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धराली के बाद अब थराली : आपदा

विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र

उत्तरकाशी धराली के बाद चमोली थराली हुआ बरसाती आपदा का शिकार। तीन मौतों की पुष्टि रेस्क्यू टीम खोज बीन और बचाव में जुटी है।

छह घायलों को हैलीकॉप्टर से एम्स ऋषिकेश भेजा गया है। आपदा की जद में आ चुके परिवारों के सामने अब आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। दर्जनों दुकानें मलवे में दब गई, घर जमींदोज हो गए, मवेशी भी मलवे में दब गए है। सड़के क्षतिग्रस्त हैं, नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू में हालिया आपदाओं ने हिमालयी क्षेत्र में विकास के समूचे मॉडल पर बड़ी सवाल खड़े कर दिए हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उक्त आपदाओं की समीक्षा होने लगी है। केदार नाथ आपदा के बाद धराली फिर थराली की तबाही बड़े संकेत देती है कि चेत जाओ नदी के किनारे बड़े निर्माण मत करो। जितनी भी आपदाएं अभी तक आई हैं उनमें नदी के किनारे बसे इलाके सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। पानी के साथ बह कर आया मलवा नुकसान का बड़ा कारण बन रहा है। केदार नाथ आपदा भी झील के टूटने से हुई और धराली की आपदा में ग्लेशियर पर झील के टूटने से हुई। बढ़ती भौगोलिक अस्थिरता और ग्लोबल वार्मिंग हिमालय में एवलांच और उससे उपजी आपदा के रूप में कहर बन कर सामने आती है।

आखिर नगरीय सभ्यता के लोभ में धराली में नदी के किनारे बसने की होड को सरकारों ने भी आंख मूंद कर इजाजत क्यों दे दी। पूर्व की आपदाओं से सबक लिया होता तो धराली त्रासदी में इतना जान माल का नुकसान नहीं होता।

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