विपिन जोशी, गरुड़
इन दिनों उत्तराखंड में मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल रहा है। अनिश्चित बारिश और बर्फबारी ने स्थानीय किसानों को कहीं राहत दी है तो कहीं मुश्किलें भी पैदा की हैं। इसका प्रमुख है भूमध्य सागर से उत्पन्न होने वाला पश्चिमी विक्षोभ है, यह विक्षोभ भूमध्य सागर से बनता है और हिमालयी क्षेत्रों की ओर बढ़ता है। सर्दियों में बारिश और बर्फबारी का कारण भी पश्चिमी विक्षोभ है। लेकिन मार्च में भी पश्चिमी विक्षोभ का असर दिख सकता है, जैसा इस बार घटित हो रहा है।
अक्सर जब पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होकर उत्तर-पश्चिम भारत में प्रवेश करता है। जैसे इस बार उत्तराखंड में ऊंचाई वाले इलाकों जैसे बद्रीनाथ, केदारनाथ, औली, मुनस्यारी, कपकोट और चमोली में बर्फबारी तथा मैदानी क्षेत्रों में बारिश देखने को मिली। मौसम विभाग के अनुसार,15-16 मार्च को पश्चिमी विक्षोभ के कारण गरज, बिजली और तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि की संभावना बनी थी। इस अनिश्चितता के पीछे कुछ कारण हो सकते हैं।
पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता: मार्च में आमतौर पर सर्दियाँ कमजोर पड़ने लगती हैं, लेकिन इस साल पश्चिमी विक्षोभ की ताजा लहर ने मौसम को अचानक बदल दिया। हिमालयी क्षेत्र में नमी बनने से, बारिश और बर्फबारी हुई । दूसरा प्रभाव जलवायु परिवर्तन का है, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से मौसम के पैटर्न में अनियमितता बढ़ी है। सामान्यतः मार्च में उत्तराखंड में मौसम शुष्क और गर्म होता है। लेकिन बदलते वैश्विक ताप और हवा के प्रवाह के कारण बारिश और बर्फबारी जैसी घटनाएँ इस महीने में भी देखी जा रही हैं। उत्तराखंड की पहाड़ी भौगोलिक स्थिति पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव को बढ़ाते हैं और नमी से भरी हवाओं को हिमालय से टकराने के लिए मजबूर करती है, तो अनिश्चित बारिश और बर्फबारी होती है। हाल के दिनों में मौसम विभाग ने उत्तराखंड के लिए येलो अलर्ट जारी किया था, जिसमें देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग जैसे जिलों में हल्की बारिश और 3200 मीटर से अधिक ऊँचाई पर बर्फबारी की संभावना जताई गई है। यह बदलाव सर्दियों की कमी को पूरा करने में सहायक होता है, साथ ही यह अनिश्चितता यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए चुनौतियाँ भी पैदा कर रही है।
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