ट्रक संचालक मुश्किल में

 

विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र 

ट्रक ऑपरेटर्स की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं। उत्तराखण्ड बागेश्वर में खड़िया खनन बंद होने से जिले के ट्रक संचालक खासा परेशान हैं। ट्रक संचालकों के सामने दोहरा संकट पैदा हो गया है। खड़िया बंद होने के साथ नैनीताल हाई कोर्ट के आदेशानुसार रेता उठान पर भी रोक लगी है। साथ में स्टोन क्रेशर भी ठप्प पड़े हैं ऐसे में ट्रक संचालक ट्रक वाहन चालकों को वेतन कहां से दें ? एक साथ कई हजार घरों की रोजी रोटी पर संकट आन पड़ा है। ट्रक संचालकों का कहना है कि गाड़िया खडी हैं तो बैंक की किश्त निकालनी भी कठिन है। अगर जल्दी ट्रक संचालकों के हक में फैसला नहीं आता है तो उनकी आर्थिक स्थिति और चिंतनीय हो सकती है।

इस मामले पर देव भूमि ट्रक ऑनर्स वैलफेयर एसोशिएसन लगातार सरकार से गुहार लगा रही है। मामला कोर्ट में है याचिका पर सुनवाई जारी है और जारी है ट्रक संचालकों का संघर्स इसी संबंध में बीते दिनों ट्रक संचालन देव भूमि ट्रक ऑनर्स वैलफेयर एसोशिएसन के बैनर तले पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड/पूर्व राज्यपाल महाराष्ट्र भगत सिंह कोश्यारी से मिले और एक ज्ञापन कोश्यारी को सौंपा। ज्ञापन में ट्रक संचालकों ने भगत सिंह कोश्यारी के सामने अपनी समस्या साझा की और कहा कि उनको इस मुश्किल दौर में सरकार की ओर से आर्थिक सहायता की दरकार है। यूनियन के अध्यक्ष दिनेश बिष्ट ने स्थिति की भयावहता को स्पष्ट करते हुए कहा कि ट्रक संचालक वाहन चालकों का वेतन नहीं दे पा रहे हैं, गाड़ियों का रख रखाव खर्च चलाना भी कठिन हो रहा है। ऐसे में तुरंत राहत के तौर पर हाई कोर्ट में ट्रक संचालकों की ओर से एक जनहित याचिका लगवानी होगी। सभी ट्रक संचालक इस बिन्दु पर विचार कर सकते हैं। क्योंकी मामला कोर्ट में लंबित है अतः भगत सिंह कोश्यारी के समक्ष मांग रखी गई कि महाधिवक्ता उत्तराखण्ड सरकार हाईकोर्ट के समक्ष स्थानीय लोगों और ट्रक संचालकों के रोजगार को ध्यान में रखते हुए कोर्ट के समक्ष उक्त परेशानी को सम्मलित करवाएं।

मुद्दा गंभीर है, पर्यावरण से जुड़ा है। प्रभावित क्षेत्र में रोक समझ में आती है परन्तु जो क्षेत्र प्रभावित नहीं है वहां रोक क्यों ? हजारों लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ है इस बात की जिम्मेदारी किसकी होगी ? खड़िया खनन के बहाने बेतहाशा दोहन किसने किया ? क्या सरकार और प्रशासन इस बात से अंजान थे ? किसने जारी किए पट्टे और किस आधार पर ? आज से दो दशक पूर्व हो रहे अवैज्ञानिक दोहन की मॉनीटरिंग क्यों नहीं की गई ? अब ठिकरा ट्रक संचालकों और वाहन चालकों पर फूट रहा है जिसे मानवीय दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है।