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चारधाम यात्रा रूट ‘उपेक्षित’

विपिन जोशी
चारधाम यात्रा का ‘उपेक्षित’ गलियारा—गरुड़-ग्वाल्दम मार्ग की बदहाली
ग्वाल्दम/गरुड़। उत्तराखंड सरकार ‘अतिथि देवो भव:’ के नारों और करोड़ों के विज्ञापनों के साथ चारधाम यात्रा को विश्व स्तर पर प्रचारित कर रही है। ऋषिकेश से बद्रीनाथ और केदारनाथ की चमचमाती ऑल वेदर सड़कें यात्रियों को सुगम यात्रा का भरोसा तो दिलाती हैं, लेकिन कुमाऊं और गढ़वाल को जोड़ने वाली जीवनरेखा—गरुड़-ग्वाल्दम मार्ग—पर पैर रखते ही हकीकत कुछ और ही नज़र आती है।
एक सड़क, दो मंडल और बदहाली का सफर
कुमाऊं के बागेश्वर जिले से गढ़वाल के चमोली जिले को जोड़ने वाला यह एकमात्र प्रमुख हाईवे है। तकनीकी रूप से यह मार्ग कुमाऊं के यात्रियों के लिए बद्रीनाथ धाम पहुँचने का सबसे छोटा और मुख्य रास्ता है। लेकिन आज स्थिति यह है कि इसे “हाईवे” कहना भी शब्द का अपमान लगता है।
• गड्ढे या सड़क? गरुड़ से ग्वाल्दम के बीच डामर उखड़ने लगा है। सड़क में बने गड्ढे न केवल वाहनों को नुकसान पहुँचा रहे है, बल्कि यात्रियों असुविधा भी हो रही है।
• भूस्खलन का डर: कई स्थानों पर सुरक्षा दीवारें न होने के कारण बारिश के मौसम में यह मार्ग रिस्क जोन बन जाता है।
इस मार्ग को भी बद्रीनाथ हाईवे की तर्ज पर चौड़ा और सुरक्षित बनाया जाना चाहिए ताकि भारी बसें और यात्री वाहन बिना जोखिम के निकल सकें।
तानिया बिष्ट, ग्राम बूंगा

अगर सरकार की मंशा सच में कुमाऊं और गढ़वाल के पर्यटन को एक सूत्र में पिरोने की है, तो केवल ‘प्रचार’ से काम नहीं चलेगा। धरातल पर ठोस कदम उठाने होंगे।
पैच वर्क के बजाय पूरी सड़क का नए सिरे से डामरीकरण आवश्यक है। तब पर्यटक भी आयेंगे और यात्रा भी सुरक्षित होगी।

नरेंद्र बिष्ट – ब्लॉक अध्यक्ष गरुड़ कांग्रेस कमेटी

डबल इंजन सरकार यदि चाहे तो सड़कों की स्थिति सुधार सकती है । पहाड़ी रास्तों पर पानी की निकासी की कमी ही सड़क टूटने का मुख्य कारण है, जिसे दुरुस्त करना होगा। गरुड़ और ग्वाल्दम के बीच बुनियादी ढांचा जैसे शौचालय, अच्छे ढाबे और विश्राम गृह विकसित करने होंगे। लेकिन सरकार सारा विकास होर्डिंगों में दिखा रही है।
अनिल नेगी व्यवसाई ग्वाल्दम

जब तक गरुड़-ग्वाल्दम जैसे महत्वपूर्ण लिंक रोड खस्ताहाल रहेंगे, तब तक ‘सुविधाजनक यात्रा’ का दावा अधूरा है। कुमाऊं से आने वाले श्रद्धालु जो बद्रीनाथ दर्शन की इच्छा रखते हैं, उनके लिए यह मार्ग किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। सरकार को चाहिए कि वह विज्ञापनों से इतर इस ‘ग्राउंड ज़ीरो’ की समस्या पर ध्यान दे, ताकि चारधाम यात्रा का लाभ राज्य के दोनों मंडलों को समान रूप से मिल सके।
शिव सिंह बिष्ट,प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना –
चार धाम यात्रा हमारी प्राथमिकता में है। यात्रियों को किसी प्रकार की कोई भी असुविधा नहीं होगी। ग्वाल्दम गरुड़ रूट हेतु ग्रिफ ने निविदाएं आमंत्रित की हैं। केंद्र सरकार से चार करोड़ की राशि स्वीकृत हो चुकी है। शीघ्र टेंडर जारी होगा और सड़क जीर्णोद्धार का कार्य यात्रा सीजन से पूर्व किया जाएगा। इसके साथ अन्य लिंक मार्गों पर भी कार्य शुरू होने वाले हैं।
हीरा सिंह नेगी, सामाजिक कार्यकर्ता

सरकार चाहे तो सड़कों की हालत अवश्य सुधर सकती है। ग्वाल्दम कुमाऊं और गढ़वाल का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। सड़कें ठीक होंगी तो पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। चार धाम यात्रा शुरू होने से पूर्व सरकार को इस सड़क को हालत ठीक करनी चाहिए।

दूरी का गणित: गरुड़ से धामों तक का सफर
बागेश्वर जिले के गरुड़ (बैजनाथ) से उत्तराखंड के चार धामों की अनुमानित सड़क दूरी इस प्रकार है: बद्रीनाथ लगभग 250-270 किमी, केदारनाथ (गौरीकुंड तक) लगभग 280-300 किमी, गंगोत्री लगभग 400-420 किमी, और यमुनोत्री (जानकीचट्टी तक) लगभग 450-470 किमी है।
विपिन जोशी

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