धैना गांव की मुख्य सड़क बंद, जान जोखिम में डालकर पैदल चलने को मजबूर हैं 180 ग्रामीण
विपिन जोशी गरुड़
- गरुड़ विकासखंड का धैना गांव पिछले कई दिनों से सड़क मार्ग से कटा।
- 180 की आबादी मूलभूत सुविधाओं के अभाव और पलायन की मार झेल रही है।
- एक साल पहले 10 लाख से अधिक लागत से बनी पुलिया दोबारा बही, जनता दरबार की शिकायतों के बाद भी अधिकारियों की उदासीनता बरकरार।
गरुड़ : पहाड़ की पगडंडियां एक बार फिर चीख रही हैं, और इस बार दर्द बयां कर रहा है गरुड़ विकासखंड का धैना गांव। प्रकृति कीखूबसूरती के बीच बसा यह गांव इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाल कनेक्टिविटी के गहरे संकट से जूझ रहा है। धैना मोटरमार्ग पिछले कई दिनों से पूरी तरह बंद है, जिसके चलते इस गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग कट चुका है।
जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर ग्रामीण गांव की कुल आबादी 180 है, जिनकी आजीविका पूरी तरह से कृषि पर निर्भर है। सड़क मार्ग ठप होने के कारण ग्रामीणों कीमुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं। अब उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए चार से पांच किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ रहा है। जबकि मुख्य गरुड़ बाज़ार और स्वास्थ्य सेवाओं हेतु यह दूरी करीब आठ किमी तक हो जाती है।
यह पैदल सफर किसी खतरे से खाली नहीं है। लंबे समय से कम इस्तेमाल के कारण ये पैदल मार्ग अब झाड़ियों में तब्दील हो चुके हैं।एक तरफ जहां जंगली जानवरों का खौफ हर पल ग्रामीणों की सांसें अटकाए रहता है, वहीं दूसरी तरफ लगातार हो रही बारिश के चलते भूस्खलन का खतरा हर कदम पर मंडरा रहा है।
स्थानीय निवासी केवलानंद तिवारी
दर्द साझा करते हुए बताते हैं कि सड़क बंद होने से बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को सबसेज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए बताया:
“सड़क पर बनी पुलिया इस बार पुनः बह गई है। हैरानी की बात यह है कि इसे महज एक साल पूर्व ही 10 लाख 67 हजार रुपये खर्चकरके रिपेयर किया गया था।“
केवलानंद के अनुसार, ग्रामीण इस समस्या को लेकर कई बार ‘जनता दरबार‘ में गुहार लगा चुके हैं, लेकिन विभाग के अधिकारी औरक र्मचारी मौके का महज औपचारिकता भरा मुआयना करके लौट जाते हैं, और ढाक के तीन पात वाली स्थिति जस की तस बनी रहतीहै।
प्रधान लक्ष्मी देवी-
धैना गांव की मुख्य समस्याएं आज भी सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी जरूरतों के इर्द–गिर्द ही घूम रही हैं। ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी कहना है कि धैना इंटर कॉलेज और पूरे गांव का संपर्क मार्ग कई दिनों से अवरुद्ध होने के कारण ग्रामीणों को सड़क सुविधा का कोईलाभ नहीं मिल पा रहा है। आवाजाही के दौरान जोखिम अलग बना हुआ है।बुनियादी सुविधाओं के इस अभाव और विकास की रोशनी से महरूम रहने के कारण गांव पर पलायन का साया भी साफ तौर परदिखने लगा है।
कृष्णा तिवारी, स्थानीय टैक्सी संचालक-
एक साल पूर्व पुलिया क्षतिग्रस्त हुई थी इस बार भी बह गई है लोनिवि ने एक बार भरान किया था। पुलिया नहीं होने से ग्रामीणों की गाड़िया भी गांव के बाहर फसी पड़ी हैं, अराजक तत्व गाड़ियों को नुकसान भी पहुँचा रहे हैं । गांव की लिंक रोड और पुलिया को त्वरित रूप से ठीक करने की आवश्कता है ।
भगवती तिवारी, धैना-
हमारे लिए तो ये सड़क ही एक मात्र रास्ता है , बरसात से सड़क पूरी तरह ध्वस्त है। पेयजल लाइन भी ध्वस्त है, लोगों की टैक्सियां और दुपहिये भी गांव के बीच में अटके हैं । पैदल रास्तों की हालत भी खस्ता है, प्रशासन से निवेदन है सड़क और पुलिया की सुध ली जाए ।
वैभव कांडपाल , एस डी एम गरुड़ – लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से तुरंत सड़क खोलने को निर्देशित किया जाएगा । मामले पर संज्ञान लिया जा रहा है ।
धैना गांव की यह कहानी सिर्फ एक सड़क के बंद होने की नहीं, बल्कि विकास के उन दावों पर बड़ा सवालिया निशान है जो कागजोंमें तो दम भरते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत में पहाड़ के बाशिंदों को हर कदम पर संघर्ष करने के लिए अकेला छोड़ देते हैं। अब देखनायह है कि प्रशासन इस खबर के बाद नींद से जागता है या धैना के लोगों को यूं ही जोखिम भरी जिंदगी जीने पर मजबूर होना पड़ेगा।






















