डॉ. प्रीतम सिंह नेगी “उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान” से सम्मानित.
विज्ञान के सूत्रों में, जिसने सत्य को है तलाशा,
गढ़वाली की गूँज में, जिसने पायी अपनी भाषा।
अमस्यारी की धरती पर, जो ज्ञान का दीप जलाते हैं,
वो प्रीतम सिंह नेगी, साहित्य के फूल खिलाते हैं।
तर्क की कसौटी पर, विज्ञान को परखा आपने,
पर मन की कोमल भावनाओं को, शब्दों में रखा आपने।
‘स्यूंण’ की उन कविताओं में, पहाड़ का दर्द झलकता है,
आपकी लेखनी में, संस्कार का दीप दमकता है।
मिला जो गौरव सम्मान आपको, ये माटी का मान है,
साहित्य और शिक्षा जगत का, आप ही अभिमान हैं।
बनी रहे यह सृजन यात्रा, नित नई ऊँचाइयाँ पाएँ,
विद्यालय और देवभूमि को, अपनी प्रतिभा से महकाएँ।
(विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र)

(गरुड़ ): पीएम श्री अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज, अमस्यारी के विज्ञान शिक्षक डॉ. प्रीतम सिंह नेगी को गढ़वाली भाषा एवंसाहित्य के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान हेतु उत्तराखंड सरकार के उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा प्रतिष्ठित “उत्तराखंड साहित्य गौरवसम्मान-2025” से नवाजा गया है। उनकी इस उपलब्धि से विद्यालय सहित पूरे क्षेत्र में हर्ष की लहर है। डॉ. प्रीतम सिंह नेगी ने सिद्धकर दिया है कि विज्ञान यदि तर्क देता है, तो साहित्य जीवन को संवेदना और अभिव्यक्ति की शक्ति प्रदान करता है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य हरीश नेगी ने डॉ. नेगी को बधाई देते हुए कहा कि यह विद्यालय परिवार के लिए अत्यंत हर्ष और गर्व काविषय है। उन्होंने कहा कि एक विज्ञान शिक्षक का साहित्य के क्षेत्र में इतना बड़ा मुकाम हासिल करना यह दर्शाता है कि सृजन कीकोई सीमा नहीं होती।
बीईओ कमलेश्वरी मेहता- यह निश्चित रूप से पूरे क्षेत्र और शिक्षा जगत के लिए गर्व का क्षण है। डॉ. प्रीतम सिंह नेगी जैसे बहुमुखीव्यक्तित्व, जो विज्ञान के साथ–साथ साहित्य की सेवा कर रहे हैं, समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
अभिभावक संघ की अध्यक्षा ममता भाकुनी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “डॉ. नेगी न केवल एक कुशल शिक्षक हैं, बल्कि वेविद्यार्थियों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका सम्मान हम सभी के लिए गौरव की बात है।” पूर्व पीटीए अध्यक्षलक्ष्मण आर्या ने इसे उनकी वर्षों की कठिन मेहनत का प्रतिफल बताया।
डॉ. प्रीतम सिंह नेगी की प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ
डॉ. नेगी ने गढ़वाली भाषा के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके द्वारा रचित कुछ प्रमुख पुस्तकें-
* स्यूंण (गढ़वाली कविता संग्रह): इस संग्रह के माध्यम से उन्होंने पहाड़ की संवेदनाओं को बखूबी उकेरा है।
* गढ़वाली लोक साहित्य और संस्कृति: इस पुस्तक में उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का गहन विश्लेषण मिलता है।
* विज्ञान की समझ (शैक्षणिक लेखन): विज्ञान के जटिल विषयों को सरल भाषा में समझाने हेतु चर्चित।
* (डॉ. नेगी विभिन्न पत्र–पत्रिकाओं में भी निरंतर शोध पत्र और लेख लिखते रहते हैं।)
इस उपलब्धि पर विद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी हैं। डॉ. नेगी ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता–पिता, गुरुजनों और साहित्य के प्रति अपने प्रेम को दिया है।
जीवन वृत
डॉ प्रीतम सिंह नेगी(प्रीतम अपछ्यान्)
पिता- श्री हरेन्द्र सिंह नेगी
माता- श्रीमती सरस्वती देवी
जन्म तिथि- 14/7/1974
स्थाई पता- ग्राम पोस्ट गड़कोट
चमोली
प्रकाशित साहित्य – काव्य – चकोर, प्रीतम सतसई, गीतूँ को बरात मा.
उपन्यास- यकुलांस
हिंदी साहित्य- ध्वनियों के शिखर, मेरी रचना, गाँव के बयान, पर्यावरण(गद्य)





