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पर्यावरण बचाने की ग्राम मुहिम : द हंगर प्रोजेक्ट

हंगर प्रोजेक्ट का पर्यावरण संरक्षण अभियान, गांव गांव जाएँगे संदेश पहुँचाएँगे. 

रिपोर्ट-विपिन जोशी

आज गरुड़ विकास खंड के  अमोली, दुदिला क्षेत्र में पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाया गया । दस दिन में  24 पंचायतों तकपर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाया। बढ़ते वैश्विक तापमान और बदलते मौसम तथा पर्यावरण से होने नुकसानो के प्रतिजागरूकता हेतु दस दिवसीय अभियान चलाया जा रहा है।

आज हम अपने आस-पास देखते हैं तो पाते हैं कि पहले की तुलना में हमारा पर्यावरण मतलब कि हमारे आस-पास का वातावरण, मौसम, हवा, पानी, जल, जंगल, जमीन, पेड़-पौधे, जीव-जन्तु की स्थिति बदल रही है जलवायु परिवर्तन हो रहा है। जिसका मुख्य कारण मनुष्य ही है, अपने फायदे के लिए पेड़-पौधों की लगातार कटाई, जंगल को सड़क, खेती या मकान बनाने के लिए उपयोग करने के कारण इसका प्रभाव जलवायु, वातावरण में पड़ रहा है।

पिछले 100 सालों में दुनिया का तापमान बढ़ गया है और लगातार बढ़ता जा रहा है, जलवायु परिवर्तन से बारिश में कमी आ रही है या अति वृष्टि की घटनाएँ बढ़ रही हैं, हिमालय पिघल रहे हैं, जिससे लोगों की आजीविका, खान-पान, फसल उत्पादन, पशुपालन, रहन-सहन व अर्थव्यवस्था के लिए बड़े संकट पैदा हो रहा है।

द हंगर प्रोजेक्ट की पर्यावरण जागरूकता मुहिम : ग्राम अमोली
द हंगर प्रोजेक्ट की पर्यावरण जागरूकता मुहिम : ग्राम अमोली

हमारे जल स्रोत सूखते जा रहे हैं क्योंकि पानी के लिए पाइप लाइन हमारे घरों तक पहुंच गई है जिससे हम अपने पुराने जल स्रोतों, नौलों को छोड़ चुके हैं, उनकी साफ-सफाई, देखभाल नहीं हो पा रही है जो पुराने स्रोत थे वह धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं और हम केवल पाइप लाइन पर/सरकारी योजनाओं पर ही निर्भर हो गये हैं।

जंगलों में हर साल लगने वाली आग से, हमारे हरे-भरे जंगल खत्म हो रहे हैं , पानी के स्रोत सूख रहे हैं, लोगों को शुद्ध हवा, जानवरों के लिए चारा, ईंधन, पिरूल आदि भी नहीं मिल पा रहा है। और गांवों में खेती, पशुपालन भी लगातार कम होते जा रहा है। जंगल खत्म होने से आज जंगली जानवरों के नुकसान से पहाड़ की खेती धीरे-धीरे पूरी तरह नष्ट हो रही है इसका मुख्य कारण है जंगली जानवरों का गाँव की ओर आना, इसका कारण भी मानव है। हमने जंगली जानवरों का खाना और उनका घर अपने फायदे के लिए खत्म कर दिया तो जंगली जानवर गांवों की तरफ भोजन की तलाश में आ रहे हैं और खेती को नष्ट कर रहे हैं । लोग खेती के लिए दिन-प्रतिदिन उदासीन हो रहे हैं और रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। पर्यावरण में हर चीज एक-दूसरे से जुड़ी है, एक के बिना दूसरा घटक अधूरा है।

आज प्लास्टिक भी हमारे पर्यावरण को काफी तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है। प्लास्टिक पदार्थों से उत्पन्न कचरे का निस्तारण काफी कठिन होता है और पृथ्वी पर प्रदूषण में भी इसका काफी अहम योगदान है, यह पूरे विश्व की चिंता का विषय बन रहा है। प्लास्टिक बैगों, बर्तनों और फर्नीचर के बढ़ते इस्तेमाल के वजह से प्लास्टिक के कचरे में काफी वृद्धि हुई है, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण जैसी भीषण समस्या उत्पन्न हो गई है।

क्योंकि अब हम इनके उपयोग के आदि हो चुके हैं तथा यह काफी सस्ते भी है, इसलिये हम इनके उपयोग को पूरी तरह से बंद नहीं कर सकते हैं। हालांकि हम उन प्लास्टिक उत्पादों के उपयोग को आसानी से बंद कर सकते हैं, जैसे कि उदाहरण के लिये, बाजार से सामान खरीदते समय हम प्लास्टिक बैग के जगह हम जूट कपड़े या पेपर से बने बैगों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ठीक इसी तरह पार्टियों और उत्सवों के दौरान हम प्लास्टिक के बर्तन और अन्य सामानों के उपयोग के जगह हम स्टील, कागज, थर्मिकोल या अन्य उत्पादों से वस्तुओं का उपयोग कर सकते हैं, जिनका आसानी से पुनरुपयोग और निस्तारण किया जा सके। यह वह समय है जब हमें इस समस्या पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए, इसके समाधान के लिये प्रयास शुरु करने होंगे।

हमारी वायुमण्डल के ऊपर ओजोन परत है जो हमारे लिए एक ढाल के रूप में काम करती है और सूर्य से आने वाली हानिकारक किरणों से पृथ्वी को बचाती है जो मनुष्य, जानवरों, पेड़-पौधों, जीव-जन्तुओं के लिए बहुत हानिकारक होती हैं परन्तु बदलती आबोहवा या जलवायु परिवर्तन और देश में हजारों फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण, निकलने वाली खतरनाक गैसों के कारण इस परत को दिन-प्रतिदिन नुकसान हो रहा है जिस कारण आज कई बीमारियां हो रही हैं जैसे- त्वचा व फेफड़ों आदि का कैंसर, त्वचा का जलना, आंखों में अंधापन, रोगों से लड़ने की क्षमता का कम करना, जीव-जन्तुओं को अत्यधिक नुकसान हो रहा है। साथ ही बारिश समय से न होना या बहुत अधिक होना या बादल फटना जैसी घटनायें लगातार बढ़ने लगी हैं।

आइये अब हम सबको मिलकर अपने पर्यावरण (अपने जल, जंगल, जमीन, जानवर और जन) को बचाने के लिए एकजुट हो जाना है अपने लिए, अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ी के लिए भी शुद्ध हवा, पानी, जंगल, जमीन बचाकर जाना है, अगर अब भी हमने पर्यावरण को बचाने के लिए कमर नहीं कसी तो आने वाले समय में ये सब कहानी बन कर रह जायेगा और पृथ्वी पर जीवन खत्म हो जायेगा।

हंगर प्रोजेक्ट दिल्ली की बागेश्वर जिला संयोजक, बसंती कपकोटी ने जानकारी देते हुए कहा कि वीरांगना महिला जन प्रतिनिधि संगठन की सदस्यों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कत्यूर घाटी की 24 पंचायतों में पर्यावरण संरक्षणअभियान चलाया गया। अभियान के अंतर्गत डोर टू डोर संपर्क कर संगठन के सदस्यों को जागरूक किया जा रहा हैं। बसंतीकपकोटी ने बताया कि पिछले 100 वर्षों में पृथ्वी का तापमान 0.9 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। जिससे बारिश कम हो रही है, ग्लेशियर पिघल रहे हैं, प्राकृतिक स्रोत सूख रहे हैं, खान पान, आजीविका आदि प्रभावित है। समाधान के लिए अधिक संख्या में वृक्ष लगाने होंगे उनका संरक्षण करना होगा। अपने नौलों धारों के आसपास चौड़ी पत्ती के वृक्षलगाने होंगे, प्लास्टिक का उपयोग बंद करना होगा। हमारी खेती भी प्लास्टिक से प्रभावित हो रही है।

आनंदी देवी, प्रधान, अमोलीहमको अपने वातावरण को पोषित करते हुए जल,जंगल, जमीन के प्रति संवेदनशील होना होगा।पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन जन तक पहुंचेगा तो हमारे जल, जंगल, जमीन भी सुरक्षित रहेंगे। हम अपने वन पंचायत में अपने घरके आसपास प्रत्येक महिला पांच पेड़ लगाएंगे और उनका संरक्षण भी करेंगे। हमने प्रयास किए अपनी पंचायत में पेड़ों कटान कमकिया।पर्यावरण संरक्षण अभियान में मौजूद रहेआनंदी देवी, ग्राम प्रधान अमोली, बसंती कपकोटी समन्वयक, मंजू बोरा, लक्ष्मी, ममता, अंजली देवी, गंगा राम, चंद्र शेखर, नीमा देवी वार्ड मेंबर, ज्योति देवी, बीना राज, आशा देवी, चंद्र क्ला देवी आदि।

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