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कांडा में हुंकार: ‘सड़क से संसद तक‘ गूंजेगी पृथक ब्लॉक की मांग, महातपस्या के 5 वें दिन अनशन पर बैठे ग्रामीण
कांडा/बागेश्वर | स्वर स्वतंत्र डेस्क
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कांडा और कमस्यार क्षेत्र में विकास की अनदेखी के खिलाफ जनाक्रोश चरम पर है। पृथकविकासखंड (ब्लॉक) के दर्जे की मांग को लेकर चल रहा ‘महातपस्या कार्यक्रम‘ आज पांचवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों नेदो–टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि हक की यह लड़ाई अब सड़क से शुरू होकरदेश की संसद तक जाएगी।
शुक्रवार को आंदोलन की कमान संभालते हुए हरीश कांडपाल और देवीलाल वर्मा क्रमिक अनशन पर बैठे। कांडा स्थित प्रसिद्धकालिका मंदिर परिसर में आयोजित सभा में वक्ताओं ने क्षेत्र की उपेक्षा पर गहरा रोष व्यक्त किया।
सात दशक बीत गए, सरकारें आईं और गईं, लेकिन कांडा और कमस्यार की किस्मत नहीं बदली। हमें सिर्फ आश्वासन का झुनझुनाथमाया जा रहा है।” — स्थानीय आंदोलनकारी
वक्ताओं ने याद दिलाया कि ब्लॉक की मांग पिछले 7 दशकों से लंबित है, जिससे क्षेत्र का विकास पूरी तरह ठप पड़ा है। दूरी का दंशझेल रहे ग्रामीण,वर्तमान ब्लॉक मुख्यालय दूर होने के कारण ग्रामीणों को छोटी–छोटी प्रशासनिक जरूरतों के लिए लंबी दूरी तयकरनी पड़ती है। उनका पैसा और वक्त दोनों जाया होता है.
प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि जब तक शासनादेश जारी नहीं होता, वे पीछे नहीं हटेंगे।
इस संघर्ष को धार देने के लिए जगदीश लाल वर्मा, हीरा सिंह कर्म्याल, बंशीधर कांडपाल, प्रयाग सिंह भंडारी, मनीष पंत और दिनेशवर्मा सहित भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। नवीन रौतेला, प्रकाश तिवारी, विनोद नगरकोटी और हिमांशु कांडपाल जैसे युवाओं नेभी आंदोलन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की।
कांडा की यह मांग महज एक प्रशासनिक परिवर्तन नहीं, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में लोकतंत्र और विकास की पहुंच का सवाल है। क्यासरकार 70 साल पुराने इस दर्द को समझेगी या आंदोलन की यह आग और भड़केगी?





