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“मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0”: अल्मोड़ा के दशो ग्राम में जिला स्तरीय हितधारक परामर्श बैठक संपन्न

“मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0”: अल्मोड़ा के दशो ग्राम में जिला स्तरीय हितधारक परामर्श बैठक संपन्न

विपिन जोशी
स्वर स्वतंत्र न्यूज़ रिपोर्ट
अल्मोड़ा, 10 अगस्त 2026:
अल्मोड़ा जिले के दशो ग्राम में केंद्रीय रेशम बोर्ड के महत्वाकांक्षी अभियान “मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0” (MRMA 2.0) के अंतर्गत जिला स्तरीय हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। यह राष्ट्रीय वृहद् रेशम प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अभियान क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र (RSRS), सहसपुर, देहरादून और रेशम निदेशालय, उत्तराखंड के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रेशम कृषकों तक नवीनतम रेशम उत्पादन तकनीकों और विभागीय योजनाओं की जानकारी पहुंचाना, उनकी क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान करना तथा उनकी आय और उत्पादकता में वृद्धि करना था।
प्रमुख उपस्थिति एवं अतिथियों का योगदान
* मुख्य अतिथि: श्रीमती हेमा देवी (ग्राम प्रधान)
* विषय विशेषज्ञ: डॉ. विक्रम कुमार (वैज्ञानिक-सी एवं प्रभारी अधिकारी, पी-3 मूल बीज फार्म, माजरा, देहरादून)
* विभागीय प्रतिनिधि: श्री हिमांशु एवं सुश्री वैशाली (फील्ड डेमोंस्ट्रेटर, जिला रेशम कार्यालय, अल्मोड़ा)
इस बैठक में जिले के 25 से अधिक रेशम कृषकों और हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और वैज्ञानिकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया।
वैज्ञानिक तकनीकों और उन्नत पद्धतियों पर जोर
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र, सहसपुर के डॉ. पवन सैनी (वैज्ञानिक-डी) ने कृषकों को अभियान के उद्देश्यों से अवगत कराया। उन्होंने कृषकों को अपनी रेशमकीट पालन क्षमता बढ़ाने, वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने और गुणवत्तापूर्ण कोकून उत्पादन के लिए प्रेरित किया।
* तकनीकी समाधान और रोग प्रबंधन: डॉ. विक्रम कुमार ने कृषकों के तकनीकी प्रश्नों के उत्तर दिए और बेहतर फसल के लिए वैज्ञानिक पालन पद्धतियों तथा गुणवत्तापूर्ण रेशमकीट बीज के उपयोग पर जोर दिया।
* विसंक्रमण का महत्व: सुश्री वैशाली, फील्ड डेमोंस्ट्रेटर ने रोगमुक्त फसल प्राप्त करने के लिए पालन गृह और उपकरणों के समयबद्ध एवं वैज्ञानिक विसंक्रमण की जानकारी दी।
* विभागीय योजनाएं: श्री हिमांशु, फील्ड डेमोंस्ट्रेटर ने शहतूत पौधरोपण और पालन गृह से जुड़ी विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए बागानों के उचित रखरखाव पर विशेष बल दिया।
कृषकों की समस्याओं पर मंथन और भविष्य की रूपरेखा
बैठक में कृषकों ने शहतूत बागान प्रबंधन, पत्ती उत्पादन, कीट पालन, रोग नियंत्रण और कोकून विपणन से जुड़ी अपनी व्यावहारिक कठिनाइयां साझा कीं। विशेषज्ञों ने इन समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक तकनीकी सुझाव दिए।
यह परामर्श बैठक वैज्ञानिकों, राज्य रेशम विभाग और कृषकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने में बेहद सफल रही। इसमें प्राप्त सुझावों को अल्मोड़ा जिले में टिकाऊ और लाभकारी रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक नई जिला स्तरीय कार्ययोजना का आधार बनाया जाएगा।

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