विपिन जोशी…
साहसिक पर्यटन को उचित दिशा नहीं दे पाई सरकार
पिंडारी ग्लेशियर ट्रैकिंग रूट पर लापता पर्यटक की खोजबीन हेतु जारी रेस्क्यू अभियान एवं घटनास्थल पर किया घटना का री-क्रिएशन। उत्तराखंड का बागेश्वर जिला साहसिक पर्यटन के लिए जाना जाता है, लेकिन उचित सुविधा नहीं से पर्यटक अब उत्तराखंड आने से बच रहे हैं। विगत दिनों उत्तरकाशी से बबीता पांडे और कपकोट से अभिषेक चौहान लापता हो गए थे ।
पिंडारी ग्लेशियर ट्रैकिंग रूट पर लापता हुए उत्तर प्रदेश के पर्यटक अभिषेक चौहान की खोज बीन अभी तक जारी है, अभिषेक के परिजनों ने दस लाख का ईनाम भी घोषित कर दिया है।
खोजबीन के लिए पुलिस प्रशासन और रेस्क्यू टीमों द्वारा लगातार सघन सर्च अभियान चलाया जा रहा है।
दिनांक 28 मई 2026 को शामली, उत्तर प्रदेश के निवासी पर्यटक अभिषेक चौहान पिंडारी ग्लेशियर की ट्रैकिंग पर गए थे। दिनांक 29/05/2026 को दोपहर लगभग 14:30 बजे वापस लौटते समय, खाती से करीब 07-08 किलोमीटर पहले ‘छिल्याणी गधेरे’ के पास वह अचानक लापता हो गए । जिसकी सूचना उनके पोर्टर/गाइड आनंद राम द्वारा रात लगभग 20:00 बजे खाती गाँव पहुँचकर दी गई । सूचना मिलने पर संबंधित विभागों द्वारा तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। पहले ही दिन SDRF के दीपक नेगी मिसिंग पॉइंट से रोप वे के माध्यम से पिंडर नदी में उतरे थे जहाँ उन्हें 50 मीटर नीचे पत्थर की आड़ में गुमशुदा अभिषेक का कैमरा बरामद हुआ था। जिस स्थान में कैमरा बरामद हुआ वहाँ आसानी से नहीं पंहुचा जा सकता था। परिजनों की लिखित तहरीर के आधार पर दिनांक 1 जून को थाना कपकोट में गुमशुदगी दर्ज की गई और लगातार जारी सर्च ऑपरेशन के दौरान गधेरे से लगभग 150-200 मीटर नीचे पिंडर नदी के पास से लापता पर्यटक का रैनकोट और कैप बरामद की गई। इसी क्रम में दिनांक 09/06/2026 को पुलिस उपाधीक्षक बागेश्वर के नेतृत्व में तकनीकी साक्ष्यों को जुटाने और घटना के सटीक कारणों को समझने के लिए संभावित घटनास्थल पर घटना का री-क्रिएशन कर संभावित घटनास्थल का निरीक्षण किया गया।
गुमशुदा पर्यटक की तलाश के लिए रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। पुलिस अधीक्षक बागेश्वर जितेन्द्र मेहरा द्वारा इस अभियान की निरंतर समीक्षा व निगरानी की जा रही है।
हिमालयन रेंज में उचित रास्ते, संचार की व्यवस्था, विश्राम स्थल, प्राथमिक उपचार व्यवस्था आपातकालीन एयर एंबुलेंस आदि की सुविधा होनी चाहिए। ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना में रेस्क्यू में मदद हो और लोगों को सुरक्षित किया जा सके। इसके अलावा सरकार को पर्यटन नीति में बहुत से रचनात्मक सुधार करने की आवश्यकता भी है। धार्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन, आदि मार्गों को ठीक रखना भी महत्वपूर्ण है। वर्ना पर्यटक हिमालय से क्या संदेश लेकर जाएंगे ?



















