
पहाड़ियों में गूंजती हुड़के की थाप
विपिन जोशी,स्वर स्वतंत्र 1272d801-5112-414b-816e-0b84e1ae8138 उत्तराखंड की देवभूमि परंपरा में कुमाऊं क्षेत्र की जोन्यार और जागर संस्कृति केवल लोक मनोरंजन नहीं, बल्कि आस्था, मनोविज्ञान और समाज के अटूट बंधन का जीवंत प्रमाण हैं। यहाँ की पहाड़ियों में गूंजती हुड़के की थाप और काँसे की थाली की गूँज सीधे पूर्वजोंऔर देवताओं से संवाद करने का माध्यम मानी



























