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आस्था और अराजकता : विपिन जोशी

कावड़ियों की अराजकता के बीच आस्था का सैलाब
हरिद्वार में आस्था का सैलाब उमड़ा है। श्रावण मास में माहौल भोलेमयी हो गया है। सोमवार की खास मान्यता होती है। हरिद्वार में हर तरह के कावड़िए दिख रहे हैं। बच्चे, बुजुर्ग, युवा। सब आस्था से लबरेज हों ये जरूरी नहीं। कितनी मेहनत करने के बाद पद यात्रा कर कावड़िए पवित्र गंगा जल को अपने गॉव ले जाते हैं। पुण्य के भागी बनते हैं। लेकिन आस्था की इस भीड़ में बहुत से अराजक तत्व कावड़ यात्रा को बदनाम भी करते हैं। भगुवा वस्त्र धारी इन अराजक तत्वों को उत्तराखण्ड पुलिस इन दिनों अच्छा सबक सिखा रही है। कावड़ यात्रा के दौरान सड़क पर अनियंत्रित भीड़ चलती है। ट्रैफिक भी रेंगता हुआ चलता है। इस भीड़ में यदि किसी कावड़ यात्री को कोई वाहन ओवर टेक कर दे, हल्का छू भर दे तो कावड़ियों का आतंक देखने लायक होता है। एक पटवारी की गाड़ी किसी कावड़ यात्री को हल्का छू जाती है जैसा अक्सर भीड़ में होता है। बस मामूली सी बात पर अराजक कावड़ियों ने पटवारी की गाड़ी तोड़ दी। पटवारी को जान बचाकर भागना पड़ा। मामला पटवारी का था तो पुलिस को एक्शन लेना पड़ा और कुछ अराजक तत्वों को तुरंत गिरफतार किया गया। ऐसे दर्जनों उदाहरण कावड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार और उत्तराखण्ड के बहुत से हिस्सों में देखने को मिल जाते हैं।
कावड़ यात्रा का उद्देश्य मौज मस्ती, डीजे पिकनिक तो नहीं था। अत्यंत कष्ट भरी यह यात्रा आस्था और भक्ति की मिसाल मानी जाती थी, तभी तो मुख्य मंत्री योगी ने कावड़ियों पर पुष्प वर्षा करवाने की परंपरा बनाई। लेकिन अब पुष्प वर्षा के बाद अराजकता से भरे कावड़ियों पर उत्तराखण्ड पुलिस के लट्ठ बज रहे हैं। देर से जागे पर जागे तो। वर्ना कुछ अराजक तत्वों की वजह से पवित्र कावड़ यात्रा बदनाम हो रही थी। प्रशासन को और सख्ती बरतनी चाहिए। ऐसे तत्व जो कावड़ यात्रा को किसी भी रूप में बदनाम करना चाहते हों उनको चिन्हित कर सजा देनी चाहिए। धर्म से खिलवाड़ कर माहौल खराब करने वाले जहां भी हो उन पर इस पूरी यात्रा के दौरान निगाह होनी चाहिए। संविधान भी कहता है भारत के प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान, आयोजन करने का अधिकार है। लेकिन इस अधिकार की आड़ में किसी की धार्मिक भावना से खिलवाड़ कतई बर्दास्त नहीं किया जा सकता।
सरकार को चाहिए कि कावड़ यात्रा में प्रतिभाग कर रहे प्रत्येक यात्री का बकायदा रजिस्ट्रेशन हो। सत्यापन हो और आपराधिक प्रवृति के या नशा पता करने वालों को पवित्र कावड़ यात्रा में शामिल होने से रोका जाए। शिव भोले के नाम पर भजन कीर्तन तो समझ में आता है लेकिन गांजा फूंक सरेआम लट्ठम पेल कहां की धार्मिकता है ? कैसी आस्था है जो आपको सहन शीतलता, विनम्रता की जगह अराजकता और क्रूरता सिखाती है। शिव जी ने तो जन कल्याणा के लिए विषपान किया था। ऐसी महान भक्ति की परम्परा को विनम्रता की परंपरा को महसूस करने का पर्व है कावड़ यात्रा। कावड़ यात्रा का उद्देश्य अराजकता और भय को बढ़ावा देना नहीं है .

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