विपिन जोशी
कत्यूर महोत्सव: ऐतिहासिक नाटक और स्टार नाइट का जादू, सांस्कृतिक विरासत के साथ खेलों का संगम
बागेश्वर (कत्यूर घाटी): कत्यूर महोत्सव के दूसरे दिन कत्यूर घाटी की ऐतिहासिक विरासत, स्कूली बच्चों की प्रतिभा और लोक गायकों की सुरीली आवाज़ का अद्भुत संगम देखने को मिला। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से लेकर वॉलीबॉल के मैदान तक, महोत्सव ने क्षेत्र के जनमानस को उत्साह से भर दिया।
रंगमंच से जीवंत हुआ कत्यूर का इतिहास
महोत्सव के दूसरे दिन का सबसे बड़ा आकर्षण स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत संस्कृत नाटक रहा। पहली बार बच्चों ने कत्यूर महोत्सव के मंच पर कत्यूर घाटी के गौरवशाली इतिहास को संस्कृत भाषा में जीवंत किया। रचनात्मक शिक्षण को अपनी ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने का यह अनूठा प्रयास दर्शकों को इतना भाया कि पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।
इसके साथ ही नैनीताल की नन्हीं कलाकार अवर्णिका जोशी ने लोक गीतों और मांगल गीतों की ऐसी शानदार प्रस्तुति दी कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। गौरतलब है कि अवर्णिका की माता, कंचन जोशी भी राज्य भर में ऐपण विधा के माध्यम से कुमाऊँनी संस्कृति के संरक्षण में जुटी हुई हैं।
व्यवस्था पर कटाक्ष और शब्दों की रसधारा
साहित्यिक सत्र में क्षेत्र के दिग्गज कवियों ने अपनी कविताओं से सामाजिक मुद्दों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर बढ़शीला के कुशल संचालन में मोहन जोशी, डॉ. हेम चंद्र दूबे, डॉ. प्रीतम नेगी सहित अनेक कवियों ने काव्य पाठ किया। इन रचनाकारों ने जहाँ एक ओर रसधारा बहाई, वहीं दूसरी ओर सामाजिक विसंगतियों और व्यवस्था पर तीखे कटाक्ष कर जनता को सोचने पर मजबूर किया।
वॉलीबॉल प्रतियोगिता का आगाज़
युवाओं को महोत्सव से जोड़ने के लिए इस बार वॉलीबॉल प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया, जिसमें जिले की 8 टीमों ने हिस्सा लिया। नगर पंचायत अध्यक्ष भावना वर्मा ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए इसे एक सकारात्मक कदम बताया। वहीं, पूर्व प्रधानाचार्य नंदन सिंह अल्मिया ने सुझाव दिया कि भविष्य में कबड्डी और कैरम जैसे खेलों को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि महोत्सव का स्वरूप और अधिक ऊर्जावान हो सके।
माया उपाध्याय और राकेश खनवाल ने बांधा समां
महोत्सव की शाम ‘स्टार नाइट’ के नाम रही। लोक गायिका माया उपाध्याय और राकेश खनवाल को सुनने के लिए दूर-दराज से भारी भीड़ उमड़ी। खचाखच भरे पंडाल में दर्शकों ने पूरी रात ठुमके लगाए।
एक भावुक पल तब आया जब कलाकारों ने मंच पर युवा एसडीएम वैभव कांडपाल और उनकी पत्नी को आमंत्रित कर उन्हें सुखी वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएँ दीं। इस रंगारंग शाम का लुत्फ दर्जा मंत्रियों से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष और विभिन्न राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भी उठाया।
कत्यूर महोत्सव का दूसरा दिन न केवल मनोरंजन का केंद्र रहा, बल्कि इसने शिक्षा, साहित्य, खेल और संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया।




