कत्यूर रामलीला कमेटी में महिलाओं को अवसर

विपिन जोशी ..

कत्यूर राम लीला कमेटी मंचन में इस बार महिलाओं में अभिनय की होड़। सुनयना, कैकई, सुमित्रा, गौरी, पार्वती, मंथरा, मंदोदरी के किरदार में नजर आएंगी महिला पात्र। संध्या तालीम में पहुंच रही हैं महिलाएं और बालिकाएं। रामलीला मंचन में किशोरियों और महिलाओं का प्रतिभाग रंग मंच में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। अल्मोड़ा, नैनीताल, सहित अन्य सांस्कृतिक क्षेत्रों में महिलाएं रामलीला मंचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभातीं आई हैं, इस बार कत्यूर रामलीला कमेटी गरुड़ ने रंगमंच की पारंपरिक स्थानीय सोच को तोड़ कर महिलाओं को अवसर दिया है। कमेटी के इस कदम से महिलाओं सहित किशोरियों को भी मंच से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।

कत्यूर रामलीला मंचन में बालिकाएं सखी की भूमिका निभातीं आई हैं। मंचन शुरू होता है भगवान की स्तुति से , सखियां विभिन्न भजनों से लीला का प्रारंभ करती हैं एक प्रकार से ये सूत्रधार भी होती हैं। यही बालिकाएं आगे चल कर विभिन्न भूमिकाओं में आएं अब इस उद्देश्य का सफलतम स्वरूप महिला पात्रों के रूप में दिख रहा है। आज जो सुनयना, कैकई, सुमित्रा, गौरी की भूमिका में हैं वो कभी सखियों के रूप में राम दरबार से जुड़ी थी।

महिलाओं को अवसर मिले तो वे हर क्षेत्र में उत्तम परिणाम दे सकती हैं।

कत्यूर रामलीला कमेटी के निर्देशक नीरज पंत ने बताया कि लगभग सौ से ज्यादा वर्षों तक रामलीला मंचन को कत्यूर घाटी में जीवित रखने का श्रेय कत्यूर रामलीला कमेटी, आदर्श रामलीला कमेटी गरुड़, रामलीला कमेटी बनतोली को जाता है। जनता का सहयोग ही है जिसके आधार पर बहुत सी कमेटियों ने अपने पक्के मंच बना लिए हैं।

जब जब कत्यूर घाटी में रामलीला का जिक्र होगा तब तब कुछ नाम सबकी जुबा पर सहज ही आयेंगे।

स्व. धन गिरी गोस्वामी, स्व. गोपाल दत्त भट्ट, स्व . जगदीश रावत, स्व. मदन मोहन जोशी, स्व. शंकर सिंह, स्व .हरचन सिंह नेगी, स्व. मोहन सिंह रावत, स्व. नरेश फर्स्वाण, इनके साथ अपनी सेवा राम दरबार को दे रहे कार्यकर्ताओं की फेहरिस्त लंबी है। इस फेहरिस्त में स्व पांडे जी जिन्होंने आदर्श रामलीला कमेटी गरुड़ को मंच हेतु जमीन दान में दी। कत्यूर रामलीला कमेटी को भवन हेतु जमीन दान में देने वालों में प्रमुख हैं नारायण सिंह अल्मियां नौघर, कृष्ण सिंह फर्स्वाण टानीखेत, घनश्याम जोशी सिल्ली, तथा सेवानिवृत जे ई जीवनाल वर्मा जिनकी जमीन में कत्यूर रामलीला कमेटी हर वर्ष मंचन करती है। साथ में कार्यकर्ताओं की लंबी कतार है जो हर वर्ष बढ़ती जाती है। पूर्व विधायक ललित फर्सवान, भुवन पाठक, दयाल गिरी गोस्वामी, नंदन सिंह अल्मिया, संजय फर्स्वाण, गौरी शंकर, अशोक रावत, पुष्कर रावत, जगदीश सिंह बिष्ट, हेम वर्मा, राहुल बिष्ट, नीमा वर्मा, कैलाश बिष्ट, भगवत नेगी, किसन नेगी, नीमा गोस्वामी, कैलाश जोशी, हेम रावत, महेश रावत, दीपक नेगी, दीपक भंडारी, दीपक सिंह, आदि दर्जनों समर्पित कार्यकर्ता हैं जिनकी निस्वार्थ सेवा भाव से मंचन संचालित होता है। कुल मिलाकर रामलीला मंचन परम्परा का वन लाइनर होना संभव नहीं है। आज की चमक दमक वाली रामलीला कभी धान, गेहूं एकत्र कर, पंचलैट के उजाले से शुरू हुई थी। परिवर्तनों की गवाह रंग मंच और आस्था से जुड़ी रामलीला सबको साथ लेकर चल रही है यह बहुत सुखद बात है।