पहाड़ों की ‘पगडंडियों’ पर दम तोड़ती आधुनिकता और सिस्टम की बेशर्मी
: विपिन जोशी स्वर स्वतंत्र
उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के धारचूला से आई कनार ग्राम पंचायत की तस्वीरें केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक कराह है—उस व्यवस्था के खिलाफ जो कागजों पर तो ‘ऑल वेदर’ होने का दंभ भरती है, लेकिन हकीकत में पहली ही बारिश में घुटनों पर आ जाती है।
एक गर्भवती महिला को 20 किलोमीटर तक डंडी-कांडी के सहारे उफनते गदेरों, मलबे से पटी पगडंडियों और मूसलाधार बारिश के बीच अस्पताल ले जाना, किसी साहसिक पर्यटन का हिस्सा नहीं है। यह उस तंत्र की विफलता का जीवित साक्ष्य है, जो ऊंचे-ऊंचे मंचों से ‘मातृ-शिशु मृत्यु दर’ कम करने के दावे करता है।
सोचिए, उस महिला की मानसिक स्थिति क्या रही होगी जो प्रसव की असहनीय पीड़ा के बीच बारिश में भीग रही थी? उन ग्रामीणों के हौसले की दाद देनी होगी जिन्होंने अपने कंधों पर व्यवस्था का बोझ उठाया, लेकिन उनके मन में प्रशासन के प्रति जो आक्रोश है, उसे कौन पढ़ेगा? बारिश में भीगते हुए उन तीमारदारों के कपड़े तो सूख जाएंगे, लेकिन क्या शासन के चेहरे पर लगा यह ‘विकास का कलंक’ कभी धुलेगा?
महज आंकड़ों में सिमटा सीमांत
धारचूला और मुनस्यारी जैसे सीमांत क्षेत्र देश की सुरक्षा के लिए सामरिक रूप से जितने महत्वपूर्ण हैं, बुनियादी सुविधाओं के मामले में उतने ही उपेक्षित।
* क्या डिजिटल इंडिया का लाभ कनार के उस बीमार व्यक्ति को नहीं मिलना चाहिए जिसे एम्बुलेंस तक नसीब नहीं?
* क्या करोड़ों के बजट वाली ‘डोली योजना’ और एयर एम्बुलेंस केवल वीआईपी दौरों के लिए आरक्षित हैं?
स्वर स्वतंत्र न्यूज़ का सीधा सवाल
हम सवाल पूछते हैं उन नीति-निर्माताओं से, जो राजधानी के वातानुकूलित कमरों में बैठकर पहाड़ की नीतियां बनाते हैं। क्या उन्हें अंदाजा है कि पहाड़ की ढलानों पर एक गर्भवती महिला के लिए 20 किलोमीटर का सफर किसी ‘अग्निपरीक्षा’ से कम नहीं है? सड़कें केवल वोट बैंक का जरिया नहीं, बल्कि जीवन रेखा होती हैं। और जब ये रेखाएं टूटती हैं, तो विश्वास भी टूटता है।
यदि आज भी कनार जैसी पंचायतों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए दशकों का इंतज़ार करना पड़ रहा है, तो हमें अपने ‘विकसित उत्तराखंड’ के नारे पर पुनर्विचार करने की ज़रूरत है। पहाड़ की ममता को अब और इम्तिहान न दें। कनार को सड़क चाहिए, खोखले आश्वासन नहीं।
“पहाड़ का पानी और जवानी ही नहीं, अब तो यहाँ की उम्मीदें भी पलायन कर रही हैं।”





