10 शिकायतों पर गूंजा असंतोष


विपिन जोशी,गरुड़
तहसील दिवस: 10 शिकायतों पर गूंजा असंतोष, अधिकारियों की बेपरवाही पर उठे सवाल.
उत्तराखंड के गरुड़ तहसील में आयोजित तहसील दिवस पर पुरानी शिकायतों की समीक्षा के दौरान 10 नई शिकायतें दर्ज हुईं। एसडीएम और तहसीलदार ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि शिकायतों के निस्तारण की प्रगति का अपडेट तहसील कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं। लेकिन विभागों के बीच समन्वय की कमी और अधिकारियों की अनुपस्थिति ने सदन में हंगामा मचा दिया। सड़क, पानी, पेंशन जैसी बुनियादी समस्याओं पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
तहसील दिवस की शुरुआत आनंदी देवी (पत्नी कृष्णा, मटेना निवासी) की शिकायत से हुई। दो सप्ताह पहले जनता दरबार में दर्ज पेंशन संबंधी शिकायत का अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। तहसीलदार निशा रानी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया, “कब होगा इसका समाधान? ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
सड़क और बिजली की जर्जर व्यवस्था पर भड़का आक्रोश इस दौरान लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के अधिकारी बिना सूचना के अनुपस्थित रहे, जिससे सदन में असंतोष फैल गया।
एक अन्य सड़क मुद्दे पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के जूनियर इंजीनियर ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। लेकिन तहसील प्रशासन का दावा है कि संबंधित पत्र कार्यालय से भेजा जा चुका था। इस पर सदन में सवाल गूंजा- “विभागों और तहसील प्रशासन के बीच समन्वय क्यों नहीं है?” एसडीएम ने जोर देकर कहा, “अधिकारियों को शिकायतों के अपडेट तहसील में देने होंगे , ताकि दस्तावेजीकरण सहज हो और संचार मजबूत बने।”
20 साल पुरानी सड़क की लड़ाई: भावुक देवेंद्र ने बयां की पीड़ा
सदन का सबसे भावुक पल सिमार-मजकोट-आगरकोट-कुंझाली सड़क मुद्दे पर आया। देवेंद्र कुमार (आगरकोट निवासी) ने तीन किलोमीटर लम्बित सड़क के निर्माण की मांग की, जो एक दशक से लंबित है। उन्होंने बताया ग्रामीण परेशान हैं। सूचना अधिकार के जवाब तक नहीं मिले। बरसात में दो नदियों के बीच 5 किमी अतिरिक्त पैदल चलना पड़ता है। बच्चे-बुजुर्ग परेशान हैं।” 20 साल का डेटा लेकर पहुंचे देवेंद्र भावुक हो उठे। एसडीएम ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए और पूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करने का आदेश दिया। उन्होंने आश्वासन दिया, “तीन माह के अंदर मामले का समाधान कर दिया जाएगा।”
वहीं एक और मामले में चोरसों गांव में एससी समुदाय को पानी न मिलने की शिकायत ने सदन को हिला दिया। जल संस्थान के जूनियर इंजीनियर ने कहा गांव में विवाद चल रहा है “चार सवर्ण परिवार स्रोत से आगे तोक को पानी नहीं दे रहे।” शिकायतकर्ता ने पलटवार किया, “डीएम के निर्देश के बावजूद विभाग सक्षम नहीं।” तहसीलदार ने सख्त लहजे में अधिकारियों से पूछा पूछा, “पानी का प्राकृतिक स्रोत किसी परिवार का कैसे हो सकता है? क्या उन चार परिवारों के घर से पानी मांग रहे हैं ? एसडीएम गरुड़ ने मामले की गहन जांच के आदेश दिए।
एक शिकायतकर्ता ने ओवररेटिंग शराब पर सवाल करते हुए पूछा जागो ग्राहक जागो का क्या मतलब हुआ, आबकारी विभाग पर निशाना साधते हुए गरुड़ में ओवररेटिंग शराब की शिकायत पर हंगामा मच गया। एसडीएम ने बताया, “जिलाधिकारी के निर्देश पर आबकारी विभाग के साथ मिलकर जांच की जाएगी। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।”
तहसील दिवस समाप्त होते हुए एसडीएम ने सभी अधिकारियों को चेतावनी दी कि बेपरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी ग्रामीणों की उम्मीदें अब निस्तारण पर टिकी हैं।

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