विपिन जोशी…
मिडिल ईस्ट युद्ध की तपिश में झुलसती चार धाम यात्रा; 80% तक गिरी बुकिंग
उत्तरकाशी/ऋषिकेश: यह एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। मिडिल ईस्ट में विगत 29 दिनों से तनाव जारी है और अब इस भू–राजनीतिक तनाव का असर सात समंदर पार उत्तराखंड की शांत वादियों और पवित्र चार धाम यात्रा पर पड़ना शुरू हो गया है।ऊर्जा संकट ने न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था, बल्कि स्थानीय पर्यटन की कमर तोड़ दी है।

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा का बिगुल बजने ही वाला है। आगामी 19 अप्रैल से कपाट खुलने के साथ ही आस्था का सैलाब उमड़नेकी उम्मीद थी, लेकिन इस बार नजारा कुछ बदला–बदला और फीका नजर आ रहा है। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में छिड़े युद्ध नेवैश्विक स्तर पर जो ऊर्जा संकट पैदा किया है, उसका सीधा और घातक प्रहार उत्तराखंड के पर्यटन व्यवसाय पर हुआ है।
यात्रा सीजन शुरू होने से पहले जहाँ होटलों में ‘नो वैकेंसी‘ के बोर्ड लग जाया करते थे, वहाँ इस बार सन्नाटा है। आंकड़ों की मानें तोहोटल और वाहनों की बुकिंग में 50% से 80% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
ईंधन और गैस की अनिश्चितता ने तीर्थयात्रियों के मन में डर पैदा कर दिया है। भारी निवेश करने वाले होटल व्यवसायी और टूरऑपरेटर्स अब बैंक की किश्तें चुकाने को लेकर चिंतित हैं।
उत्तरकाशी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह मटूड़ा ने ग्राउंड रियलिटी बताते हुए कहा कि किचन‘ संस्कृति पर संकट आन है गैस की किल्लत बनी रोड़ा उन्होंने बताया कि चार धाम आने वाले तीर्थयात्रियों का एक बड़ा वर्ग (विशेषकर ग्रुप में आने वाले यात्री) अपना खाना खुद बनाना पसंद करता है। बड़ी संख्या में यात्री कमर्शियल सिलेंडर और राशन साथ लाते हैं और होटलों में कमरों केसाथ किचन बुक करते हैं। लेकिन मौजूदा गैस संकट के कारण स्थिति भयावह है। हम यात्रियों को यह भरोसा नहीं दिला पा रहे हैं किउनका खाली सिलेंडर समय पर रिफिल हो पाएगा। जब भोजन की व्यवस्था ही अनिश्चित हो, तो यात्री बुकिंग कैंसिल कर रहे हैं।”
ट्रैवल और टूर ऑपरेटर्स भी झेल रहे हैं दोहरी मार.
सिर्फ होटल ही नहीं, बल्कि परिवहन सेक्टर भी इस संकट की चपेट में है। तेल की कीमतों में अस्थिरता और आपूर्ति की कमी ने ट्रैवलएजेंटों के कैलकुलेशन बिगाड़ दिए हैं।
एक ओर बढ़ता किराया है तो तेल महंगा होने से वाहनों का किराया बढ़ गया है। जो बुकिंग्स महीनों पहले हुई थीं, अब वे भी रद्द कीजा रही हैं क्योंकि यात्रियों को डर है कि रास्ते में ईंधन न मिलने पर वे कहीं फंस न जाएं।
4. स्थानीय अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा है होटल व्यवसाय 60-80% तक और वाहन बुकिंग 50% से अधिक प्रभावित हुआ है । तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन में बाधा से स्थानीय गाइड/श्रमिक उच्च पर्यटकों की कमी से रोजगार पर संकट आने के संकेत दिखने लगे हैं।
चार धाम यात्रा उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ है। मिडिल ईस्ट के युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि आज की दुनिया में कोई भीकोना वैश्विक संकट से अछूता नहीं है। यदि सरकार और प्रशासन ने जल्द ही ऊर्जा आपूर्ति को लेकर कोई ठोस कदम या ‘बफरस्टॉक‘ की व्यवस्था नहीं की, तो इस साल की यात्रा स्थानीय व्यापारियों के लिए एक बड़ी आर्थिक त्रासदी साबित हो सकती है।





