2027 विधानसभा चुनाव से पूर्व राजनीतिक दलों ने उत्तराखंड में प्रचार अभियान तेज कर दिया है। इन दिनों कांग्रेस पार्टी के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल उत्तराखंड भ्रमण पर हैं। विधानसभा चुनाव में दावेदारी कर रहे उम्मीदवारों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। बागेश्वर से कांग्रेस पार्टी के दो संभावित दावेदार हैं—पहले तेज-तर्रार बालकृष्ण, जो पूर्व में चुनाव लड़ चुके हैं; दूसरे कद्दावर उम्मीदवार हैं बसंत कुमार, जो आम आदमी पार्टी, बसपा और कांग्रेस से चुनाव हार चुके हैं। बसंत कुमार ने पिछले उपचुनाव में बीजेपी की पार्वती दास को कड़ी टक्कर दी थी। दो दिन पूर्व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मंच से बसंत कुमार के टिकट पर आहिस्ता से सकारात्मक संकेत दे ही दिया। खैर, किसका टिकट कटेगा और किसको चुनाव मैदान में उतरने का मौका मिलेगा, यह इंतजार का विषय है और पार्टी हाईकमान का मामला है।

कपकोट की जनसभा में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने एक संकेत और दिया। मंच से उन्होंने महिला शक्ति की ओर भी सांकेतिक ध्यानाकर्षण कराया कि महिला शक्ति भी उत्तराखंड की राजनीति को दिशा दे सकती है। कपकोट से पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश ऐठानी की दावेदारी स्पष्ट रूप से देखी गई है। कपकोट में ललित फर्स्वाण का मकोट भी है तो हरीश स्थानीय हैं। ऐसे में यदि कांग्रेस कपकोट में पार्टी लाइन को साधने में नाकाम रही, तो परिणाम क्या होंगे, यह समझा जा सकता है। इन सभी तथ्यों और दावों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि बागेश्वर की कपकोट और बागेश्वर विधानसभा सीटों में उम्मीदवारों का चयन आसान होगा। नाराज उम्मीदवार सब कुछ भूलकर वापस पार्टी का सहयोग करेंगे या भीतरघात प्रबल होगा?
बहरहाल, कुमाऊँ मंडल की तीन सीटें—क्रमशः द्वाराहाट, बागेश्वर और कपकोट—हॉट सीट बनी हुई हैं। बीजेपी और कांग्रेस खुलकर कुछ भी कहने से फिलहाल बच रही हैं। द्वाराहाट में बीजेपी महेश नेगी पर पुनः भरोसा करेगी या अनिल शाही को मौका मिलेगा? दोनों नेताओं ने द्वाराहाट का मुकाबला रोचक बना दिया है। चुनाव निकट आते-आते वोटर्स का जी भरकर मनोरंजन होने वाला है।
2027 का विधानसभा चुनाव किसी राष्ट्रीय नेता की लहर से प्रभावित होगा या जनता सब कुछ समझकर अपने मुद्दों पर वोट करेगी? यह देखना दिलचस्प होगा।
लेखक: विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र


















