अल्मोड़ा के पेटशाल में ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ कार्यक्रम आयोजित: किसानों को मिले वैज्ञानिक कीटपालन व विसंक्रमण के गुर.
अल्मोड़ा/पेटशाल:
केंद्रीय रेशम बोर्ड (वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा संचालित राष्ट्रीय वृहद् रेशम प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अभियान ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान’ (MRMA 2.0) के अंतर्गत 21 अगस्त 2026 को जनपद अल्मोड़ा के पेटशाल गांव में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। रेशम विभाग, उत्तराखंड के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “विसंक्रमण एवं स्वच्छता प्रौद्योगिकी” (Disinfection & Hygiene Technologies) रखा गया, जिसमें स्थानीय रेशम कीट पालकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
वैज्ञानिक प्रबंधन और विसंक्रमण तकनीक पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र (RSRS), सहसपुर के वैज्ञानिक-डी एवं प्रमुख डॉ. पवन सैनी ने किसानों को रेशम उत्पादन की बारीकियों और उन्नत तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कीटपालन गृह (Rearing House) और उपकरणों का सही समय पर उचित विसंक्रमण (Disinfection) रोगों से बचाव की पहली शर्त है।
डॉ. सैनी ने रेशम कीटपालकों को निम्नलिखित वैज्ञानिक बिंदुओं से अवगत कराया:
निर्मोचन (Moulting) की पहचान: कीटों की अवस्था में बदलाव के समय सही पहचान और प्रबंधन।
चूना व ‘विजेता’ का प्रयोग: कीटों को नमी और बीमारियों से बचाने के लिए बुझा हुआ चूना और ‘विजेता’ पाउडर का अनुशंसित व सटीक उपयोग।
पर्याप्त वायु-संचार: कीटपालन गृह में उचित वेंटीलेशन और कीटों के बीच सही अंतराल बनाए रखने का महत्व।
पौधरोपण व माउंटिंग: शहतूत (Mulberry) के पौधों का वैज्ञानिक तरीके से रोपण और गुणवत्तापूर्ण कोकून निर्माण के लिए सही माउंटिंग प्रक्रिया।
संवादात्मक सत्र: किसानों की समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट समाधान
कार्यक्रम के दौरान एक विशेष प्रश्नोत्तर व संवाद सत्र का आयोजन किया गया। इसमें पेटशाल क्षेत्र के किसानों ने रेशम कीटपालन में आने वाली अपनी व्यावहारिक और क्षेत्रीय समस्याओं को केंद्रीय रेशम बोर्ड एवं रेशम विभाग के अधिकारियों के समक्ष रखा। अधिकारियों ने किसानों की शंकाओं का समाधान करते हुए उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन दिया और बीमारियों से बचाव के उपाय बताए।
गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य
कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्र में कीट पालकों को पारंपरिक तरीकों के स्थान पर स्वच्छ, रोगमुक्त और आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़ना है। अधिकारियों ने किसानों से आग्रह किया कि वे कोकून की उत्पादकता व गुणवत्ता सुधारने के लिए अनुशंसित स्वच्छता मानकों को अपनाएं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।




















