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वेतन वृद्धि पर आंगन वाडी की हुंकार

मानदेय वृद्धि और सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर उत्तराखंड में गरजीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, उग्र आंदोलन की चेतावनी
स्वर स्वतंत्र न्यूज़ | विपिन जोशी उत्तराखंड संवाददाता, गरुड़,उत्तराखंड
मानदेय नहीं वेतन भोगी बनाओ
उत्तराखंड: राज्य में अपनी विभिन्न मांगों और लंबे समय से लंबित समस्याओं को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का धैर्य जवाब दे गया है। आज आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सेविका और मिनी कर्मचारी संगठन के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने ब्लॉक कार्यालय पर धावा बोला और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व ब्लॉक अध्यक्ष विमला कोहली ने किया।

प्रमुख मांगों का पुलिंदा: मानदेय में वृद्धि पर जोर
प्रदर्शनकारियों ने ब्लॉक प्रशासन के माध्यम से सरकार को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सबसे प्रमुख मुद्दा आर्थिक शोषण को बताया गया है। कार्यकर्ताओं की स्पष्ट मांग है कि • राज्य सरकार: मानदेय में तत्काल प्रभाव से 140 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि की जाए। केंद्र सरकार: राज्य सरकार केंद्र को 150 रुपये प्रतिदिन मानदेय बढ़ाने का ठोस प्रस्ताव भेजे।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में वर्तमान मानदेय ऊँट के मुँह में जीरे के समान है, जबकि उनसे विभागीय कार्यों के अलावा कई अन्य सरकारी सर्वेक्षणों में भी ड्यूटी ली जाती है।

रिटायरमेंट फंड और कटौती पर नाराजगी
प्रदर्शन के दौरान सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली सुरक्षा राशि का मुद्दा भी गरमाया रहा। नीमा गोस्वामी ने कहा कि कार्यकर्ता अपना पूरा जीवन समाज सेवा में लगा देती हैं, लेकिन अंत में उनके हाथ खाली रहते हैं। संगठन ने मांग की है कि:
1. सेवानिवृत्ति पर बिना किसी शर्त और कटौती के 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि दी जाए।2. मानदेय से होने वाली 300 रुपये की मासिक कटौती को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए, जिसे कार्यकर्ता अपने हक पर चोट मान रही हैं।
बायोमेट्रिक प्रणाली का कड़ा विरोध
सरकार द्वारा प्रस्तावित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लेकर भी कार्यकर्ताओं में भारी रोष देखने को मिला। उनका तर्क है कि उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में, जहाँ नेटवर्क की भारी समस्या है, बायोमेट्रिक मशीनें केवल मानसिक दबाव का कारण बनेंगी। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि वे किसी भी कीमत पर इस “डिजिटल दबाव” को स्वीकार नहीं करेंगी।
धरना स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए विमला कोहली ने कहा: अब आगामी रणनीति: ‘आर-पार’ की लड़ाई की होगी ।
हम लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार हमारी अनदेखी कर रही है। अब यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है। अगर हमारी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो पूरे प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों पर तालाबंदी कर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।”

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में सेविकाएं और मिनी कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर संकल्प लिया कि जब तक शासनादेश जारी नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
lराज्य में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत हजारों कार्यकर्ताओं की इस हड़ताल से आने वाले दिनों में टीकाकरण और पुष्टाहार वितरण जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

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