*इन कालनेमि का क्या सरकार
वरिष्ठ पत्रकार हरीश जोशी का आलेख
उत्तराखंड में इन दिनों कालनेमि खासा चर्चित हो रहा है। वजह ये है कि छद्म वेशधारी बहुरूपिए बाबाओं की धरपकड़ के लिए सरकार के स्तर पर बाकायदा एक अभियान छेड़ा गया है।अभियान का असर आंकलन से पूर्व ये जानना भी जरूरी है कि कालनेमि कौन था?
कालनेमि हिंदू पौराणिक कथाओं में एक शक्तिशाली असुर (राक्षस) था। वह रामायण और महाभारत दोनों में विभिन्न रूपों में दिखाई देता है। रामायण में, वह मारीच का पुत्र और रावण का मामा था, जिसे हनुमान को रोकने के लिए भेजा गया था. महाभारत में, वह एक शक्तिशाली असुर था जिसे भगवान विष्णु ने तारकामय युद्ध में मारा था. बाद में, वह कंस के रूप में पुनर्जन्म लेता है, जिसे कृष्ण ने मार डाला।
कहने का तात्पर्य है कि छद्म वेश से छद्म गतिविधियों में लगे लोगों को कालनेमि की श्रेणी में रखा जा सकता है।
और उत्तराखंड की हकीकत बयां करती है कि यहां कदम कदम पर कालनेमि भरे पड़े हैं सिर्फ बाबाओं के पकड़े जाने से जो व्यवस्था सुधरने की उम्मीद सरकारी स्तर पर आंकी जा रही है उस पर तो बट्टा लगा रहे हैं यहां सरकारी पदों पर बैठे पड़े असंख्य कालनेमि। जिनकी मोटी तनख्वाह के लिए दायित्व कुछ और है परन्तु उसकी आड़ में कालनेमि बन न केवल मोटा माल काटा जा रहा है बल्कि अपने दायित्वों से मुंह मोड़कर जनता से भी खिलवाड़ किया जा रहा है।
सरकारी सिस्टम में इस तरह के कालनेमि कदम कदम पर मिल जाते हैं।सरकारी चिकित्सक ड्यूटी तो सरकार की बजा रहे हैं और नॉन प्रैक्टिस अलाउंस के बाद भी निजी अस्पताल और क्लिनिकों में प्रेक्टिस कर रहे हैं। यही नहीं सरकारी केंद्रों में इलाज हेतु आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को उनकी खुद की क्लिनिक और अस्पताल में इलाज का झांसा देकर वहां का रास्ता दिखाना आम हो गया है।चिकित्सक ही नहीं चिकित्सा व्यवसाय से सम्बद्ध सभी प्रोफेशनल समानांतर निजी व्यवसाय खोले बैठे हैं।
अभी हालिया दो दिन पूर्व बागेश्वर जनपद के कांडा क्षेत्र का मामला सामने आया है मेडिकल स्टोर में छापे मारी हुई और बिना लाइसेंस के दवा बेचना और मरीजों को देखने की घटना भी सामने आई।
शिक्षा में भी बड़े लेवल पर घाल मेल सामने आए हैं स्कूलों के शिक्षक छात्रों पर ट्यूशन और कोचिंग का दबाव बनाकर उन्हें उस ओर मोड़कर माल कमा रहे हैं।अधिकांश सरकारी मुलाजिम अपने परिजनों के नाम बीमा,बैंकिंग,बचत की एजेंसियां खुद संचालित कर रहे हैं। राजनीति भी कहां कालनेमियों से बची है वहां रात दिन चेहरे बदलते रहना ट्रेडिंग भी कर रहा है और जरूरी जैसा भी हो गया है।
रेता बजरी से लेकर बहुमूल्य खनिजों तक के पट्टे,,शराब के ठेके और शराब बार के व्यवसाय में सरकारी मुलाजिमों की परिजनों के नाम से परोक्ष भागीदारी व्यवस्था का एक बड़ा कालनेमि संस्करण है,सवाल उठता है कि क्या सरकार और उसकी जांच एजेंसियां इन बेतहाशा कालनेमियों को रोके जाने हेतु भी कुछ करेगी या सिर्फ बाबाओं के नाम के कालनेमि अभियान से ही अपनी पीठ खुद थपथपाती रहेगी।





