विपिन जोशी.
गरुड़ गंगा मल्टी पार्किंग मामला: हाई कोर्ट का रुख स्पष्ट, पार्किंग निर्माण पर ‘स्टे‘ जारी। क्या कहते हैं आम जन?
बागेश्वर/गरुड़ : उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल ने गरुड़ गंगा में हो रहे मल्टी पार्किंग निर्माण और अतिक्रमण को लेकर ऐतिहासिकआदेश पारित किया है। गरुड़ गंगा में बन रहे मल्टी लेवल पार्किंग परियोजना की कुल स्वीकृत लागत लगभग ₹22.17 करोड़ है। शासन द्वारा प्रथम किस्त के रूप में ₹8.87 करोड़ (लगभग) की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। यह पार्किंग 5 मंजिला प्रस्तावित है, जिसकी ऊंचाई 15 मीटर और लंबाई 96 मीटर के करीब है।
इस परियोजना के लिए कार्यदायी संस्था ब्रिडकुल ,यानी ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड है। विशेष रूप से ब्रिडकुल, पिथौरागढ़ इकाई इस कार्य की देखरेख कर रही है। हाई कोर्ट ने पारिस्थितिक तंत्र कोप्राथमिकता देते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और नदी किनारे बन रहे पार्किंग पर स्टे बरकरार रखा है .
कोर्ट के आदेश के मुख्य अंश।
गरुड़ में प्रस्तावित पार्किंग स्थल पर चल रहे निर्माण कार्य पर हाई कोर्ट ने रोक को आगे बढ़ा दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जबतक मामले की पूरी सुनवाई नहीं हो जाती, वहां कोई नया निर्माण नहीं होगा।
डी के जोशी अधिवक्ता हाई कोर्ट नैनीताल, न्यायालय ने जिलाधिकारी बागेश्वर और राजस्व विभाग को फटकार लगाते हुए पूछा है किसंवेदनशील नदी क्षेत्रों में निर्माण की अनुमति किन आधारों पर दी गई। विभाग से इस पर विस्तृत हलफनामा मांगा गया है।
हरीश जोशी, पर्यावरणविद, नदी के अस्तित्व पर संकट: याचिका में तर्क दिया गया था कि गरुड़ नदी अतिक्रमण के कारण अपनाअस्तित्व खो रही है। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए नदी के पुनरुद्धार और संरक्षण की बात कही है। उम्मीद है गोलू मार्केट के अतिक्रमण पर भी कोर्ट स्वतः संज्ञान जरूर लेगा .
विनोद कुमार, स्थानीय व्यवसायी, गरुड़ में बढ़ते अतिक्रमण और ट्रैफ़िक से आम जन परेशान है, कभी कभी तो आपातकालीन सेवा एंबुलेंस भी ट्रैफ़िक जाम में फस जाती है, बाय पास रूट यहाँ नहीं होने से बाज़ार में जाम बना रहता है. इसलिए पार्किंग तो चाहिए लेकिन नदी का अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं होगा, अभी हाईकोर्ट का स्टे है.
स्थानीय लोगों में अब चर्चा आम है और क़यास लगाए जा रहे हैं कि कोर्ट के कड़े रुख का असर अब गरुड़ गोलू मार्केट पर भी दिखेगा।आदेश के तहत राजस्व विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि मार्केट क्षेत्र में किए गए सभी अवैध अतिक्रमणों को चिन्हित किया जाए।माना जा रहा है कि कोर्ट के अंतिम आदेश के बाद यहाँ बड़े स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हो सकती है।
कुछ प्रमुख सवाल जो चर्चा में हैं
क्या नदी की जमीन पर पार्किंग का निर्माण पर्यावरण नियमों का सीधा उल्लंघन है ?
राजस्व रिकॉर्ड में छेड़छाड़ और अतिक्रमण पर प्रशासन क्यों चुप्पी साधे है?
हाई कोर्ट के आदेश (दिनांक 18.03.2026) के अनुसार, गरुड़ गंगा नदी में बन रहे निर्माण को लेकर हाई कोर्ट ने निम्न आदेश दिए:
जिला प्रशासन और राजस्व विभाग को फटकार लगाते हुए निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि अभी तक इन विभागों ने कोई जवाबीशपथपत्र दाखिल नहीं किया है।
3 सप्ताह का समय दिया गया। अदालत ने आदेश दिया कि जिला प्रशासन और राजस्व विभाग 3 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिलकरें। यह भी बताएं कि पार्किंग का निर्माण पूर्व में बने टैक्सी पार्किंग क्षेत्र से बाहर क्यों और कैसे बढ़ाया जा रहा है। गंभीर टिप्पणीकरते हुए कोर्ट ने
कि फोटो से प्रतीत होता है कि निर्माण नदी के बीच में हो रहा है, जो चिंता का विषय है। फ़िलहाल अंतरिम आदेश जारी रहेगा। अगली सुनवाई 3 सप्ताह बाद सूचीबद्ध की जाएगी ।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामला सुर्खियों में आया, जिससे अब गरुड़ की जनता को अतिक्रमण मुक्त नदी की उम्मीद जगी है। अगलीसुनवाई की तिथि न्यायालय द्वारा 3 सप्ताह बाद निर्धारित की जाएगी. फिलहाल गरुड़ क्षेत्र में उक्त मामला हॉट मुद्दा बना हुआ है.
गरुड़ से विपिन जोशी की ये रिपोर्ट.




