गरुड़ सिविल सोसाइटी: 10 वर्षों की प्रेरणादायी यात्रा
विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की खूबसूरत कत्यूर घाटी में यदि आप चक्कर लगाएं, तो एक दिलचस्प आंकड़ा आपका ध्यान खींच सकता है। इस छोटी सी घाटी में 7 बीयर बार और 3 सरकारी शराब की दुकानें पूरी भव्यता के साथ संचालित हो रही हैं! यह बात शायद क्षेत्र में सर्वविदित होगी और हर दूसरे इंसान की ज़ुबान पर होगी। लेकिन इसी घाटी में, समाज की सबसे मुख्य अकादमिक और बौद्धिक जरूरत को पूरा करने वाला एकमात्र साधन ‘गरुड़ सिविल सोसाइटी पुस्तकालय’ भी है—इस बात को भला कितने लोग जानते होंगे?
दस वर्ष पहले कुछ युवाओं के साथ शुरू हुआ गरुड़ सिविल सोसाइटी का छोटा-सा प्रयास आज समाज हित में निरंतर सक्रिय एक सार्थक पहल बन चुका है। इन दस वर्षों में सिविल सोसाइटी ने केवल संस्थागत यात्रा नहीं की, बल्कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, सहयोग और जनभागीदारी को अपने कार्य का आधार बनाया। इसी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है गरुड़ सिविल लाइब्रेरी, जहाँ विद्यार्थियों और युवाओं को अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तथा ज्ञान के लिए सुविधाएँ उपलब्ध कराने का प्रयास निरंतर जारी है।
दस साल पहले
दस वर्ष पूर्व एक छोटे से कमरे में बैठकर समाज और क्षेत्र के लिए कुछ बेहतर करने की चर्चा और विचार-विमर्श से इस सोच का बीजारोपण हुआ था।
आज…
उसी सोच ने आज एक विशाल यात्रा का रूप ले लिया है, जिसमें अनेक साथी, विद्यार्थी और समाज के लोग जुड़ चुके हैं।
उद्घाटन एवं शुरुआती पहल
14 अप्रैल 2016 को प्रसिद्ध समाज सेविका राधा बहन जी के करकमलों से सिविल सोसाइटी गरुड़ कार्यालय का विधिवत उद्घाटन किया गया था।”
जहाँ एक तरफ शाम ढलते ही जाम टकराने की आवाजें गूंजती हैं, वहीं दूसरी तरफ गरुड़-कौसानी रोड पर दिल्ली दरबार पैलेस दर्शानी में सन्नाटे को चीरती हुई पन्नों की सरसराहट सुनाई देती है। यही वह जगह है जहाँ नशे के विकल्प के रूप में ‘ज्ञान का अमृत’ परोसा जा रहा है।
वर्ष 2016 में हाई कोर्ट अधिवक्ता डी. के. जोशी द्वारा स्थापित ‘गरुड़ सिविल सोसाइटी’ उन सुदूर इलाकों में उम्मीद की किरण बनकर उभरी है, जहाँ अक्सर सरकारी सुविधाएँ देर से पहुँचती हैं। दस लोगों से शुरू हुआ संगठन का उद्देश्य आज सीधी-सादी जनता, विद्यार्थियों और श्रमिकों को उनके अधिकारों और संसाधनों से जोड़ना बन चुका है। अब दर्जनों लोग गरुड़ सिविल सोसाइटी के सदस्य हैं।
इसी सोच का हिस्सा है ‘मिशन21’, जिसके तहत संस्थापक डी. के. जोशी ‘व्यसन मुक्त’ सदी का निर्माण करने के लिए एक जन-आंदोलन चला रहे हैं। उनका मानना है कि पढ़ाई, कमाई और आगे बढ़ने की असली आजादी नशे के चक्रव्यूह से मुक्त होकर ही मिलती है।
कत्यूर घाटी की पहली आधुनिक सार्वजनिक लाइब्रेरी
कत्यूर घाटी की यह पहली आधुनिक सार्वजनिक लाइब्रेरी है, जिसे अब गरुड़-कौसानी रोड पर एक नए और सुसज्जित स्वरूप में पाठकों के लिए खोला गया है। यह पुस्तकालय सभी छात्राओं और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए पूर्णतः नि:शुल्क है।
पुस्तकालय की प्रमुख विशेषताएँ:
पढ़ने का अनुकूल माहौल: शांत अध्ययन कक्ष जहाँ युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
मुफ्त सुविधाएँ: हाई-स्पीड इंटरनेट, सभी प्रमुख हिंदी-अंग्रेजी दैनिक अखबार और साहित्य का विशाल संग्रह।
खुले विचार: यह लाइब्रेरी हर उस पुस्तक प्रेमी का स्वागत करती है जो समाज में पढ़ने-लिखने की संस्कृति को जीवित रखना चाहता है।
सहयोग हेतु उठे हाथ
समाज के इस अनूठे प्रयास को मजबूती देने के लिए जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी आगे आए हैं। कुछ सम्मानित नागरिकों ने आर्थिक मदद की, तो कुछ संवेदनशील लोगों ने पुस्तकालय को उपयोगी पुस्तकें भेंट की हैं।
क्या कहते हैं क्षेत्र के लोग?
स्वतंत्र पत्रकार हरीश जोशी:
“कत्यूर घाटी का एकमात्र आधुनिक सुविधाओं से लैस गरुड़ पुस्तकालय पढ़ने-लिखने वाले युवाओं के लिए एक वरदान जैसा है। शराब और बीयर की दुकानों के बीच यह स्थान युवाओं को सही दिशा दे रहा है। यहाँ कुछ युवा तो रोजाना 6 से 8 घंटे तक बैठकर एकाग्रता से अध्ययन करते हैं। प्रतियोगी परीक्षा के छात्रों से लेकर साहित्य के शौकीनों तक को यहाँ फ्री वाई-फाई और अखबारों की बेहतरीन सुविधा मिल रही है।”
डी. के. जोशी (अधिवक्ता, हाई कोर्ट एवं संस्थापक, गरुड़ सिविल सोसाइटी):
“दस वर्ष बीत गए,संकल्प वही है ‘समाज के लिए कुछ करना है।’ गरुड़ सिविल सोसाइटी की इस 10 वर्ष की यात्रा में साथ देने वाले प्रत्येक साथी, सहयोगी और शुभचिंतक का हृदय से आभार।
जहाँ बार और ठेके इंसान को भटकाने का काम करते हैं, वहीं गरुड़ सिविल सोसाइटी की यह लाइब्रेरी युवाओं को उनके सपनों से जोड़ रही है। आज इस लाइब्रेरी से निकलकर क्षेत्र के प्रतिभावान छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी जगह बना रहे हैं। यह पुस्तकालय केवल किताबों का संग्रह नहीं है, बल्कि कत्यूर घाटी में एक खामोश सामाजिक क्रांति का केंद्र बन चुका है!
एक दशक • एक संकल्प • एक सतत यात्रा




















