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विधायक पुत्र की गाड़ी सीज़

विपिन जोशी

मिर्ची न्यूज़: जब ‘विधायक जी के लाडले‘ का रसूख पड़ गया फीका!

नैनीताल: देवभूमि की वादियों में ठंडी हवा का लुत्फ उठाने आए यूपी के एक विधायक पुत्र को उस वक्त ‘गर्मी‘ का एहसास हो गया, जब उनका सामना नैनीताल के एसडीएम नवाजिश खलीक से हो गया। जनाब सड़क पर गाड़ी नहीं, बल्कि ‘रसूख‘ दौड़ा रहे थे, लेकिन प्रशासन ने ऐसा ‘ब्रेक‘ मारा कि अब गाड़ी थाने में है और विधायक पुत्र पैदल!

 

 हूटर बजा… पर किस्मत सो गई!

सफेद चमचमाती गाड़ी, ऊपर लगा ‘वीआईपी‘ हूटर और अंदर बैठे सत्ता के नशे में चूर साहबजादे। उन्हें लगा कि नैनीताल की सड़केंउनके घर का आंगन हैं। उन्होंने सोचा होगा कि हॉर्न बजाएंगे और ट्रैफिक खुद–ब–खुद लाल कालीन बिछा देगा। पर अफसोस, सामनेएसडीएम साहब खड़े थे, जिन्हें ‘लाडलों‘ की ज़िद से ज्यादा ‘नियमों‘ की परवाह थी।

 “जानते नहीं मैं कौन हूँ?”… “जी, अब आप पैदल यात्री हैं!”

जब एसडीएम नवाजिश खलीक ने गाड़ी रोकी और कागजात मांगे, तो साहबजादे ने वही पुराना घिसा–पिटा डायलॉग मारा जो हरबिगड़े शहजादे की जुबान पर होता है। बदतमीजी की हद तो तब हो गई जब उन्होंने सीधे अधिकारी से ही उलझना शुरू कर दिया।

प्रशासन का करारा जवाब:

एसडीएम साहब ने बिना विचलित हुए साफ संदेश दे दिया “आप विधायक के पुत्र होंगे अपने घर में, सड़क पर आप सिर्फ एक नियमतोड़ने वाले चालक हैं।“

 नतीजा: दबंगई सीज, अकड़ ढीली

जब पुलिस ने गाड़ी की तलाशी ली, तो न ढंग के कागज मिले और न ही व्यवहार में तमीज। नतीजा?

* गाड़ी: सीज होकर पुलिस चौकी की शोभा बढ़ा रही है।

* हूटर: जो कल तक दहाड़ रहा था, अब खामोश है।

* विधायक पुत्र: अब शायद नैनीताल की वादियों में टैक्सी के रेट पूछ रहे होंगे।

सबक: रसूख का ‘पास‘ सड़क पर नहीं चलता!

नैनीताल प्रशासन की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि लोकतंत्र में ‘खास‘ बनने का शौक तब तक ही अच्छा है जब तक आपकानून के दायरे में हैं। वर्दी और कलम ने मिलकर यह साबित कर दिया कि नियम सबके लिए बराबर हैं—चाहे आप आम आदमी होंया किसी खास के ‘खास‘। अगली बार जब नैनीताल आएं, तो ‘पापा का नाम‘ नहीं, गाड़ी के ‘पेपर‘ साथ लाएं!

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