसील के डनेराखाल में जब पैराग्लाइडर के पंख आसमान में लहराए, तो कत्यूर घाटी के ग्रामीणों की आंखोंमें उत्साह और भविष्य की उम्मीदें साफ झलक रही थीं। नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (NIM) जम्मू पहलगाम के तत्वाधान मेंआयोजित दो

फूलदेई छम्मा देई

फूलदेई उत्तराखंड का एक प्राचीन और प्रसिद्ध लोक बाल पर्व है, जो मुख्य रूप से गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों में मनाया जाता है। यह त्योहार चैत्र मास की संक्रांति (मीन संक्रांति) पर शुरू होता है, जो सामान्यतः14 या 15 मार्च को पड़ता है। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सौर कैलेंडर के अनुसार हिंदू नववर्ष इसी दिन से शुरू माना जाता है।

वीरांगनाएँ देंगी जागृति का संदेश

समानता के भाव को देखते हुए सभी को अवसर देते हुए वीरांगना संगठन का चुनाव किया गया, जाति धर्म से ऊपर उठते हुए महिला पंचायत प्रतिनिधियों को पंचायत विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

एक अनसुनी दास्ताँ : अतीत के साक्ष्य

आज भी ऐसे कई गुमनाम सेनानी होंगे जो अतीत में दस्तावेजीकरण से रह गए थे . अब यह जिम्मेदारी लेनी होगी कि खोजें अपने आसपास ऐसे महान व्यक्तितत्व को जो देश की आज़ादी के लिए नींव की ईट बन गए.

अलविदा डेविड भाई …

डेविड भाई को भावभीनी श्रद्धांजलि विपिन जोशी,स्वर स्वतंत्र कौन रहा है सदा,लेकिन कुछ लोगों की विदाई दुख दे जाती है नहीं रहे डेविड भाई. जैसे ही आज सुबह ये खबर आयी कि डेविड भाई नहीं रहे। एक भावनात्मक और अकादमिक शोक की लहर देश भर के गांधीवादी कार्यकर्ताओं में फैल गई। सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों,

विरासत और विश्वास : नवरात्र

विपिन जोश कत्यूर घाटी में चैत्र नवरात्रि का भव्य आगाज़: कोट भ्रामरी में ‘शक्ति बेलन‘ ने दिखाया युवाओं का शौर्य, टीट बाज़ार में उमड़ी कलशयात्रा गरुड़ (बागेश्वर): 21मार्च, 2026 देवभूमि उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध कत्यूर घाटी आज चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन पूरी तरह शक्तिमयी गूंज से सराबोर रही। कोट भ्रामरी मंदिर को कत्यूर राजवंश की

60 वर्ष बाद लौटा है रौद्र संवत्सर

रौद्र संवत्सर 19 मार्च 2026 (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुरुवार) से शुरू होकर 7 अप्रैल 2027 तक चलेगा। लगभग 60 वर्ष बाद (पिछली बार 1966 में) यह नाम लौटा है। नाम से ही स्पष्ट है—रौद्र अर्थात् उग्र, तीव्र, क्रोधपूर्ण या शिव के रुद्र रूप जैसा। रौद्र संवत्सर की मुख्य विशेषताएँ राजा: देवगुरु बृहस्पति (गुरु) — ज्ञान,

डिजिटल इंडिया के दौर में ‘नो नेटवर्क जोन

विपिन जोशी.. पैराग्लाइडिंग के सफल टेक-ऑफ के बीच लाहुर घाटी में संचार व्यवस्था ‘क्रैश’ गरुड़ (बागेश्वर): गरुड़ तहसील के डनेराखाल में जब पैराग्लाइडर के पंख आसमान में लहराए, तो कत्यूर घाटी के ग्रामीणों की आंखोंमें उत्साह और भविष्य की उम्मीदें साफ झलक रही थीं। नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (NIM) जम्मू पहलगाम के तत्वाधान मेंआयोजित दो

फूलदेई छम्मा देई

फूलदेई उत्तराखंड का एक प्राचीन और प्रसिद्ध लोक बाल पर्व है, जो मुख्य रूप से गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों में मनाया जाता है। यह त्योहार चैत्र मास की संक्रांति (मीन संक्रांति) पर शुरू होता है, जो सामान्यतः14 या 15 मार्च को पड़ता है। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सौर कैलेंडर के अनुसार हिंदू नववर्ष इसी दिन से शुरू माना जाता है।

वीरांगनाएँ देंगी जागृति का संदेश

समानता के भाव को देखते हुए सभी को अवसर देते हुए वीरांगना संगठन का चुनाव किया गया, जाति धर्म से ऊपर उठते हुए महिला पंचायत प्रतिनिधियों को पंचायत विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

एक अनसुनी दास्ताँ : अतीत के साक्ष्य

आज भी ऐसे कई गुमनाम सेनानी होंगे जो अतीत में दस्तावेजीकरण से रह गए थे . अब यह जिम्मेदारी लेनी होगी कि खोजें अपने आसपास ऐसे महान व्यक्तितत्व को जो देश की आज़ादी के लिए नींव की ईट बन गए.

अलविदा डेविड भाई …

डेविड भाई को भावभीनी श्रद्धांजलि विपिन जोशी,स्वर स्वतंत्र कौन रहा है सदा,लेकिन कुछ लोगों की विदाई दुख दे जाती है नहीं रहे डेविड भाई. जैसे ही आज सुबह ये खबर आयी कि डेविड भाई नहीं रहे। एक भावनात्मक और अकादमिक शोक की लहर देश भर के गांधीवादी कार्यकर्ताओं में फैल गई। सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों,