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​बागेश्वर में गुलदार का खौफ 6 जगह लगे पिंजरे

गरुड़ में डी एफ ओ बागेश्वर प्रकाश चंद्र ने पत्रकार वार्ता में मौजूदा मानव वन्य जीव संघर्ष पर कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष पर वन विभाग सख्त है. गश्त बढ़ी, रेस्क्यू सेंटर और सुरक्षा योजनाओं पर काम शुरू किया है. 

क्षेत्र में लगातार बढ़ती वन्यजीवों की गतिविधियों और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। हाल ही में चौरसो क्षेत्र में स्कूली बच्चों के सामने गुलदार दिखने जैसी घटनाओं के बाद वन प्रभाग ने अपनी सभी रेंज टीमों को अलर्ट पर रख दिया है और प्रभावित इलाकों में निरंतर गश्त के निर्देश दिए हैं।

गुलदार का बढ़ता खौफ और सुरक्षा उपाय पर डी एफ ओ ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि वन अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में गुलदार की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। वर्तमान में क्षेत्र में लगभग छह संवेदनशील स्थानों पर पिंजरे लगाए गए हैं। हालांकि, अभी तक कोई गुलदार पिंजरे में कैद नहीं हुआ है, लेकिन वन कर्मियों की टीम लगातार प्रयासरत है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

विभाग ने स्थानीय नागरिकों से अपील की है :

अंधेरे के समय अकेले बाहर न निकलें।

बच्चों को अकेला न छोड़ें।

जंगल के आसपास समूह (ग्रुप) में ही आवाजाही करें।

सुरक्षा के लिहाज से अपने पास डंडा या सुरक्षा का कोई साधन अवश्य रखें।

जानकारी देते हुए बताया हर जिले में बनेगा वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर, पकड़े गए वन्यजीवों को सुरक्षित रखने और क्षेत्र में समस्या पैदा करने वाले जानवरों से निपटने के लिए राज्य सरकार हर जिले में एक-एक रेस्क्यू सेंटर बनाने पर काम कर रही है। इसके तहत भूमि का चयन कर लिया गया है। प्रस्ताव को जल्द ही प्रशासनिक मंजूरी मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

क्षेत्र में गुलदार के साथ-साथ बंदरों और जंगली सुअरों का आतंक भी एक गंभीर समस्या बना हुआ है। बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग की विशेष टीम लगातार सक्रिय है, जिसे बागेश्वर बाजार और आसपास के क्षेत्रों में तैनात किया गया है।

वहीं, खेती को भारी नुकसान पहुँचा रहे जंगली सुअरों से निपटने के लिए वन विभाग एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है। इस योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक से एक-एक गांव का चयन किया जाएगा। फंड उपलब्ध होने पर इन गांवों को 100% घेराबंदी से कवर किया जाएगा और सुअरों को पूरे झुंड के साथ पकड़कर पुनर्वासित करने के लिए विशेष पिंजरे डिज़ाइन किए जा रहे हैं।

राहत मुआवजा पर जानकारी देते हुए बताया –

वन्यजीवों के हमले में प्रभावित लोगों के लिए राज्य सरकार की राहत नियमावली के तहत मुआवजा तय किया गया है:

साधारण घायल: प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी मिलने पर ₹15,000।

गंभीर घायल: 7 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने पर ₹1,00,000।

मृत्यु होने पर: ₹10,00,000 की अनुग्रह राशि।

पशुधन (गाय, बैल, भैंस, बकरी आदि) की हानि पर भी नियमानुसार मुआवजा तय है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से बागेश्वर वन प्रभाग के अंतर्गत चयनित 100 वन पंचायतों को झाड़ी कटान व सफाई कार्यों के लिए ₹30-30 हजार प्रदान किए जा रहे हैं। कुल ₹30 लाख की यह राशि जल्द ही वितरित की जाएगी ताकि गांवों के आसपास झाड़ियों की सफाई कर वन्यजीवों की छिपने की जगह को कम किया जा सके।

वहीं, नगरीय व ग्रामीण सीमाओं पर झाड़ी कटान को लेकर बने संशय पर डी एफ ओ ने स्पष्ट किया कि आबादी वाले क्षेत्रों के भीतर सफाई का दायित्व स्थानीय निकायों व ग्राम पंचायतों का है, जबकि आरक्षित वन क्षेत्रों से लगी सीमाओं पर विभाग आवश्यकतानुसार कार्य कराएगा।

विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र

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