मुनस्यारी में प्रदीप, बसंती के हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कैंडिल मार्च
- पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर हुई नारेबाजी
- 9 नवंबर तक खुलासे का अल्टीमेटम
- फांसी की सजा तक जारी रहेगा आंदोलन
- मुनस्यारी बचाओ संघर्ष समिति ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
मुनस्यारी
पातो निवासी प्रदीप सिंह दरियाल तथा बोरागांव निवासी श्रीमती बसंती देवी के हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बुधवार को कैंडल मार्च निकाला गया। दोनों दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई और दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि भी दी गई। पुलिस कार्रवाई पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा गया कि मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी पुलिस कछुआ गति से कार्य कर रही है। पुलिस को 9 नवंबर तक का अल्टीमेटम दिया गया है।
मुनस्यारी बचाओ संघर्ष समिति के बैनर चले शास्त्री चौक में जमा हुए आंदोलनकारियो के द्वारा पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारीबाजी भी की गई। दोनों दिवंगत आत्माओं को याद करते हुए कहा गया कि 9 नवंबर तक दोनों के हत्यारों को सलाखों के पीछे जनता देखना चाहती है। हत्यारों को फांसी की सजा दिए जाने की मांग भी सभा में उठी।
आंदोलनकारियो ने कैंडल मार्च में हिस्सा लेते हुए पुलिस प्रशासन के प्रति आक्रोश प्रकट किया।
श्रद्धांजलि सभा में समिति के संयोजक तथा निर्वतमान जिला पंचायत सदस्य जगत सिंह मर्तोलिया ने कहा कि 6 अक्टूबर से लापता प्रदीप दरियाल का अब तो शव भी मिल गया है, फिर भी पुलिस के पास अभी तक उसकी मौत के कारणों की जानकारी का कोई पुख्ता आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि श्रीमती बसंती देवी की हत्या के मामले में भी पुलिस के हाथ अभी भी खाली हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस जिस ढंग से दोनों हत्याकांडों की जांच कर रही है, इससे स्पष्ट हो रहा है कि खुलासा करना पुलिस के बस की बात नहीं है।
मर्तोलिया ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पुलिस अधीक्षक से स्पष्ट कहा है कि राज्य स्तर से जो भी मदद चाहिए उसकी डिमांड की जाए। अभी तक पुलिस अधीक्षक द्वारा राज्य सरकार से कोई डिमांड नहीं की गई है।
आन्दोलन के संयोजक ने स्पष्ट रूप से कहा कि हम केवल 9 नवंबर तक दोनों हत्याकांड के अपराधियों की गिरफ्तारी का इंतजार कर रहे है। उसके बाद इस आंदोलन का उग्र स्वरूप देखने को मिलेगा। कैंडल मार्च में निर्वाचित त्रिस्तरीय पंचायत तथा नगर पंचायत के प्रतिनिधि, व्यापार उद्योग मंडल, छात्र संघ राजकीय महाविद्यालय, होटल एसोसिएशन, जोहार शिल्पी संगठन, मल्ला जोहार विकास समिति, महिला मंगल दल तथा महिला समूह के साथ-साथ दर्जनों संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कैंडिल मार्च के बाद कैंडल दोनों दिवंगतों के फोटो के आगे समर्पित करते हुए महिलाएं फफक फफक कर रोने लगी। महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों की आंखे भी नम हो गई। आंख में आँसू तथा मन में हत्याकांड का खुलासा चारो तरफ यही दिख रहा था।





