गांव वाणी

हम जमीनी स्तर की किशोरी युवाओं का एक समूह हैं जो विभिन्न संचार माध्यमों (आलेख और कविताएं) से अपने गांवों के जेंडर और अन्य सामाजिक मुद्दों को उजागर करना चाहते हैं। ऐसे सामाजिक मुद्दे जिन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
धन्यवाद
टीम, गाँव की आवाज़
मिटाओ दहेज प्रथा

निर्मला
उम्र – 16
जगथाना, उत्तराखंड


मिटाओ इस भ्रम को,
मिटाओ इस प्रथा को,
जो लाचारी का फरमान है,
दहेज ही वो बुरी प्रथा है,
जो लेता बेटियों की जान है,
लालच का जो चश्मा लगाकर,
गुण उसे फिर नजर न आता,
दहेज कोई प्रथा नहीं, कलंक है,
ये समाज कब समझेगा?
इसमें बेटियों की खुशी नहीं होती,
मिटता उसका केवल अरमान है,
ये रीति रिवाज नहीं, लोगों का भ्रम है।।
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नन्हीं चिड़िया

महिमा सिंह
उत्तराखंड

नन्हीं सी वह चिड़िया है,
डाली पर वो बैठी रहती है,
हमको प्यारी सी लगती है,
नन्हीं सी वह चिड़िया है,
गाना अपना सुनाती है,
मीठी बोली दिल को छू जाती है,
उसका प्यार गाना सुनकर,
मोर भी नाचने लगते हैं,
नन्ही सी वो प्यारी चिड़िया,
बहुत खुश हो जाती है,
उसकी प्यारी खुशी देखकर,
जंगल के फूल खिल जाते हैं।।
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एकता में बल

लक्ष्मी आर्य
गरुड़, उत्तराखंड

साथ मिलकर कदम बढ़ाएं,
एकता में बोल फिर बढ़ाएं,
एक साथ रहती नीव हमारी,
हौसले से कदम सभी बढ़ाएं,
मिलकर जब हम साथ चलेंगे,
एकता में फिर बल बढ़ाएंगे,
हर पल हम बढ़ते जाएंगे,
फिर रोक न हमें कोई पाएंगे,
हर पल हम मिलकर संग रहेंगे,
फिर एकता में बल बढ़ाएंगे।।
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एक लड़की का सपना

भूमिका
कक्षा 8th
जखेड़ा, उत्तराखंड

कोई कितने बड़े भी सपने क्यों न हों,
मेरे पूरे हों ये हर कोई सोचता है,
शायद लड़कियों के सपने नहीं होते हैं,
मगर मैं बताती हूं मेरा एक छोटा सा सपना है,
कि मैं इंजीनियर बनूं और जग में नाम रौशन करूं,
इसको पूरा करने के लिए पूरा जी जान लगाऊँ,
और सपने पूरा करके सबको मैं दिखलाऊँ,
फिर लड़कियों के लिए मैं एक मिसाल बन जाऊं।।

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