Home » बड़ी खबर » भरसोली में गूंजी ‘रेशम क्रांति’ की हुंकार

भरसोली में गूंजी ‘रेशम क्रांति’ की हुंकार

मुसलाधार बारिश भी न डिगा सकी हौसले: भरसोली में गूंजी ‘रेशम क्रांति’ की हुंकार, 37 किसानों ने सीखे स्वरोजगार के वैज्ञानिक गुर

​विशेष रिपोर्ट: विपिन जोशी | स्वर स्वतंत्र न्यूज़

​भरसोली, स्याल्देह (देघाट): पहाड़ों में जब बारिश जनजीवन की रफ्तार थामने की कोशिश कर रही थी, तब देघाट के भरसोली गांव में ग्रामीण आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार का एक नया अध्याय लिखा जा रहा था। केंद्रीय रेशम बोर्ड के “मेरा रेशम मेरा अभिमान (MRMA 2.0)” राष्ट्रीय अभियान के तहत आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में खराब मौसम की परवाह किए बिना 37 रेशम कृषकों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

​क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र (RSRS), सहसपुर और रेशम निदेशालय, उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय अंचल के किसानों तक उन्नत, वैज्ञानिक और आधुनिक रेशम उत्पादन तकनीकों को सीधे पहुंचाना था।

​शहतूत सिर्फ कीटों का आहार नहीं, आय का बहुउपयोगी जरिया: डॉ. पवन सैनी

​कार्यक्रम की कमान संभाल रहे RSRS सहसपुर के प्रमुख वैज्ञानिक-डी डॉ. पवन सैनी ने किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियों की बारीकियों से रूबरू कराया। उन्होंने बताया कि शहतूत का पौधा बहुउपयोगी है—इसके पत्ते रेशमकीटों का पेट भरते ही हैं, साथ ही यह पौष्टिक पशु आहार भी है। इसके फलों से मूल्यवर्धित उत्पाद बनाकर किसान अतिरिक्त मुनाफा कमा सकते हैं।

​डॉ. सैनी ने फसल को बीमारियों से बचाने के लिए सैनिटेक, डेकॉल और ब्लीचिंग पाउडर के प्रयोग से दो चरणों में विसंक्रमण (Disinfection) करने की सख्त सलाह दी।

​मुख्य आकर्षण और तकनीकी बिंदु:

​उन्नत विसंक्रमण तकनीक: कीट पालन से पहले और बाद में स्वच्छता ही गुणवत्तापूर्ण कोकून उत्पादन की असली कुंजी है।

​वैज्ञानिक-कृषक संवाद: वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं को सुनकर मौके पर ही उनका व्यावहारिक समाधान दिया और सुझाव दर्ज किए।

​सफलता की कहानियां: क्षेत्र के 3 प्रगतिशील रेशम कृषकों की कामयाबी की कहानियों को रिकॉर्ड किया गया, ताकि अन्य ग्रामीण भी प्रेरित हो सकें।

​आधी आबादी को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल

​कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ग्राम प्रधान श्रीमती मीनाक्षी बंगारी को MRMA 2.0 स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने विशेष रूप से गांव की महिलाओं का आह्वान करते हुए कहा कि रेशम उत्पादन महिलाओं के लिए घर बैठे आय अर्जित करने का सबसे सुरक्षित और सशक्त जरिया है।

​इस दौरान रेशम निरीक्षक मनीष रावत, ध्यान सिंह और जगदीश कुमार ने भी कृषकों को रेशमकीट बीज (DFLs) क्षमता बढ़ाने और विभागीय योजनाओं का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। वैज्ञानिकों और किसानों के बीच हुआ यह सीधा संवाद क्षेत्र में रेशम उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का काम करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *