उत्तरकाशी, धराली में भारी तबाही

तहसील भटवाड़ी, थाना हर्षिल, उत्तरकाशी में आज 5 अगस्त को प्रातः 1: 50 बजे खीर गंगा में बादल फटने से अचानक भारी तबाही के मंजर ने सबको दहला दिया। पास के ग्रामीणों ने आवाज देकर, हल्ला मचा कर ग्रामीणों को बचाने की कोशिश जरूर की लेकिन एक पल में भयानक सैलाब ने सब कुछ लील लिया। जान माल के भारी नुकसान की खबर विभिन्न यूट्यूब चैनलों से आ रही है। गंगोत्री से महज बीस किलोमीटर पहले आई उक्त आपदा में अच्छा खास एक कस्बा धराली इतिहास बन गया। बाजार क्षेत्र में दौड़ते भागते लोगों ने कल्पना भी नहीं की होगी कि किसी पल उनकी जिंदगी और वर्षों की मेहनत से कमाई हुई प्रापर्टी ऐसे एक दिन पानी में समा जाएगी।

प्राकृतिक आपदा बनाम मानव जनित आपदा का यह अध्याय कब बन्द होगा? लगातार आती आपदाओं से भी उत्तराखंड सरकार सबक क्यों नहीं लेती वर्ष 2013 में केदार नाथ आपदा से सबक नहीं लिया इसके बाद आपदाएं कम नहीं हुई हैं, अपेक्षाकृत बढ़ी हैं। विकास के नाम पर उत्तराखंड के नाजुक पहाड़ों के साथ जिस प्रकार का बलात व्यवहार किया जा रहा है वह क्षमा योग्य नहीं है। आखिरकार विगत दो दशकों में भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं से बेतहाशा नुकसान क्यों हो रहा है ? इसके पीछे अनियंत्रित अवैज्ञानिक प्राकृतिक दोहन तो नहीं । पहाड़ों का सीना चीर नदियों को पाट विकास की पटकथा लिखने वाले विकास के पीछे छिपे विनाश को क्यों नहीं देख पाते होंगे यह एक गम्भीर सवाल है। आज केदार आपदा के बाद धराली, उत्तरकाशी में तबाही आई है। लेकिन इस तबाही को प्राकृतिक आपदा का चोला पहना कर पुनः विकास और दोहन को ही मजबूत किया जाएगा। समाधान क्या होगा , कैसे आपदा ग्रस्त नुकसान को कम किया जा सकता है इस ओर ध्यान केंद्रित करना जरूरी हैं।

उत्तरकाशी आपदा के जान माल की क्षति का आकलन देर सवेर पता चल ही जाएगा। सभी मृतकों को श्रद्धांजलि और उनकी आत्मिक शांति के लिए प्राथना करते हैं।

विपिन जोशी, गरुड़