विपिन जोशी..

गरुड़ ज्ञानार्जन विद्यालय में हिंदी दिवस के अवसर पर पुस्तक विमोचन
उत्तराखंड पत्रकार एवं साहित्यकार समिति गरुड़ के तत्वाधान में तीन पुस्तकों का विमोचन ।
१, मोहन बाल कहानियां, लेखक मोहन जोशी
२ प्रतीक्षा, काव्य संग्रह, आशा बुटोला
३ जड़ों की छांव, काव्य संग्रह, सुरेन्द्र वर्मा
वरिष्ठ साहित्यकार मोहन जोशी ने कहा कि पितृ पक्ष में अपने पितरों को याद करते हुए पुस्तकों का विमोचन सुखद है। बाल कहानी चालीस बाल कहानियों का संग्रह है।
सुरेंद वर्मा, जड़ों का छांव समर्पित है संघर्ष भरे जीवन को उन बुजुर्गों को जिनका जीवन आश्रमों में बीत जाता है। उन्होंने कहा का यह उनकी दूसरी किताब है। अभी दर्जन भर किताबें प्रकाशित होनी हैं। सभी का स्नेह मिल रहा है।
आशा बुटोला, प्रतीक्षा काव्य संग्रह, यह मेरी दूसरी किताब है काफी समय से प्रतीक्षारत किताब आखिर आज प्रकाशित हुई है। 54 कविताएं संग्रहित हैं। नारी शक्ति और स्थानीय मुद्दों को कविताओं के माध्यम से उकेरने की कोशिश की है।
गोपाल दत्त भट्ट ने कहा कि कविता लिखना अच्छी बात और उससे भी अच्छी बात है कविता में शक्ति होना। गोपाल दत्त भट्ट ने अपनी पुरानी कविता पसीने का वाचन किया। सरकार सारे राज काज हिंदी में क्यों नहीं करती।
सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए।शिक्षक डॉ गोपाल कृष्ण जोशी ने कहा कविताओं का स्तर और मजबूत होना चाहिए। चरण वंदना करने वाले कवि भी साहित्य को पलीता लगा रहे हैं। कविता में ताकत और शब्दों में शक्ति होगी तो काव्य हृदय में स्थान बनाएगा।
सेंट एडम्स पब्लिक स्कूल गरुड़ प्रबंधक जावेद सिद्दीकी ने कहा कि कत्यूर घाटी की भूमि साहित्यकारों की भूमि है। नवोदित रचनाकारों को लेखन की प्रेरणा देने वाले मोहन जोशी और गोपाल दत्त भट्ट जी की रचनाओं को अपने विद्यालय की असेंबली में साझा करने की बात भी कही।
हिंदी दिवस पर कार्यक्रम अध्यक्ष रतन सिंह किरमोलिया ने कहा दिवस मना कर हिंदी मजबूत नहीं होगी। आजादी के सात दशक से भी ज्यादा समय हो गए हैं हम अभी भी हिंदी दिवस मनाने पर तुले हैं। दिवस मनाने के साथ भाषा को अपना बनाना होगा।
मौजूद रहे गोपाल दत्त भट्ट, मोहन जोशी, जावेद सिद्दीकी, हरीश जोशी, रतन सिंह किरमोलिया, आशा जोशी, प्रेमा भट्ट, अनिल पांडे, चंद्र शेखर, डॉ हेम चंद्र दूबे, डॉ गोपाल कृष्ण जोशी, आशा बुटोला, त्रिलोक बुटोला, डॉ गिरीश अधिकारी, मनोज खोलिया, सुरेंद वर्मा।





