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गरीबों के निवाले पर डाका डालते ‘आलीशान’ पेट

​”बंगला, गाड़ी और आयकर. फिर भी सरकारी राशन पर टिकी देवभूमि के ‘अमीरों’ की नजर।”

विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र

देवभूमि उत्तराखंड में सिस्टम की सुस्ती और जन-साधारण के जमीर का एक बेहद शर्मनाक सच सामने आया है। तीन महीने तक चले गहन सत्यापन अभियान ने राज्य में राशन वितरण प्रणाली की ऐसी परतें उधेड़ी हैं, जिसने नैतिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में 18,600 से अधिक ऐसे परिवार ‘अपात्र’ पाए गए, जो सालों से गरीबों के हक का सरकारी राशन डकार रहे थे। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने इस गोलमाल पर सख्त रुख अपनाते हुए लगभग 65 हजार अपात्र लोगों से जुड़े इन तमाम कार्डों को निरस्त कर दिया है।

आलीशान गाड़ियां, आयकर दाता… फिर भी मुफ्त के राशन की भूख

​जांच की परतें जैसे-जैसे खुलीं, सच उतना ही कड़वा निकलता चला गया। जो लोग सरकारी मुफ़्त या सस्ते राशन के लिए लाइन में खड़े थे, उनमें से कई आलीशान मकानों के मालिक हैं, दरवाज़े पर चौपहिया वाहन खड़े हैं और बाकायदा इनकम टैक्स भरते हैं। इतना ही नहीं, सरकारी नौकरी मिलने के बाद आय बढ़ जाने और यहाँ तक कि कार्डधारक की मौत हो जाने के बावजूद उनके नाम पर राशन का उठाव जारी था। सवाल यह उठता है कि क्या लोगों की अंतरात्मा पूरी तरह मर चुकी है? यह कौन सी मानसिक भुखमरी है जो एक सक्षम व्यक्ति को किसी बेसहारा और गरीब का हक छीनने पर मजबूर करती है?

कोटा फुल, नए गरीब लाइन में

​राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत उत्तराखंड में अलग-अलग श्रेणियों के लिए कुल 24 लाख राशन कार्डों का कोटा निर्धारित है (गुलाबी- 12 लाख, सफेद- 1.84 लाख, पीला- 10 लाख)। अमीरों और फर्जी लोगों के कब्जे के कारण पिछले कुछ सालों से यह कोटा पूरी तरह फुल चल रहा था, नतीजा यह हुआ कि जिन वास्तविक गरीबों को इस योजना की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वे नए कार्ड बनवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटते रह गए।

​खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के आयुक्त बंशीलाल राणा के मुताबिक, मुख्यमंत्री के निर्देश पर यह कड़ी कार्रवाई की गई है और अब यह सत्यापन अभियान नियमित रूप से चलाया जाएगा। इन फर्जी कार्डों के रद्द होने से अब वास्तव में जरूरतमंद लोगों को उनका हक मिल सकेगा।

कहाँ कितना निकला ‘झोल’: नैनीताल में सबसे ज्यादा गोलमाल

​जांच आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तराखंड के मैदानी और अधिक आबादी वाले जिलों में धोखाधड़ी की यह बीमारी सबसे ज्यादा फैली मिली। नैनीताल जिला इस मामले में सबसे आगे रहा, जबकि पहाड़ी जिला बागेश्वर सबसे ईमानदार निकलकर सामने आया।

जिलावार निरस्त राशन कार्डों का आंकड़ा:

  • नैनीताल: 4,247
  • देहरादून: 2,886
  • उधमसिंह नगर: 1,926
  • पौड़ी गढ़वाल: 1,798
  • हरिद्वार: 1,576
  • पिथौरागढ़: 1,573
  • टिहरी गढ़वाल: 1,515
  • चमोली: 1,063
  • चंपावत: 562
  • अल्मोड़ा: 463
  • उत्तरकाशी: 449
  • रुद्रप्रयाग: 317
  • बागेश्वर: 225

​कार्रवाई तो हो गई, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है—क्या यह सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत से संभव हुआ या समाज में बढ़ती बेशर्मी का नतीजा है? जब तक ऐसे फर्जीवाड़े पर सिर्फ कार्ड रद्द करने की बजाय कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक गरीबों के हक पर डाका डालने वाले यूँ ही बाज नहीं आएंगे।

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