चुनावी तड़का
चुनावी हलचल 2027: बागेश्वर, कपकोट और द्वाराहाट में किसकी मजबूत होगी बिसात?
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनावों में अभी समय बाकी है, लेकिन कुमाऊं की हॉट सीटों पर सियासी पारा चढ़ने लगा है। बागेश्वर, कपकोट और द्वाराहाट सीटों पर राष्ट्रीय दलों के अंदरूनी समीकरण और नए-पुराने चेहरे आमने-सामने आने लगे हैं।
बागेश्वर विधानसभा: नए चेहरों की दस्तकत और कांग्रेस का द्वंद्व
बागेश्वर सीट पर राजनीतिक दलों की आंतरिक खींचतान खुलकर सामने आ रही है:
भाजपा में नौकरशाही का तड़का: चर्चाएं गर्म हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के करीबी एक प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) अपनी नौकरी छोड़ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। वहीं, गरुड़ क्षेत्र से एडवोकेट जे.सी. आर्या का नाम भी दावेदारों की कतार में मजबूती से देखा जा रहा है।
कांग्रेस की राह आसान नहीं: बागेश्वर में उपचुनाव जीत चुके बसंत कुमार की दावेदारी भले मजबूत मानी जा रही हो, लेकिन टिकट की राह एकतरफा नहीं है। पार्टी के भीतर से ही बालकृष्ण और गरुड़ के सक्रिय कार्यकर्ता प्रकाश कोहली ने दावेदारी ठोककर पार्टी हाईकमान की चुनौती बढ़ा दी है।
कपकोट विधानसभा: पुराने सिपहसालार बनाम नए दावेदार
कपकोट में मुकाबला इस बार और अधिक कड़ा होने के आसार हैं:
भाजपा का आंतरिक मुकाबला: मौजूदा विधायक सुरेश गड़िया के साथ-साथ संगठन के कई स्थानीय नेता अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं।
कांग्रेस का समीकरण: पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण का नाम सबसे आगे चल रहा है, लेकिन क्षेत्र में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का बढ़ता दबाव चुनाव को दिलचस्प बना रहा है।
द्वाराहाट विधानसभा: आमने-सामने की सीधी जंग
द्वाराहाट की जमीन पर पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता साफ दिख रही है:
भाजपा: पूर्व विधायक महेश नेगी अपने जनाधार और समर्थकों के भरोसे टिकट की रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं।
यूकेडी: उत्तराखंड क्रांति दल के पुष्पेश त्रिपाठी का असर फिलहाल सुस्त दिख रहा है, जिससे यहां मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रहने की पूरी उम्मीद है।
बड़ा सवाल: क्या दोनों मुख्य दल जमीनी कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलकर उन्हें प्राथमिकता देंगे, या फिर ‘पैराशूट उम्मीदवारों’ को उतारकर एक बार फिर असंतोष का जोखिम उठाएंगे? इसका फैसला आने वाला समय ही करेगा।


















