मनोरंजन

चरखा दिशा टीम के रचनाकार : विपिन जोशी

चरखा दिशा टीम के कुछ रचनाकार लगातार देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में अपने मन की बात अपने आसपास के मुद्दों को लेकर लिखते रहे हैं. आज उत्तराखंड बागेश्वर के साथियों की ये चार कविताएँ . क्यों अधिकार छीन लेते हो? राधा गोस्वामी कक्षा 11, उम्र 16 गरुड़, उत्तराखंड गंगा सी शीतल है वो, फूलों

निकाय चुनावों की गर्मी और लुढ़कता पारा : विपिन जोशी

निकाय चुनावों की गर्मी से प्रदेश भर में बैनर पोस्टर, फ्लैक्स, प्रचार वाहनों में गूंजते वादों भरे गीत, माननियों के दौरे, शोसल मीडिया में रील की रेल प्रचार से भरी खबरें। इन सबने जनवरी मध्य में लुढ़कते पारे को भी गर्म कर दिया है। उत्तरैणी मेले से ठीक पहले कड़ाके की ठण्ड ने चुनाव प्रचार

शिक्षक प्रतिभा प्रदर्शन : Vipin Joshi

शिक्षक प्रतिभा प्रदर्शन : शिक्षकों का स्वैच्छिक मंच गरूड़ विकास खण्ड शैक्षिक नवाचारों का केन्द्र है। रचनात्मक शिक्षण के तमाम नवाचार गरूड़ विकास खण्ड से शुरू हुए हैं। दिवार पत्रिका, बाल शोध मेला, किचन गार्डन, सपनों की उड़ान, सामूहिक जन्मोत्सव, समर-विन्टर स्कूल कैम्प, पुस्तकालय आदि बहुत से नवाचारों में उत्तराखण्ड में गरूड़ विकास खण्ड का

अलविदा दिसंबर 2024 : विपिन जोशी

दिसंबर के साथ साल 2024 विदाई लेने को तैयार है. वक्त मुट्ठी में कसी रेत की मानिंद फिसल रहा है. लेकिन दूर दूर तक बारिश का नामोनिशा नहीं है. गेहूँ के खेत सूख चुके हैं, नहरों में झाड़ियाँ जमी हुई हैं लिफ्ट योजना के पंप जवाब दे चुके हैं. गेहूँ को पाला यानी तुषार मार

पिघलता हिमालय

विपिन जोशी दिसंबर 2024 शनिवार का दिन। चटख धूप है आसमान बादल रहित है। हिमालय पर्वत साफ स्वच्छ है। हिम विहीन पर्वत उजाड़ सा लग रहा है। साथ में इसी सप्ताह प्रदेश में हिमालय दिवस समारोह मनाया गया है। प्रोजेक्टर पर स्लाइड शो चले हैं, विशेषज्ञों के भाषण चले हैं, पत्रकारों, लेखकों ने अपने अनुभव

चरखा के दिशा गृह : विपिन जोशी

उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ ऐसे केंद्रों की कल्पना कीजिए जो गांव की किशोरियों को पढ़ने लिखने की संस्कृति से जोड़े, मुखर अभिव्यक्ति के अवसर दे और आजीविका के गुर भी सीखे। इस कल्पना को चरखा मीडिया डेवल्पमेंट संस्था ने अक्टूबर 2021 में धरातल पर उतारने की कवायद शुरू की है। चर्खा मिडिया डेवलपमेंट

सहभागिता प्रदत मंचन शुरू : विपिन जोशी

शास्त्रीय संगीत आधारित कत्यूर घाटी की प्रसिद्ध रामलीला धूम धाम के साथ आरंभ हो चुकी है. कमेटी के निर्देशक नीरज पंत इस बार रावण और दशरथ की भूमिका में नज़र आयेंगे. रंगमंच के छटे हुए कलाकारों में नीरज पंत का शुमार होता है.बचपन से ही नीरज रामलीला मंचन से जुड़े हैं, राम, सीता, अंगद, बनासुर,दशरथ

सामाजिकता की पहचान अल्मोड़ा का दशहरा : विपिन जोशी

कौमी एकता और अल्मोड़े का दशहरा विगत दो दशकों में भारत में हिंदू मुस्लिम तनाव में अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि देखने को मिली है। कोविड काल के बाद तो दो संप्रदायों के बीच नफरत की खाई और अधिक फैली है। लेकिन इन तमाम उन्मादी खबरों के बीच उत्तराखण्ड के सांस्कृतिक नगर अल्मोड़ा से एक अच्छी और

पत्तियों पर उभरती कल्पना : लीफ आर्ट / विपिन जोशी

पत्तियों पर उभरती कल्पना : लीफ आर्ट एक नई पहल। आर्ट के कई रूप हैं,इन विविध रूपों में कुछ इंद्रधनुषी रंग किसी कलाकार की रचनात्मकता में झलकते हैं। ऐसे ही एक कलाकार से मुलाकात हुई। जिन्होंने पेंटिंग के लिए कैनवास बनाया पत्तियों को और अपनी कल्पनाशक्ति को प्रकृति प्रदत पत्तियों पर उकेरा अपना हुनर। इस

लोक गायन भगनौल विधा पर संकट

उत्तराखण्ड की प्राचीन लोक गायन विधा है भगनौल। सवाल-जवाब की यह गायन परंपरा सदियों से पहाड़ की वादियों में गूंजती रही है। तमाम तरह के शास्त्रीय बंधनों से मुक्त लोक जीवन की संगीत परम्परा को उत्तराखण्ड के लोक कलाकारों ने अब तक जीवित रखा है। वाचिक परम्परा और तार्किकता की त्वरित शैली जब हुड़के की

चरखा दिशा टीम के रचनाकार : विपिन जोशी

चरखा दिशा टीम के कुछ रचनाकार लगातार देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में अपने मन की बात अपने आसपास के मुद्दों को लेकर लिखते रहे हैं. आज उत्तराखंड बागेश्वर के साथियों की ये चार कविताएँ . क्यों अधिकार छीन लेते हो? राधा गोस्वामी कक्षा 11, उम्र 16 गरुड़, उत्तराखंड गंगा सी शीतल है वो, फूलों

निकाय चुनावों की गर्मी और लुढ़कता पारा : विपिन जोशी

निकाय चुनावों की गर्मी से प्रदेश भर में बैनर पोस्टर, फ्लैक्स, प्रचार वाहनों में गूंजते वादों भरे गीत, माननियों के दौरे, शोसल मीडिया में रील की रेल प्रचार से भरी खबरें। इन सबने जनवरी मध्य में लुढ़कते पारे को भी गर्म कर दिया है। उत्तरैणी मेले से ठीक पहले कड़ाके की ठण्ड ने चुनाव प्रचार

शिक्षक प्रतिभा प्रदर्शन : Vipin Joshi

शिक्षक प्रतिभा प्रदर्शन : शिक्षकों का स्वैच्छिक मंच गरूड़ विकास खण्ड शैक्षिक नवाचारों का केन्द्र है। रचनात्मक शिक्षण के तमाम नवाचार गरूड़ विकास खण्ड से शुरू हुए हैं। दिवार पत्रिका, बाल शोध मेला, किचन गार्डन, सपनों की उड़ान, सामूहिक जन्मोत्सव, समर-विन्टर स्कूल कैम्प, पुस्तकालय आदि बहुत से नवाचारों में उत्तराखण्ड में गरूड़ विकास खण्ड का

अलविदा दिसंबर 2024 : विपिन जोशी

दिसंबर के साथ साल 2024 विदाई लेने को तैयार है. वक्त मुट्ठी में कसी रेत की मानिंद फिसल रहा है. लेकिन दूर दूर तक बारिश का नामोनिशा नहीं है. गेहूँ के खेत सूख चुके हैं, नहरों में झाड़ियाँ जमी हुई हैं लिफ्ट योजना के पंप जवाब दे चुके हैं. गेहूँ को पाला यानी तुषार मार

पिघलता हिमालय

विपिन जोशी दिसंबर 2024 शनिवार का दिन। चटख धूप है आसमान बादल रहित है। हिमालय पर्वत साफ स्वच्छ है। हिम विहीन पर्वत उजाड़ सा लग रहा है। साथ में इसी सप्ताह प्रदेश में हिमालय दिवस समारोह मनाया गया है। प्रोजेक्टर पर स्लाइड शो चले हैं, विशेषज्ञों के भाषण चले हैं, पत्रकारों, लेखकों ने अपने अनुभव

चरखा के दिशा गृह : विपिन जोशी

उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ ऐसे केंद्रों की कल्पना कीजिए जो गांव की किशोरियों को पढ़ने लिखने की संस्कृति से जोड़े, मुखर अभिव्यक्ति के अवसर दे और आजीविका के गुर भी सीखे। इस कल्पना को चरखा मीडिया डेवल्पमेंट संस्था ने अक्टूबर 2021 में धरातल पर उतारने की कवायद शुरू की है। चर्खा मिडिया डेवलपमेंट

सहभागिता प्रदत मंचन शुरू : विपिन जोशी

शास्त्रीय संगीत आधारित कत्यूर घाटी की प्रसिद्ध रामलीला धूम धाम के साथ आरंभ हो चुकी है. कमेटी के निर्देशक नीरज पंत इस बार रावण और दशरथ की भूमिका में नज़र आयेंगे. रंगमंच के छटे हुए कलाकारों में नीरज पंत का शुमार होता है.बचपन से ही नीरज रामलीला मंचन से जुड़े हैं, राम, सीता, अंगद, बनासुर,दशरथ

सामाजिकता की पहचान अल्मोड़ा का दशहरा : विपिन जोशी

कौमी एकता और अल्मोड़े का दशहरा विगत दो दशकों में भारत में हिंदू मुस्लिम तनाव में अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि देखने को मिली है। कोविड काल के बाद तो दो संप्रदायों के बीच नफरत की खाई और अधिक फैली है। लेकिन इन तमाम उन्मादी खबरों के बीच उत्तराखण्ड के सांस्कृतिक नगर अल्मोड़ा से एक अच्छी और

पत्तियों पर उभरती कल्पना : लीफ आर्ट / विपिन जोशी

पत्तियों पर उभरती कल्पना : लीफ आर्ट एक नई पहल। आर्ट के कई रूप हैं,इन विविध रूपों में कुछ इंद्रधनुषी रंग किसी कलाकार की रचनात्मकता में झलकते हैं। ऐसे ही एक कलाकार से मुलाकात हुई। जिन्होंने पेंटिंग के लिए कैनवास बनाया पत्तियों को और अपनी कल्पनाशक्ति को प्रकृति प्रदत पत्तियों पर उकेरा अपना हुनर। इस

लोक गायन भगनौल विधा पर संकट

उत्तराखण्ड की प्राचीन लोक गायन विधा है भगनौल। सवाल-जवाब की यह गायन परंपरा सदियों से पहाड़ की वादियों में गूंजती रही है। तमाम तरह के शास्त्रीय बंधनों से मुक्त लोक जीवन की संगीत परम्परा को उत्तराखण्ड के लोक कलाकारों ने अब तक जीवित रखा है। वाचिक परम्परा और तार्किकता की त्वरित शैली जब हुड़के की