वन दरोगा कैलाश पांडे कहाँ हैं ?

पांडेजी आप इतने निष्ठुर तो नही ही हैं

दूरदर्शन के वरिष्ठ पत्रकार साथी केशव भट्ट का विश्लेषण.
बागेश्वर जिले में वन महकमे में तैनात वन दरोगा कैलाश चंद्र पांडे के अचानक लापता हो जाने से पूरा बागेश्वर स्तब्ध है. उनके परिवार के लिए इतने दिन किसी पहाड़ से कम नहीं रहे हैं. उनकी स्कूटी सकतेश्वर में खड़ी मिली, लेकिन वे खुद अब तक नहीं मिल पाए हैं. यह एक गंभीर चिंता का विषय है. वे जो हर सुबह नई ऊर्जा के साथ मुझसे मिलते थे, गर्मजोशी से मुस्कुराते थे आज उसी आत्मीय चेहरे की एक झलक देखने को आंखें तरस रही हैं. क्या ये संभव है कि वह ऐसे चुपचाप चले जाएं..? नहीं… पांडेजी, आप इतने निष्ठुर तो नहीं हो सकते.
पुलिस अधीक्षक श्री चन्द्रशेखर घोड़के के मार्गदर्शन में पुलिस ने इस मामले को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है. जंगलों में पैदल खोजबीन हो, सरयू नदी किनारे की छानबीन हो, गांव-गांव जाकर पूछताछ हो या पारंपरिक ‘पूछ’ जैसी स्थानीय विधियों से मिले संकेत, हर सूचना, हर संभावना पर कार्य किया जा रहा है. जिस किसी पूछयार ने जो—जो बताया उस पर भी भागादौड़ी कर ही रहें हैं.
लेकिन ऐसे कठिन समय में, बिना तथ्यों के सोशल मीडिया पर किसी संस्था या व्यक्ति को दोषी ठहराना न केवल जांच को प्रभावित करता है, बल्कि उस परिवार की उम्मीदों को भी नुकसान पहुंचाता है जिसे हमारी एकजुटता और समर्थन की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है. इस समय हमें किसी पर दोषारोपण करने के बजाय, दिशा देनी चाहिए ताकि कैलाश पांडेजी सकुशल मिल जाएं. यह समय एकजुटता और इंसानियत का है. पुलिस, परिवार, मीडिया और समाज मिलकर ही इस अंधेरे को पार कर सकते हैं.
सभी से गुजारिश है कि, यदि किसी को कोई भी जानकारी हो तो तुरंत पुलिस को सूचित करें. पुलिस को सहयोग दें, क्योंकि उनका हर कदम कैलाश पांडे जी को खोजने के लिए ही है.