उत्तराखंड में शिक्षकों की हड़ताल से स्कूलों में चाक डाउन बच्चों की पढ़ाई पर संकट
विपिन जोशी…
अल्मोड़ा/बागेश्वर, 21 अगस्त 2025: उत्तराखंड के स्कूलों में 5 सितंबर तक पढ़ाई ठप रहने की आशंका है, क्योंकि राजकीय शिक्षक संघ ने बड़े स्तर पर चॉक डाउन और कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। अल्मोड़ा और बागेश्वर में इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ मिड-डे मील, खेल, संगीत, विज्ञान और पुस्तकालय जैसी गतिविधियां भी पूरी तरह बंद हैं। गेस्ट टीचर्स भी इस हड़ताल में शामिल हैं, जिससे स्कूलों में गतिविधियां संचालित करने वाला कोई नहीं बचा।
हड़ताल का शेड्यूल और प्रदर्शन
शिक्षक संघ ने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है। 25 अगस्त को गरुड़ खंड कार्यालय, 27 अगस्त को जिला कार्यालय और 29 अगस्त को मंडल कार्यालय में शिक्षक पूर्ण कार्य बहिष्कार के साथ प्रदर्शन करेंगे। 18 अगस्त से शुरू हुए इस चॉक डाउन में सभी प्रभारी प्रधानाचार्य डाक परीक्षण भी बंद कर चुके हैं।
क्यों उठा आंदोलन?
राजकीय शिक्षक संघ लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत है। इनमें विभागीय सीधी भर्ती का विरोध, सभी स्तरों पर शत-प्रतिशत पदोन्नति, स्थानांतरण और अन्य मांगें शामिल हैं। गरुड़ ब्लॉक अध्यक्ष डॉ. हरेंद्र रावत ने बताया कि कई बार वार्ताओं और आश्वासनों के बावजूद शिक्षकों की मांगें पूरी नहीं हुईं। 10 अगस्त 2025 को हुई ऑनलाइन मीटिंग में प्रांतीय कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से चॉक डाउन और कार्य बहिष्कार का फैसला लिया।
ब्लॉक मंत्री राहुल खुलवे ने दी जानकारी
उन्होंने बताया कि जिला प्रशिक्षण संस्थान, जिला परियोजना कार्यालय, विद्या समीक्षा केंद्र आदि सभी जगह संघ के सदस्य कार्य बहिष्कार में शामिल हैं। सभी सदस्यों को अपने संस्था अध्यक्ष को पत्र जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, संघ विरोधी गतिविधियों में शामिल होने वाले सदस्यों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
अभिभावकों की चिंता बढ़ी
हड़ताल के कारण बच्चों की पढ़ाई पर गहरा असर पड़ रहा है। अभिभावक असमंजस में हैं कि बच्चों को पढ़ाई के लिए कहां ले जाएं। स्कूलों में खेल, संगीत और अन्य गतिविधियां ठप होने से बच्चों का सर्वांगीण विकास भी प्रभावित हो रहा है। सवाल उठ रहा है कि क्या अभिभावकों को खुद बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी?
गहराती समस्या
बाहर से सामान्य दिखने वाली यह हड़ताल अकादमिक और आंतरिक स्तर पर गंभीर समस्या बन रही है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार की उदासीनता के चलते यह कदम उठाना पड़ा। यदि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन और तेज हो सकता है।
क्या होगा बच्चों का भविष्य?
जब स्कूल ही बच्चों के लिए बंद होंगे, तो शिक्षा का भविष्य क्या होगा? यह सवाल हर अभिभावक और समाज के सामने खड़ा है। सरकार और शिक्षक संघ के बीच जल्द समाधान की उम्मीद की जा रही है, ताकि बच्चों की पढ़ाई पटरी पर लौट सके।





