बागेश्वर में पंचायत चुनावों की अधूरी कड़ी

विपिन जोशी, संपादक स्वर स्वतंत्र

बागेश्वर में पंचायत चुनावों की अधूरी कड़ी: दो महीने बाद भी शेष सदस्यों का इंतजार, विकास कार्य ठप

बागेश्वर, तीनों विकासखंडों में पंचायत चुनावों के बाद भी ग्राम पंचायत सदस्यों के शेष पदों पर चुनाव नहीं हो सके हैं। उत्तराखंड में कुल 33,114 ग्राम पंचायत सदस्यों के पदों पर उपचुनाव होने बाकी हैं, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से 15 अक्टूबर तक जारी होनी वाली अधिसूचना अब तक लंबित है। दिवाली के तुरंत बाद नई अधिसूचना जारी होने की उम्मीद थी, मगर अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है। इस देरी से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि अधूरी कार्यकारिणी के बिना प्रधानों को वित्तीय अधिकार तक नहीं मिल पा रहे हैं।

बागेश्वर जनपद में 405 ग्राम पंचायतों में से 272 में अभी भी दो तिहाई से अधिक वार्ड सदस्यों के पद रिक्त हैं। गरुड़ विकासखंड के 51 ग्राम सभाओं में तो एक भी ग्राम पंचायत सदस्य नहीं चुना गया है। इन पंचायतों के नवनिर्वाचित प्रधानों का शपथग्रहण भी लंबित है, जिसके चलते ग्राम स्तरीय कार्यकारिणी का गठन नहीं हो सका। परिणामस्वरूप, विकास योजनाओं के प्रस्ताव पास नहीं हो पा रहे और प्रधान वित्तीय अधिकारों से वंचित हैं। बीते 31 जुलाई को मुख्य चुनाव के परिणाम घोषित हुए थे, लेकिन 28 अगस्त को आयोजित शपथग्रहण में केवल 133 प्रधान ही शपथ ले सके। बाकी 272 प्रधानों का इंतजार जारी है।

ब्लॉकवार स्थिति भी चिंताजनक है। बागेश्वर ब्लॉक की 182 पंचायतों में से केवल 55 का गठन हुआ, कपकोट की 122 में 28 और गरुड़ की 101 में 50 पंचायतें ही सक्रिय हो सकीं। इस देरी का असर ग्रामीण विकास पर साफ दिख रहा है। आमजन ने वोट देकर चुने गए प्रतिनिधियों से विकास की उम्मीद की थी, लेकिन अधूरी पंचायतें योजनाओं को पटरी पर नहीं ला पा रही। सवाल उठता है कि लगभग दो माह बीत जाने के बाद भी अधिसूचना क्यों नहीं जारी हो रही? क्या इस प्रशासनिक सुस्ती का खामियाजा ग्रामीण ही भुगतेंगे? अधूरी कार्यकारिणी को पूर्ण करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है—राज्य निर्वाचन आयोग की, जिला प्रशासन की या पंचायती राज विभाग की?

जिम्मेदारों की जुबानी: देरी पर सफाई, लेकिन कोई ठोस समय सीमा नहीं

इस मुद्दे पर जिम्मेदारों से बातचीत में देरी के कारण तो बताए गए, मगर स्पष्ट समयसीमा का अभाव दिखा।

ए डी ओ पंचायत, गरुड़ (कैलाश गिरी) ने स्थिति को स्वीकार करते हुए बताया कि अधिसूचना जारी नहीं हुई है। आयोग के निर्देशों का इंतजार है। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना दिवस के बाद संभावना दिख रही है।

गरुड़ विकासखंड के अयारतोली ग्राम पंचायत के प्रधान कैलाश पवार ने निराशा जताते हुए कहा, “चुनाव जीतने के बाद दो महीने से शपथ का इंतजार कर रहे हैं। गांव में सड़क और पानी की योजनाएं अटकी हुई हैं। ग्रामीण परेशान हैं, लेकिन हम बेबस हैं। जल्द अधिसूचना जारी होनी चाहिए, वरना विकास रुक जाएगा।

ब्लॉक प्रमुख गरुड़ ने भी चिंता व्यक्त की, “यह देरी पूरे ब्लॉक के विकास को प्रभावित कर रही है। आयोग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

पंचायती राज विभाग के अनुसार, नामांकन की कमी, कोरम न पूरा होना और अदालती मामलों के कारण यह स्थिति बनी। राज्य स्तर पर 4,843 पंचायतें प्रभावित हैं, जिसमें बागेश्वर की 272 शामिल हैं।

विभाग ने उपचुनाव की नई तिथियां प्रस्तावित की हैं, लेकिन आयोग की मंजूरी का इंतजार है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीणों में चुनावी भागीदारी बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी देरी न हो।