सरकार जन जन के द्वार पर हॉस्पिटल है बेकार

विपिन जोशी..

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ में अल्ट्रासाउंड व्यवस्था वेंटिलेटर पर।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ में अल्ट्रासाउंड व्यवस्था चरमरा गई है: मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, लाइन में इंतजार करते मरीजों को अगले दिन बुलाया जा रहा। गरुड़ , बैजनाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड की सुविधा हफ्ते में सिर्फ तीन दिन (बृहस्पतिवार, शुक्रवार और शनिवार) उपलब्ध है।

हिंदुस्तान संवाददाता ने धरातल पर पड़ताल की ओर पाया कि दोपहर 1 बजे तक अल्ट्रासाउंड रूम की वेटिंग गैलरी में 45 से ज्यादा मरीज लाइन में बैठे मिले। थराली से आए हरेंद्र आर्या सुबह 9 बजे पहुंचे थे, लेकिन तीन घंटे बाद भी नंबर नहीं आया। भावना देवी (सुराग), कौशल्या (नौगांव), संजय कुमार, प्रियंका देवाल (सुबह 8 बजे से इंतजार), और ममता देवी (चोरसों) जैसी कई महिलाओं ने बताया कि उन्हें घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है या अगले दिन आने को कहा जा रहा है।

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“रोज काम का नुकसान करके कौन आएगा?लेकिन क्या करें कोई दूसरा विकल्प नहीं है, चोरसों की ममता देवी ने कहा। कई मरीजों को बाहर से जांच करानी पड़ रही है, जैसे बिशन सिंह ने ब्लड प्रेशर की दवा और जांच बाहर से कराई क्योंकि अस्पताल में रिपोर्ट देर से आती है और दवाएं नहीं मिलतीं।

बिशन सिंह, वज़्यूला, मैंने बल्ड प्रेशर की दवा बाहर से ली। बल्ड जांच भी बाहर से करवाई, हॉस्पिटल में रिपोर्ट देर से आती है और ब्लेड प्रेशर की दवाई भी मुझे हॉस्पिटल से नहीं मिली। बड़ा हॉस्पिटल है लेकिन सुविधाएं न्यूनतम है।

स्टाफ और सुविधाओं की कमी

– अस्पताल लैब में सिर्फ 1 परमानेंट लैब टेक्नीशियन है। बाकी 4 संविदा पर।

– टीबी विभाग में 2 संविदा कर्मचारी।

– एक्स-रे में भी सीमित स्टाफ (उपनल से एक कर्मचारी)।

– हड्डी रोगों का इलाज और प्लास्टर की सुविधा बिल्कुल नहीं।

– सामान्य दवाएं ही मौजूद हैं (पैरासिटामोल, आईबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, मेट्रोनिडाजोल आदि) उपलब्ध हैं, लेकिन स्पेशलाइज्ड सुविधाएं न्यूनतम।

यह समस्या उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की आम चुनौती को दर्शाती है। बैजनाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रेडियोलॉजिस्ट की कमी, और रेफरल के कारण मरीजों को हल्द्वानी, देहरादून, दिल्ली, बरेली तक भटकना पड़ रहा है।

संभावित कारण, सीमित रेडियोलॉजिस्ट (सिर्फ सप्ताह में तीन दिन), बढ़ती ओपीडी (300-500 मरीज रोज), और ग्रामीण क्षेत्र के सेंटरों में स्टाफ की कमी।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सरकार गांव गांव में दिखावे के शिविर लगाना बंद करे मुख्य अस्पताल तो पहले सुधरे। यहां अल्ट्रासाउंड रोजाना उपलब्ध हो, अतिरिक्त स्टाफ भर्ती हो, और जांच रिपोर्टिंग तेज की जाए। स्वास्थ्य विभाग से जल्द हस्तक्षेप की उम्मीद है।